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Faridabad News: 11 महीने बाद एम्स शाखा को मिले एंटी रेबीज टीके
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। एम्स शाखा में 11 महीने से एंटी रेबीज टीके न होने से परेशान मरीजों के लिए राहत की खबर है। अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके आने से अब मरीजों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक हजार इंजेक्शन भेज दिए गए हैं।
बल्लभगढ़ सरकारी अस्पताल के आपातकालीन विभाग का संचालन हरियाणा सरकार व ओपीडी का संचालन एम्स दिल्ली करता है। वहीं, एंटी रेबीज इंजेक्शन की पूर्ति हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाती है। एम्स सरकारी अस्पताल में जनवरी महीने से एंटी रेबीज के टीके नहीं हैं। इस कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से तीन गुना दामों पर इंजेक्शन खरीदने पड़ते थे। अब इंजेक्शन आने के बाद मरीजों को काफी सुविधा हो गई है। मरीजों को प्रति इंजेक्शन के लिए 100 रुपये देने होते है, जबकि बीपीएल कार्ड धारकों को मुफ्त में इंजेक्शन लगाया जाता है।
बंदरों-कुत्तों का बढ़ा रहा आतंक, कोई इंतजाम नहीं
मोहल्ले, कॉलोनी की गलियों, गांव, सेक्टरों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा सेक्टरों और पार्कों में बंदरों का भी आतंक देखने को मिलता है। इनकों पकड़ने के लिए प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं है। हालांकि बंदरों को काबू करने के लिए नगर निगम की ओर से पार्कों में जाल लगा दिया जाता है। स्वच्छता सर्वेक्षण बृजमोहन शर्मा का कहना है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। वहीं, कुत्तों की नसबंदी का ठेका निजी संस्थान को दिया हुआ है।
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एसएमओ डॉ. टीसी गिडवाल ने बताया कि 11 महीने बाद उनके अस्पताल को एंटी रेबीज के इंजेक्शन दिए गए हैं। उनके पास अब पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन हैं। अब मरीज कार्ड बनाकर आसानी से इंजेक्शन लगवा सकते हैं।
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बल्लभगढ़। एम्स शाखा में 11 महीने से एंटी रेबीज टीके न होने से परेशान मरीजों के लिए राहत की खबर है। अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके आने से अब मरीजों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक हजार इंजेक्शन भेज दिए गए हैं।
बल्लभगढ़ सरकारी अस्पताल के आपातकालीन विभाग का संचालन हरियाणा सरकार व ओपीडी का संचालन एम्स दिल्ली करता है। वहीं, एंटी रेबीज इंजेक्शन की पूर्ति हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाती है। एम्स सरकारी अस्पताल में जनवरी महीने से एंटी रेबीज के टीके नहीं हैं। इस कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से तीन गुना दामों पर इंजेक्शन खरीदने पड़ते थे। अब इंजेक्शन आने के बाद मरीजों को काफी सुविधा हो गई है। मरीजों को प्रति इंजेक्शन के लिए 100 रुपये देने होते है, जबकि बीपीएल कार्ड धारकों को मुफ्त में इंजेक्शन लगाया जाता है।
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बंदरों-कुत्तों का बढ़ा रहा आतंक, कोई इंतजाम नहीं
मोहल्ले, कॉलोनी की गलियों, गांव, सेक्टरों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा सेक्टरों और पार्कों में बंदरों का भी आतंक देखने को मिलता है। इनकों पकड़ने के लिए प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं है। हालांकि बंदरों को काबू करने के लिए नगर निगम की ओर से पार्कों में जाल लगा दिया जाता है। स्वच्छता सर्वेक्षण बृजमोहन शर्मा का कहना है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। वहीं, कुत्तों की नसबंदी का ठेका निजी संस्थान को दिया हुआ है।
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एसएमओ डॉ. टीसी गिडवाल ने बताया कि 11 महीने बाद उनके अस्पताल को एंटी रेबीज के इंजेक्शन दिए गए हैं। उनके पास अब पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन हैं। अब मरीज कार्ड बनाकर आसानी से इंजेक्शन लगवा सकते हैं।