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Delhi Pollution: दमघोंटू हवा थाम रही बेजुबानों की सांसें, आंखों से लेकर फेफड़ों पर गंभीर असर

Thu, 28 Nov 2024 04:20 AM IST
विजय पुंडीर आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 28 Nov 2024 04:20 AM IST
सार

स्मॉग की मोटी चादर छाने से पक्षियों की दृश्यता पर असर पड़ रहा है। उन्हें सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की समस्या हो रही है। यही नहीं, पक्षियों के फेफड़ों में भी संक्रमण फैल रहा है। आलम यह है कि वे भोजन की तलाश में ऊंचाई तक उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।

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Delhi's poisonous air is having a serious impact on animals and birds
Delhi Pollution - फोटो : एएनआई

विस्तार

खतरनाक प्रदूषण से बचने के लिए शायद आप घर से बाहर न निकलें या कुछ दिनों के लिए कहीं साफ हवा वाले क्षेत्र में चले जाएंगे, लेकिन बेजुबान पशु-पक्षी इस दमघोंटू हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। वह अपने वातावरण को छोड़कर कहीं दूर नहीं जा सकते हैं।

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स्मॉग की मोटी चादर छाने से पक्षियों की दृश्यता पर असर पड़ रहा है। उन्हें सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की समस्या हो रही है। यही नहीं, पक्षियों के फेफड़ों में भी संक्रमण फैल रहा है। आलम यह है कि वे भोजन की तलाश में ऊंचाई तक उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। ऐसे में इनको पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है। इससे उनकी विकास दर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रदूषित हवा इंसानों के साथ पक्षियों की सांसें थाम रही है। इसके चलते पक्षियों की तबीयत बिगड़ रही है। हवा में मौजूद सल्फर, कार्बन मोनो ऑक्साइड और नाइट्रेट गैस के साथ कई जहरीली गैसों की वजह से पशु-पक्षियों का श्वसन तंत्र (क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिजीज) प्रभावित हो रहा है।
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इससे पक्षियों की जिंदगी पर भी खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है। चांदनी चौक के दिगंबर जैन लाल मंदिर स्थित पक्षियों के धर्मार्थ चिकित्सालय में बीते 10 दिनों में 200 से अधिक मामले वायु प्रदूषण संबंधी आए हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें सबसे अधिक संख्या कबूतरों की है। साथ ही कौवे, तोते और चील सहित अन्य पक्षियों को यहां लाया जा रहा है। हर दिन 15 से 20 घायल पक्षी लाए जा रहे हैं।
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जू में भी रखा जा रहा वन्यजीवों का ख्याल
चिड़ियाघर में प्रदूषण का असर उतना नहीं पड़ता है, इसकी वजह यहां की हरियाली है। बाहरी क्षेत्रों की तुलना में यहां ऑक्सीजन की उपलब्धता ज्यादा है लेकिन चिड़ियाघर प्रशासन लगातार पानी का छिड़काव कर रहा है। पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव होगा तो स्मॉग का असर पक्षियों और जानवरों पर कम होगा। चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि कई वन्यजीव मौसम के बदलाव के चलते अपने बाड़ों में से कम बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में उनका अधिक ध्यान रखा जा रहा है।

पशु-पक्षी ही सबसे अधिक खुले में रहते हैं। ऐसे में प्रदूषण का गंभीर असर भी इन पर पड़ना स्वभाविक है। इनका श्वसन तंत्र छोटा और संवेदनशील होता है। इस वजह से इनके लिए स्मॉग का कहर और भी खतरनाक है। वहीं, प्रदूषण की चपेट में आने से जो पक्षी पहले से बीमार हैं, वह ठीक भी जल्दी नहीं हो रहे हैं। -डॉ. हरअवतार, वरिष्ठ चिकित्सक, पक्षियों का धर्मार्थ चिकित्सालय, चांदनी चौक


प्रदूषण से कई पक्षी हो रहे उड़ने को मोहताज
विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रदूषण के कारण पक्षी कोराइजा नामक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी के संपर्क में आने से पक्षियों की आंखों में संक्रमण हो जाता है। इससे वह चिपक जाती हैं, जिससे वह दूर तक नहीं देख पाते हैं। प्रदूषण का प्रकोप जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे ही चिकित्सालय में पक्षियों का आना बदस्तूर जारी है। यहां इन पक्षियों का उपचार किया जा रहा है। उन्हें पानी और ओआरएस का घोल पिलाया जाता है। इससे काफी पक्षी ठीक होकर दोबारा उड़ान भरने लग जाते हैं, लेकिन भर्ती पक्षियों में से तकरीबन 10 फीसदी प्रदूषण से मर रहे हैं। चिकित्सक इसकी मुख्य वजह उनके फेफड़े में गंभीर संक्रमण बता रहे हैं। साथ ही हृदयाघात भी हो जाता है। ऐसे पक्षियों को भी फिर बचाना मुश्किल हो जाता है।

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