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देश-विदेश में नौकरी लगवाने के नाम करते थे ठगी, मास्टर माइंड समेत 10 गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 25 May 2017 09:48 AM IST
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प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए देश-विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब पांच हजार बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर साहिबाबाद पुलिस ने दस लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नोएडा, इंदिरापुरम और राजेंद्र नगर के ऑफिस से इन सबको गिरफ्तार कर 16 मोबाइल, तीन लैपटॉप, जरूरी दस्तावेज और रसीद बुक आदि बरामद किए हैं। गिरोह का बीएससी पास मास्टर माइंड खुद ठगी का शिकार हुआ था। खुद के ठगे जाने के बाद उसने प्लेसमेंट एजेंसी बनाकर दूसरे बेरोजगारों से ठगी शुरू कर दी और पूरा गिरोह बना लिया।
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एसपी सिटी आकाश तोमर ने बताया कि उड़ीसा निवासी सुरेंद्र पांडा और नोएडा सेक्टर-45 निवासी अभिनव सिंह ने करीब एक सप्ताह पहले थाना साहिबाबाद में नौकरी के नाम पर रुपये ठगी की शिकायत की थी। पुलिस ने राजेंद्र नगर स्थित प्लेसमेंट एजेंसी के ऑफिस पर छापा मारकर जांच की तो वहां से साईं हर्बल प्रोडक्ट नामक कंपनी के फर्जी दस्तावेज मिले। पुलिस ने कंपनी का मालिक बनकर बैठे मुकेश, अनिल व अतुल सिंह निवासी अलीगढ़ को धर दबोचा।
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इनकी निशानदेही पर इंदिरापुरम के आदित्य मॉल के पास बने ऑफिस ओर नोएडा सेक्टर-45 के ऑफिस से सात और लोगों को पकड़ा गया। इनमें संदीप कुमार निवासी मोतीहारी बिहार, संदीप निवासी औरैया, नुरुल इस्लाम निवासी टोंक राजस्थान, रोहित शर्मा निवासी इंदिरापुरम, राजकुमार निवासी इंद्रलोक दिल्ली, शोभित मिश्रा निवासी सेक्टर-44 नोएडा और पंकज सूर्यवंशम निवासी मैनपुरी शामिल हैं।
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इस मामले के वादी सुरेंद्र पांडा के अनुसार वह नौकरी की तलाश में उड़ीसा से आया था। सड़क पर चस्पा एक पोस्टर के जरिए उसने मुकेश से संपर्क किया। उसके पास बचे 100 रुपये भी मुकेश ने ठग लिए। बाद में उससे करीब साढ़े चार हजार की ठगी की। उसे इलाहाबाद भी भेजा गया मगर नौकरी नहीं लगी। नोएडा सेक्टर-45 निवासी अभिनव गेट एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं। मुकेश ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे भी हजारों रुपये ठग लिए।
पूछताछ में पता चला है कि ठग कंपनी का मास्टर माइंड मुकेश बीएससी पास है। 2012 में वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आया था। गुरुकुल नामक प्लेसमेंट कंपनी ने उससे नौकरी के नाम पर एक हजार रुपये ठग लिए। इसके बाद उसने बीटेक पास अलीगढ़ निवासी अतुल के साथ मिलकर खुद की ठग कंपनी बना ली।
पुलिस के अनुसार नौकरी की ट्रेनिंग के नाम पर मुकेश पीड़ितों को ट्रेनिंग के नाम पर दूसरे शहर भेज देता था। दूसरे शहर में उनसे कई तरह के प्रोडक्ट बिकवाए जाते थे। चाहे नौकरी गार्ड की हो या ऑटोमोबाइल इंजीनियर की या फिर मार्केटिंग की, सबको प्रोडक्ट बेचकर दिखाना होता था। बेरोजगारों के शैक्षिक दस्तावेज भी वह अपने पास रखते थे, जिससे विरोध करने वालों को धमका सकें।