गुरुग्राम: कैंसर का कारण बन सकता है खाद्य तेल, प्रतिष्ठानों में शुद्धता की नहीं कोई गारंटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम जिले के प्रतिष्ठानों में उपयोग किए जा रहे खाद्य तेल की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। यह बात खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों से ही सामने आई है। विभाग के मुताबिक, जिले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) में पंजीकृत 5 से 6 हजार प्रतिष्ठान हैं। वर्ष 2020 के नौ माह में विभाग ने खाद्य तेल की जांच के लिए सिर्फ 15 नमूने लिए हैं।
यह स्थिति तब है, जब एफएसएसएआई ने खाद्य तेल के बार-बार उपयोग के खिलाफ विशेष चेतावनी चारी की है। इसके मुताबिक, खाद्य तेल का अधिकतम तीन बार ही उपयोग किया जा सकता है। इससे ज्यादा बार इस्तेमाल कर इसमें पकाया गया खाद्य पदार्थ कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का कारण बन सकता है।
उधर, लोग खाद्य सुरक्षा विभाग के भरोसे पर इन खाद्य पदार्थों का धड़ल्ले से सेवन कर रहे हैं। अनुमान है कि जिले में रेहड़ी-पटरी और छोटी-मोटी दुकानों में उपयोग किया जाने वाला 99 फीसदी खाद्य तेल सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं होता।
छोटी दुकानों पर तो उपयोग किए गए तेल को फेंकने और अन्य कार्यों में इस्तेमाल करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। छोटी दुकानों पर तेल के खत्म होने तक बार-बार उपयोग किया जाता है, लेकिन इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है।
एक आंकड़े के मुताबिक, छोटे-बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों को मिला दें तो गुरुग्राम में प्रतिदिन 10 हजार लीटर से ज्यादा खाद्य तेल की खपत है। इसमें से 90 फीसदी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती।
उपयोग किया तेल ले रही 5-6 कंपनियां
खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) डॉ. दीपक चौधरी ने बताया कि प्रतिष्ठान संचालकों को तेल का बार-बार उपयोग न करने के लिए खास तौर पर निर्देशित किया गया है। सरकार की तरफ से 5-6 कंपनियों को भी नियुक्त किया गया है, जो बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों से उपयोग किए गए तेल को लेकर उसका समुचित निस्तारण करती हैं।
अधिकांश कंपनियां इस तेल से बायोडीजल का निर्माण करती हैं। हालांकि, एफएसओ उन कंपनियों का नाम नहीं बता सके, जिनको उपयोग किए गए तेल की खरीद के लिए सरकार ने नियुक्त किया है।
तेज की जाएगी जांच की प्रक्रिया
अब तक हम खाद्य तेल के 15 नमूने ले चुके हैं। जांच की प्रक्रिया आगे और तेज होगी। त्योहारों को देखते हुए खाद्य पदार्थों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। पिछले तीन-चार दिन में पनीर व मावे के 21 नमूने जांच के लिए लैब में भेजे गए हैं।
- डॉ. दीपक चौधरी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
यह बोले लोग
हम तो इसी भरोसे पर दुकानों से खाद्य सामग्री की खरीदारी करते हैं कि जिले के अधिकारी इनकी समय-समय पर जांच करते होंगे।
-रणवीर, उपभोक्ता
मजबूरी में बाहरी दुकानों पर ही खाना पड़ता है। हमें नहीं मालूम कि जिस तेल में खाना पकाया जा रहा है, वह कितना शुद्ध है। यह तो अधिकारी ही जानते होंगे।
-वेद प्रकाश, उपभोक्ता