हर्ष फायरिंग मामले में क्राइम ब्रांच करेगी जांच, बालकनी में खड़ी किशोरी को लगी थी गोली
हाईकोर्ट ने मंगोलपुरी इलाके में हर्ष फायरिंग में हुई किशोरी की मौत मामले की जांच अपराध शाखा के सुपुर्द कर दी। मृतका के पिता ने स्थानीय पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया था।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने सुनवाई के दौरान कहा कि किशोरी के पिता के पक्ष को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। वह मृतका का पिता है। ऐसे में वह किसी के दबाव में नहीं आ सकता।
ऐसे में अदालत मामले की अपराध शाखा को सौंपती है। अदालत ने मंगोलपुरी थाना पुलिस को एक सप्ताह में मामले से जुड़े सभी दस्तावेज अपराध शाखा को सौंपने का निर्देश दिया है। याची के वकील आकाश वाजपेयी ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मामले में किशोरी के पिता के बयान के आधार पर सही एफआईआर नहीं की है।
हवाई फायरिंग में गई थी किशोरी की जान
एफआईआर में पुलिस ने जिस व्यक्ति के नाम पर गोली चलाने की बात कहीं है किशोरी के पिता ने उसका नाम तक नहीं लिया, क्योंकि वह हादसे के समय अपनी चाय की दुकान पर थे।
उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच में लापरवाही बरत रही है। आरोपियों को बचाया जा रहा है। स्थानीय पुलिस की जांच काफी सुस्त है। ऐसे में मामले की जांच मंगोलपुरी थाने से लेकर क्राइम ब्रांच या फिर किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाने का निर्देश दिया जाए।
पेश मामले में 16 अप्रैल को मंगोलपुरी इलाके में अंजलि (17 )अपने घर की बालकनी में खड़ी थी। इस दौरान उसकी गली में से निकल रही बारात में किसी ने हवा में फायरिंग की, जिससे गोली अंजलि के सिर में आकर लगी।
तीन दिन अस्पताल में जिंदगी व मौत से जूझने के बाद उसने 19 अप्रैल को अस्पताल में दम तोड़ दिया। अंजलि 12वीं की छात्रा थी। अंजलि के पिता श्यामसुंदर ने अदालत में जनहित याचिका दायर कर राजधानी में हर्ष फायरिंग को लेकर गाइड लाइन बनाने की अपील की है। जिस पर सुनवाई लंबित है।