दिल्ली सरकार ने मीणा के अधिकार किए सीमित
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टकराव के बाद आखिरकार दिल्ली सरकार ने यह पहली बार माना की ज्वाइंट सीपी एमके मीणा एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) के हिस्से हैं। मगर एसीबी दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग निदेशक (डीओवी) के अंतर्गत ही काम करता है और उसमें ज्वाइंट सीपी की कोई पोस्ट नहीं है।
इसलिए एसीबी चीफ को उसी के आदेश मानने होंगे। इसे लेकर सतर्कता विभाग ने एक आदेश जारी किया है। जिसमें एसएस यादव की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए ज्वाइंट सीपी मीणा के अधिकार को सीमित बताया है।
मगर मीणा ने डीओवी के आदेश को पहले भी मानने से इनकार कर दिया था। ऐसे में वह इस आदेश को मानेंगे यह कहना मुश्किल है। सतर्कता विभाग के निदेशक सुकेश कुमार जैन की ओर से मंगलवार को एक ओर आदेश जारी किया गया।
एस एस यादव की ताकत बढ़ाने की कोशिश
इसमें उन्होंने पूर्व में जारी अधिसूचनाओं और आदेशों का हवाला देते हुए सतर्कता विभाग निदेशक कार्यालय को एसीबी का हेड बताया है। एसीबी में काम का बंटवारा भी वहीं करता है। डीओवी ने इसी आदेश में कहा है कि एसीबी में ज्वाइंट सीपी का कोई स्थायी पद नहीं है।
यह मामला फिलहाल न्यायालय में है। डीओवी ने इसी आदेश में मीणा और एसएस यादव के काम का बंटवारा किया है। ज्वाइंट सीपी एमके मीणा को एसीबी में ट्रेनिंग और अंडर ट्रायल केसेज देखने के लिए कहा गया है। वह यह तब तक देखेंगे जब तक पद का मामला न्यायालय में चल रहा है। डीओवी ने जहां मीणा के पर कतरने की कोशिश की है वहीं यादव को पावरफुल बताया है।
आदेश में यादव को जांच के साथ प्रशासनिक यानी एसीबी के थानों की जिम्मेदारी दी गई है। यही नहीं वह मीणा के बजाए सतर्कता विभाग के निदेशक को रिपोर्ट करेंगे। इस आदेश पर मीणा से बात करने की कोशिश की गई पर संपर्क नहीं हो पाया।