शादीशुदा और अनपढ़ महिलाओं को बनाते थे तस्करी का शिकार, खाड़ी देशों तक फैला धंधा
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नेपाली नागरिक व गिरोह का सरगना शाबिन शाह ने बताया कि वह वर्ष 2011 से इस धंधे में लिप्त हैं। उसके एजेंट नेपाल के अलावा भारत, श्रीलंका और खाड़ी देशों में फैले हुए हैं।
ये लोग शादीशुदा, अनपढ़ और गरीब महिलाओं की तलाश कर उन्हें मोटी सैलरी पर खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं। बाद में किसी तरह ये लोग महिलाओं का पासपोर्ट बनवाकर उन्हें दिल्ली महिपालपुर और रूप नगर स्थित शेल्टर होम ले आते हैं।
यहां से टूरिस्ट वीजा पर इन्हें पहले श्रीलंका भेजा जाता है। वहां इनके एजेंट श्रीलंका से खाड़ी देशों का वीजा लगवाकर वहां भेज देते हैं। खाड़ी देशों शोषण किया जाता है। कई बार नौकरी दिलवाने वाले एजेंट इनकी सैलरी से पांच हजार रुपये महीना भी ले लेते हैं।
श्रीलंका रूट से खाड़ी देशों में भेजते थे लड़कियां
श्रीलंका का रूट आसान
नेपाल और भारत के रास्ते खाड़ी देशों या अन्य देश (यूएई, सउदी अरब, कतर, कुवैत, बेहरीन, मलेशिया, लीबिया, जॉरडन, यमन, सूडान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, सीरिया, लेबनान, थाइलैंड और इराक) में नौकरी के लिए जाने वाली महिलाओं को इमिग्रेशन चेक से गुजरना होता था।
ऐसे में इनके फंसने का डर होता था। इसका भी इन लोगों ने हल निकाला हुआ था। ये लोग विदेश भेजने वाली महिलाओं को पहले दिल्ली लाते थे। यहां से टूरिस्ट वीजा पर पहले कोलंबो भेजा जाता था।
वहां से खाड़ी देश या अन्य देशों के लिए इमिग्रेशन चेक की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में वहां से ये लोग आसानी से बिना इमिग्रेशन के महिलाओं को खाड़ी देशों में भेज देते थे।
नेपाल में जुलाई माह में शाबिन के खिलाफ केस दर्ज
जुलाई माह में शाबिन ने 48 महिलाओं को कोलंबो के रास्ते विदेश भेजा था, लेकिन इनका एजेंट विदेश में महिलाओं को नौकरी नहीं दिला पाया।
नौकरी दिलाने के नाम पर लेते थे मोटी रकम
इधर एक युवती ने कोलंबो में गिरोह की शिकायत कर दी। पुलिस ने कुछ महिलाओं को काठमांडू से मुक्त कराकर शॉबिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। तभी से पुलिस को शॉबिन की तलाश थी।
नौकरी दिलाने के नाम पर लेते थे मोटी रकम
नौकरी दिलाने के नाम पर इन महिलाओं से मोटी रकम वसूली जाती थी। इसके लिए टिकट और अन्य खर्चों के अलावा 50 से 60 हजार रुपये वसूले जाते थे। इनको घरों के अलावा अस्पताल, मॉल या रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर नौकरी दिलाई जाती थी। कई बार इन महिलाओं का शारीरिक शोषण भी किया जाता था।
करीब चार पांच साल पहले शाबिन ने बिदिया को भी इसी तरह विदेश भेजा था। वहां से वापस आकर यह 15 हजार रुपये महीना लेकर शाबिन का शेल्टर होम देखने लगी।