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Faridabad News: पानी को शुद्ध करने के लिए 21.24 करोड़ की हाईटेक जल शोधन योजना मंजूर
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आधुनिक हाइब्रिड सिरेमिक मेंब्रेन तकनीक आधारित 30 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा
पानी में मौजूद आर्सेनिक, मैंगनीज और अन्य हानिकारक तत्वों को हटाया
12 महीनों में प्लांट को पूरी क्षमता से चालू करने का लक्ष्य
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने यमुना खादर क्षेत्र के रैनी वेल से मिलने वाले पानी को शुद्ध करने के लिए 21.24 करोड़ की हाईटेक जल शोधन योजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत आधुनिक हाइब्रिड सिरेमिक मेंब्रेन तकनीक आधारित 30 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जो पानी में मौजूद आर्सेनिक, मैंगनीज और अन्य हानिकारक तत्वों को हटाकर उसे पीने योग्य बनाएगा।
फरीदाबाद की आबादी लगातार बढ़ रही है। अनुमान के अनुसार वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र और आसपास के शहरी इलाकों को मिलाकर जिले की आबादी करीब 20 लाख के करीब पहुंच चुकी है। औद्योगिक और आवासीय विस्तार के कारण शहर में प्रतिदिन पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार शहर में मौजूदा समय में प्रतिदिन करीब 320 से 340 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि नियमित आपूर्ति लगभग 250 से 270 एमएलडी के बीच ही हो पाती है। गर्मियों में यह अंतर और बढ़ जाता है।
भूजल पर टिका है फरीदाबाद का बड़ा हिस्सा
फरीदाबाद की पेयजल व्यवस्था काफी हद तक भूजल स्रोतों पर निर्भर है। यमुना के बाढ़ क्षेत्र में स्थापित 22 रैनी वेल और शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे करीब 160 डीप ट्यूबवेल रोजाना लगभग 120 एमएलडी पानी उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम और अन्य एजेंसियों के माध्यम से भी सप्लाई की जाती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर में गिरावट और पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड और एफएमडीए की संयुक्त मॉनिटरिंग के दौरान कुछ जल स्रोतों में आर्सेनिक और मैंगनीज की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई थी। इसके बाद इस समस्या के स्थायी समाधान पर काम शुरू किया गया।
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रैनी वेल नंबर 5, 20 और 22 पर रहेगा पहला फोकस
वैज्ञानिक जांच में रैनी वेल नंबर-5, 20 और 22 के पानी में सुधार की तत्काल जरूरत चिन्हित की गई है। इन्हीं स्रोतों के पानी को पहले चरण में नई तकनीक से शुद्ध किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक यह परियोजना भविष्य में अन्य प्रभावित जल स्रोतों के लिए भी मॉडल का काम करेगी।
हाइब्रिड सिरेमिक मेंब्रेन तकनीक से तीन स्तर पर साफ होगा जल
एफएमडीए ने इस परियोजना के लिए देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं सीएसआईआर-नीरी और सीएसआईआर-सीजीसीआरआई का तकनीकी सहयोग लिया है। वैज्ञानिकों ने एक विशेष हाइब्रिड प्रक्रिया तैयार की है जिसमें तीन स्तर पर पानी का शोधन होगा। पहला चरण में सिरेमिक मेंब्रेन फिल्ट्रेशन की मदद ली जाएगी। इस तकनीक में बेहद सूक्ष्म स्तर पर पानी को फिल्टर किया जाएगा जिससे आर्सेनिक, आयरन और अन्य धात्विक कण अलग हो जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में आर्सेनिक पॉलिशिंग डिवाइस से काम होगा। यह सिस्टम पानी की गुणवत्ता को भारतीय मानक ब्यूरो के अनुरूप बनाएगा। वहीं तीसरे चरण में प्री-क्लोरीन डोजिंग से काम होगा। इस आधुनिक क्लोरीन सिस्टम के जरिये पानी को जीवाणु मुक्त किया जाएगा ताकि जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो सके।
शहर की लाइफलाइन हैं यमुना खादर के रैनी वेल
ददसिया, मौजपुर, मंझावली और किडावली क्षेत्र में बने रैनी वेल फरीदाबाद की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यमुना के किनारे होने के कारण इन क्षेत्रों में भूमिगत जल उपलब्धता बेहतर रहती है लेकिन औद्योगिक गतिविधियों, बढ़ते शहरीकरण और भूजल दोहन के कारण गुणवत्ता पर असर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता सुधारने के कदम नहीं उठाए जाते तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आर्सेनिक और मैंगनीज की अधिक मात्रा लंबे समय तक शरीर में जाने पर त्वचा, लीवर और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
प्रति एमएलडी 70.80 लाख की लागत आएगी
एफएमडीए अधिकारियों के अनुसार परियोजना की टेंडर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और अगले 12 महीनों में प्लांट को पूरी क्षमता से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की कुल लागत 21.24 करोड़ है यानी प्रति एमएलडी करीब 70.80 लाख की लागत आएगी।
लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि शुद्ध पेयजल मिलने से जलजनित बीमारियों पर होने वाला खर्च कम होगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह परियोजना केवल जल शोधन योजना नहीं बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो हरियाणा के अन्य शहरों में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। फरीदाबाद के लिए यह परियोजना बुनियादी ढांचे और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लोगों की सुविधा के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जल्द ही इस परियोजना को भी पूरा कर लिया जाएगा।
-विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर, एफएमडीए
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पानी में मौजूद आर्सेनिक, मैंगनीज और अन्य हानिकारक तत्वों को हटाया
12 महीनों में प्लांट को पूरी क्षमता से चालू करने का लक्ष्य
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने यमुना खादर क्षेत्र के रैनी वेल से मिलने वाले पानी को शुद्ध करने के लिए 21.24 करोड़ की हाईटेक जल शोधन योजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत आधुनिक हाइब्रिड सिरेमिक मेंब्रेन तकनीक आधारित 30 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जो पानी में मौजूद आर्सेनिक, मैंगनीज और अन्य हानिकारक तत्वों को हटाकर उसे पीने योग्य बनाएगा।
फरीदाबाद की आबादी लगातार बढ़ रही है। अनुमान के अनुसार वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र और आसपास के शहरी इलाकों को मिलाकर जिले की आबादी करीब 20 लाख के करीब पहुंच चुकी है। औद्योगिक और आवासीय विस्तार के कारण शहर में प्रतिदिन पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार शहर में मौजूदा समय में प्रतिदिन करीब 320 से 340 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि नियमित आपूर्ति लगभग 250 से 270 एमएलडी के बीच ही हो पाती है। गर्मियों में यह अंतर और बढ़ जाता है।
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भूजल पर टिका है फरीदाबाद का बड़ा हिस्सा
फरीदाबाद की पेयजल व्यवस्था काफी हद तक भूजल स्रोतों पर निर्भर है। यमुना के बाढ़ क्षेत्र में स्थापित 22 रैनी वेल और शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे करीब 160 डीप ट्यूबवेल रोजाना लगभग 120 एमएलडी पानी उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम और अन्य एजेंसियों के माध्यम से भी सप्लाई की जाती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर में गिरावट और पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड और एफएमडीए की संयुक्त मॉनिटरिंग के दौरान कुछ जल स्रोतों में आर्सेनिक और मैंगनीज की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई थी। इसके बाद इस समस्या के स्थायी समाधान पर काम शुरू किया गया।
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रैनी वेल नंबर 5, 20 और 22 पर रहेगा पहला फोकस
वैज्ञानिक जांच में रैनी वेल नंबर-5, 20 और 22 के पानी में सुधार की तत्काल जरूरत चिन्हित की गई है। इन्हीं स्रोतों के पानी को पहले चरण में नई तकनीक से शुद्ध किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक यह परियोजना भविष्य में अन्य प्रभावित जल स्रोतों के लिए भी मॉडल का काम करेगी।
हाइब्रिड सिरेमिक मेंब्रेन तकनीक से तीन स्तर पर साफ होगा जल
एफएमडीए ने इस परियोजना के लिए देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं सीएसआईआर-नीरी और सीएसआईआर-सीजीसीआरआई का तकनीकी सहयोग लिया है। वैज्ञानिकों ने एक विशेष हाइब्रिड प्रक्रिया तैयार की है जिसमें तीन स्तर पर पानी का शोधन होगा। पहला चरण में सिरेमिक मेंब्रेन फिल्ट्रेशन की मदद ली जाएगी। इस तकनीक में बेहद सूक्ष्म स्तर पर पानी को फिल्टर किया जाएगा जिससे आर्सेनिक, आयरन और अन्य धात्विक कण अलग हो जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में आर्सेनिक पॉलिशिंग डिवाइस से काम होगा। यह सिस्टम पानी की गुणवत्ता को भारतीय मानक ब्यूरो के अनुरूप बनाएगा। वहीं तीसरे चरण में प्री-क्लोरीन डोजिंग से काम होगा। इस आधुनिक क्लोरीन सिस्टम के जरिये पानी को जीवाणु मुक्त किया जाएगा ताकि जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो सके।
शहर की लाइफलाइन हैं यमुना खादर के रैनी वेल
ददसिया, मौजपुर, मंझावली और किडावली क्षेत्र में बने रैनी वेल फरीदाबाद की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यमुना के किनारे होने के कारण इन क्षेत्रों में भूमिगत जल उपलब्धता बेहतर रहती है लेकिन औद्योगिक गतिविधियों, बढ़ते शहरीकरण और भूजल दोहन के कारण गुणवत्ता पर असर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता सुधारने के कदम नहीं उठाए जाते तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आर्सेनिक और मैंगनीज की अधिक मात्रा लंबे समय तक शरीर में जाने पर त्वचा, लीवर और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
प्रति एमएलडी 70.80 लाख की लागत आएगी
एफएमडीए अधिकारियों के अनुसार परियोजना की टेंडर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और अगले 12 महीनों में प्लांट को पूरी क्षमता से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की कुल लागत 21.24 करोड़ है यानी प्रति एमएलडी करीब 70.80 लाख की लागत आएगी।
लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि शुद्ध पेयजल मिलने से जलजनित बीमारियों पर होने वाला खर्च कम होगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह परियोजना केवल जल शोधन योजना नहीं बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो हरियाणा के अन्य शहरों में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। फरीदाबाद के लिए यह परियोजना बुनियादी ढांचे और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लोगों की सुविधा के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जल्द ही इस परियोजना को भी पूरा कर लिया जाएगा।
-विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर, एफएमडीए