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Faridabad News: गृहकार्य में बच्चे कर रहे रटने की जगह अनुभव से पढ़ाई
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शीतकालीन अवकाश के दौरान साझा की जा रहीं गतिविधियां, कराई जा रही पेड़ पौधों की आकृतियों और रंगों की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शीतकालीन अवकाश के दौरान गुरुग्राम के स्कूलों में बच्चों को किताबों तक सीमित रखने की बजाय अनुभव आधारित गृहकार्य दिया गया है। शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से रोजाना गतिविधियां साझा कर रहे हैं, जिनमें बच्चे घर पर ही खेल-खेल में सीख रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ सामाजिक शारीरिक और भावनात्मक क्षमताओं को मजबूत करना है। गतिविधियों में बच्चों को आसपास की चीजों को समझने, सवाल पूछने और खुद समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभिभावक भी इन कार्यों में बच्चों का सहयोग कर रहे हैं।
गृहकार्य के तहत बच्चों से घर के आसपास के पेड़-पौधों आकृतियों और रंगों की पहचान कराई जा रही है। साथ ही फिंगर पेंटिंग, कागज की आकृतियां बनाना, रसोई में उपयोग होने वाली वस्तुओं को पहचानना और परिवार के सदस्यों से संवाद करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। बच्चों की ओर से किए गए कार्यों की फोटो और वीडियो शिक्षक ग्रुप में साझा किए जाते हैं, जिन पर शिक्षक प्रतिक्रिया देकर बच्चों का उत्साह बढ़ा रहे हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास के साथ सीखने की रुचि भी बढ़ रही है।
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वर्जन
इस अनुभव आधारित गृहकार्य के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति विकसित होगी और समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ेगी। आने वाले समय में इस तरह की गतिविधियों को और विस्तार देने की योजना है। - सरोज दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी गुरुग्राम।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शीतकालीन अवकाश के दौरान गुरुग्राम के स्कूलों में बच्चों को किताबों तक सीमित रखने की बजाय अनुभव आधारित गृहकार्य दिया गया है। शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से रोजाना गतिविधियां साझा कर रहे हैं, जिनमें बच्चे घर पर ही खेल-खेल में सीख रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ सामाजिक शारीरिक और भावनात्मक क्षमताओं को मजबूत करना है। गतिविधियों में बच्चों को आसपास की चीजों को समझने, सवाल पूछने और खुद समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभिभावक भी इन कार्यों में बच्चों का सहयोग कर रहे हैं।
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गृहकार्य के तहत बच्चों से घर के आसपास के पेड़-पौधों आकृतियों और रंगों की पहचान कराई जा रही है। साथ ही फिंगर पेंटिंग, कागज की आकृतियां बनाना, रसोई में उपयोग होने वाली वस्तुओं को पहचानना और परिवार के सदस्यों से संवाद करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। बच्चों की ओर से किए गए कार्यों की फोटो और वीडियो शिक्षक ग्रुप में साझा किए जाते हैं, जिन पर शिक्षक प्रतिक्रिया देकर बच्चों का उत्साह बढ़ा रहे हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास के साथ सीखने की रुचि भी बढ़ रही है।
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इस अनुभव आधारित गृहकार्य के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति विकसित होगी और समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ेगी। आने वाले समय में इस तरह की गतिविधियों को और विस्तार देने की योजना है। - सरोज दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी गुरुग्राम।