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134 के तहत दाखिला लेने वाले 99 बच्चे निकले फर्जी गरीब , शिक्षा निदेशालय ने कमेटी गठित कर परिवार पहचान पत्र व आय प्रमाण पत्र के आधार पर शुरु की जांच

Mon, 17 Jan 2022 10:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 10:45 PM IST
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99 children enrolled under 134 turned out to be fake poor
99 children enrolled under 134 turned out to be fake poor
फरीदाबाद। कोरोना काल में आर्थिक रुप से कमजोर विद्यार्थियों के दाखिले उच्च न्यायालय ने अनिवार्य कर दिए। हालांकि आर्थिक कमजोरी का हवाला देने वाले यह परिवार वास्तव में आर्थिक रूप से कैसे हैं, इसकी जांच निदेशालय ने शुरू कर दी है। जिले के दो खंड फरीदाबाद व बल्लभगढ़ में भी ऐसे विद्या र्थियों की जांच होनी है। फिलहाल फरीदाबाद खंड में जांच शुरु की गई है। इसमें अब तक 99 बच्चे आर्थिक रूप से फर्जी गरीब मिले हैं।
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निदेशालय ने 15 जनवरी तक 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला लेने की समय सीमा तय की थी। वहीं, जिले के 200 ऐसे स्कूल हैं जो साफ तौर पर ऐसे विद्या र्थियों को दाखिला देने से इंकार कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस पर ज्यादातर स्कूल ने जवाब दिया कि जो बच्चे 134ए के तहत दाखिला चाहते हैं, वह आर्थिक रुप से संपन्न हैं। इनकी जांच कर सत्यापित प्रमाण पत्र संलग्न किया जाए। इस पर निदेशालय ने ऐसे स्कूलों के तर्क को मानते हुए बच्चों की स्थिति जांचने के लिए कमेटी गठित की है। जिले के फरीदाबाद खंड में यह जांच फिलहाल जारी है। इसमें अब तक 99 ऐसे विद्यार्थी मिले हैं।
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खंड शिक्षा अधिकारी मनोज मित्तल ने बताया कि जिले में 134ए के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की जांच निदेशालय स्तर से गठित कमेटी कर रही है। फरीदाबाद खंड के करीब 1600 विद्यार्थियों की जांच होनी है। इसमें से 99 बच्चे ऐसे मिले हैं, जिनके परिवार की आर्थिक आय दो लाख रुपये वार्षिक से अधिक है। ऐसे में यह बच्चे 134ए के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा की पात्रता पूरी नहीं करते। इन बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला नहीं मिला था। अब इनके दाखिले में शिक्षा विभाग भी सहयोग नहीं करेगा। वहीं, विभागीय कार्रवाई के लिए नियम निदेशालय स्तर से तय होंगे।
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134ए के तहत दाखिले का आधार:
- हरियाणा में राज्य शिक्षा अधिकार नियम 2013 (संशोधित) के अधिनियम 134 ए के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा का अधिकार
- आर्थिक रूप से कमजोर राज्य के मूल निवासी, जिनकी वार्षिक आमदनी दो लाख रुपये या इससे कम हो।
- नियम के तहत विद्यार्थी दसरी से 12वीं कक्षा तक की स्कूल पढ़ाई सरकारी नियमों के अनुसार निजी स्कूल में कर सकता है।
- शिक्षा के अधिकार के तहत 8वीं कक्षा तक निजी स्कूल में निशुल्क पढ़ाई का अधिकार
- 9वीं से 12वीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों के जितनी कक्षा अनुसार फीस का भुगतान निजी स्कूल प्रबंधन को करना अनिवार्य।
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