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...तो ताश के पत्ते की तरह ढह जाती 70% इमारतें

Sun, 26 Apr 2015 10:45 AM IST
Updated Sun, 26 Apr 2015 10:45 AM IST
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 Earthquake effect on delhi-ncr

भूकंप का केंद्र अगर नेपाल के बजाय दिल्ली के आस-पास होता तो यहां की इमारतें ताश के पत्ते की तरह ढह जातीं। रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में 90 फीसदी से ज्यादा मकान 6 रिएक्टर स्केल से ज्यादा का भूकंप सहने की क्षमता नहीं रखते।

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इसे बनाने में प्रयोग होने वाली सामग्री और गैर नियोजित ढंग से यमुना किनारे की रेतीली और गीली मिट्टी की सतह पर बसी कॉलोनियां सबसे ज्यादा संवेदनशील श्रेणी में हैं। यही वजह है कि दिल्ली को भूकंप के खतरनाक सिस्मिक जोन चार में रखा गया है।
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नवीनतम जनगणना रिपोर्ट 2011 के अनुसार दिल्ली में 46.05 लाख मकान हैं। इसमें 40.92 लाख मकानों में लोग रहते हैं। कुल मकानों में से 77.6 फीसदी मकान रिहायशी हैं।
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इन मकानों में 23.4 फीसदी मकानों की छत पत्थर और स्लेट से बनी हुई हैं, जबकि 4.2 फीसदी मकानों की छत ईंट की हैं। इसके अलावा 2.2 फीसदी मकानों की दीवार मिट्टी या कच्ची ईंट की हैं। 86.3 फीसदी मकानों की दीवार ईंट की हैं।

60-70 फीसदी आबादी पर मंडरा रहा खतरा

 Earthquake effect on delhi-ncr

यही नहीं एक अन्य रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली के करीब 90 फीसदी मकान बिना कंक्रीट-सरिये के बनाए गए हैं। इनके अलावा यहां यमुना किनारे रेतीली जमीन पर बने मकान भूकंप का केंद्र दिल्ली बनने पर ताश के पत्ते की तरह ढह जाएंगे।

भूकंप के खतरनाक सिस्मिक जोन-4 में आने वाले दिल्ली एनसीआर की 60-70 फीसदी आबादी गैर नियोजित मकानों में रहती है। इसके निर्माण के समय किसी भी तरह के मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है।

यमुना के किनारे की मिट्टी रेतीली होने के साथ नीचे गीली होती है। जिससे तेज भूकंप के झटके से नींव कमजोर हो जाती है। यमुनापार का इलाका ऐसा है जहां का आबादी घनत्व सबसे अधिक है।

यहां अनाधिकृत कॉलोनियों की संख्या भी अधिक है। यहां के 97 फीसदी मकान तेज भूकंप की दशा में अतिसंवेदनशील श्रेणी के हैं।

भूकंप से बचाएंगे ये कदम

 Earthquake effect on delhi-ncr

विशेषज्ञ कहते है कि अगर एनसीआर में 8 तीव्रता का भूकंप आया तो घनी आबादी, अनाधिकृत निर्माण, असुरक्षित कॉलोनी व गीली मिट्टी वाले क्षेत्र में बहुत अधिक नुकसान होगा।
-नए निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक को शामिल करें।
-पुराने कमजोर भवनों को भूकंपरोधी रेट्रोफिटमेंट कराया जाए।
-नियमों का पालन नहीं करने वाले भवन स्वामी के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करें।
-पब्लिक में भूकंप के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाएं एवं एजेंसियों को तैयार रखें।
-भूकंप आने की दशा में उससे निपटने के प्रबंधन को लेकर शिक्षा एवं प्रशिक्षण दें।
-भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आपात स्थिति से निपटने के संसाधनों को मजबूती दें।

ये भी जानें
रिपोर्ट के अनुसार विश्व में ग्रेट श्रेणी (रियक्टर स्केल पर 8 से अधिक) भूकंप साल में एक बार आता है। इसी तरह मेजर श्रेणी के (7 से 7.9) के एक साल में 18 बार, स्ट्रॉक (6 से 6.9) 120 बार, मध्यम (5 से 5.9 तीव्रता) के 800,  स्लाइट श्रेणी(4 से 4.9 तीव्रता) के 6200 बार, माइनर (3 से 3.9 तीव्रता) 49 हजार बार धरती हिलती है। इतना ही नहीं रियक्टर स्केल पर 2.9 से नीचे दैनिक एक हजार बार धरती हिलती है।

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