अमर उजाला पड़ताल: स्वास्थ्य केंद्र में पाथते हैं उपले, मरीजों का बाहर होता उपचार, बांधी जाती हैं भैंसे
गांव ददरिया स्थित खस्ताहाल स्वास्थ्य केंद्र में उपले पाथते हैं, हालांकि कुछेक ने कहा कि इसमें तो भैंसे भी बंधती है। मरीजों का उपचार बाहर खुले में होता है।
विस्तार
फरीदाबाद की स्वास्थ्य सुविधाओं में सराकर सुधार के भले ही बड़े-बड़े दावे की कर रही हो, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अमर उजाला पड़ताल के तहत बृहस्पतिवार को हमारी टीम गांव ददसिया और सेक्टर-23 स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची।
गांव ददरिया स्थित खस्ताहाल स्वास्थ्य केंद्र में उपले पाथते हैं, हालांकि कुछेक ने कहा कि इसमें तो भैंसे भी बंधती है। मरीजों का उपचार बाहर खुले में होता है। वहीं, सेक्टर-23 संजय कॉलोनी स्थित स्वास्थ्य केंद्र केवल दो डॉक्टरों के सहारे चल रहा है। जिससे मरीजों को काफी परेशान है।
गांव ददसिया स्थित रूरल हेल्थ सेंटर वर्ष 1978 में बना था। उस समय यहां तीन से चार डॉक्टर तैनात थे। इसके अलावा अन्य स्टाफ भी था। करीब एक दर्शन से अधिक गांव के लोग सेंटर पर इलाज के लिए आते थे। मौजूद समय में छह गांव रूरल हेल्थ सेंटर से जुड़े है। ग्रामीणों ने बताया कि समय के साथ स्वास्थ्य केंद्र की खस्ता हालत पर ध्यान नहीं दिया गया। अब हालत यह है कि तीन कमरे का यह अस्पताल खंडर बन गया था। यहां भैंसे बंधती है।
बेहतर इलाज के अभाव में 15 किलोमीटर दूर जाते हैं लोग
स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के लिए केवल एक नर्सिंग स्टाफ तैनात है। वह भी तीन दिन में एक बार आती है और नीम के नीचे या किसी के घर पर बैठकर मरीजों का इलाज करती है। इलाज के नाम पर मरीजों को खांसी बुखार, जुखाम की दवाईयां देकर चलता कर दिया जाता है। इस कारण मरीजों को बेहतर इलाज के लिए 15 किलोमीटर दूर खेड़ीकला स्वास्थ्य केंद्र या निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। सेक्टर-23 संजय कॉलोनी स्थित स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर समेत पांच कर्मचारियों का स्टाफ है।
यहां रोजाना करीब 80 मरीज इलाज के लिए आते है। अस्पताल में न हो एक्स-रे की सुविधा और न अल्ट्रासाउंड की। ऐसे में मरीजों को बीके अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिससे सिविल अस्पताल में मरीजों का बोझ बढ़ता है। मरीजों ने कहा कि अस्पतालों में स्वास्थ सुविधाएं बढ़ाने की कई बार अधिकारियों से मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है।
क्या कहते हैं अधिकारी और लोग
गांव ददसिया स्वास्थ्य केंद्र की मरम्मत कराई जाएगी। डॉक्टर और स्टाफ को तैनात किया जाएगा। जिससे गांव वासियों को परेशानी न हो। संजय कॉलोनी स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है।- डॉ. विनय गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
लोगों से बातचीत
गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। एक स्वास्थ्य केंद्र है। उसकी हालत बेहद खराब है। कमरों के अंदर प्लाटर झड़ता है। अब उसमें भैंसे बंधने लगी है। एक नर्स इलाज करनी आती है। सबसे ज्यादा दिक्कत प्रसूति केस में आती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को गांव में एक प्रसूति केंद्र बनाना चाहिए।- तरुण त्यागी, गांव ददसिया
स्वास्थ्य केंद्र में छह गांव के लोग इलाज के लिए आते है। यहां इलाज के नाम पर केवल खांसी, जुखाम की दवाई मिलती है। दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए शहर भागना पड़ता है।- तारा चंद, गांव ददसिया
स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा बढ़ाने की जरूरत है। जिससे मरीजों को बीके अस्पताल जाने की जरुरत नहीं पड़े।- कन्हैयालाल, संजय कॉलोनी