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Faridabad News: शिशु वार्ड में हाथ से पंखा करने को मजबूर तीमारदार

Mon, 25 May 2026 11:59 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 11:59 PM IST
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Attendants forced to fan the infant ward with their hands
संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। भीषण गर्मी के बीच जिला नागरिक अस्पताल के शिशु वार्ड और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में पर्याप्त वेंटिलेशन और ठंडी हवा की व्यवस्था नहीं होने से बंद कमरों में उमस बढ़ गई है। कई वार्डों में लगे एसी काम नहीं कर रहे, जबकि सेंट्रल एसी की छत पर लगी मशीन भी खराब पड़ी बताई जा रही है। ऐसे में मरीजों के परिजन हाथ से पंखा कर बच्चों को राहत देने का प्रयास कर रहे हैं।



शिशु वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण बच्चों की हालत और बिगड़ रही है। कई बेड के ऊपर लगे पंखे भी काम नहीं कर रहे हैं। तीमारदारों का कहना है कि यदि एसी ठीक नहीं हो पा रहे हैं तो कम से कम वार्डों की खिड़कियां और शीशे खोल दिए जाएं ताकि बाहर की हवा अंदर आ सके। अस्पताल में बढ़ती भीड़ और खराब कूलिंग सिस्टम के कारण मरीजों को इलाज के साथ-साथ गर्मी से भी जूझना पड़ रहा है। आपातकालीन वार्ड सहित बाल चिकित्सा परिसर के अन्य हिस्सों में भी मरीजों ने गर्मी को लेकर परेशानी जताई है।
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मेरा बेटा रॉबिन पिछले पांच दिनों से दस्त और बुखार के कारण भर्ती है। बेड के ऊपर लगा पंखा भी काम नहीं कर रहा। बच्चे को गर्मी से राहत देने के लिए हाथ से पंखा करना पड़ रहा है । -पूनम, नहर पार निवासी
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भतीजा नक्ष पिछले पांच दिनों से भर्ती है। वार्ड में एसी तो लगा है, लेकिन बंद पड़ा है। गर्मी और उमस के कारण बच्चे और तीमारदार दोनों परेशान हैं।-गुड्डी, सुभाष चौक निवासी


यहां बहुत गर्मी है। लंबे समय तक कमरे में बैठना मुश्किल हो रहा है। मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।-फूलमती देवी, न्यू टाउन निवासी


मैं पिछले दस दिनों से बेटे के इलाज के लिए अस्पताल में हूं। गर्मी के कारण हालत और खराब हो रही है। अगर एसी ठीक नहीं हैं तो कम से कम खिड़कियां खोल देनी चाहिए ताकि बाहर की हवा आ सके।-आसमा, सेक्टर-23 निवासी



अस्पताल में कूलिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जहां पंखे और एसी खराब हैं, वहां उन्हें ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों और तीमारदारों को राहत मिल सके।-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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