{"_id":"5c647096bdec220c1b1400e3","slug":"center-govt-wants-to-withdraw-right-to-license-cinema-in-delhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘सिनेमा लाइसेंस देने का अधिकार वापस लेना चाहती है केंद्र सरकार’, हाईकोर्ट में दी गई जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘सिनेमा लाइसेंस देने का अधिकार वापस लेना चाहती है केंद्र सरकार’, हाईकोर्ट में दी गई जानकारी
Thu, 14 Feb 2019 01:01 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 14 Feb 2019 01:01 AM IST
विज्ञापन
cinema halls
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार ने 2015 की उस अधिसूचना को वापस लेने का निर्देश दिया है, जिसमें सिनेमा हॉल का लाइसेंस देने का अधिकार दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को दिया गया था। इससे पहले यह लाइसेंस दिल्ली पुलिस उपायुक्त जारी करते थे। यह जानकारी उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बाबत एक जनवरी 2019 को पत्र भेजकर यह निर्देश दिया था। इसके बाद दिल्ली के मुख्य सचिव को नौ जनवरी को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है। यह हलफनामा सिनेमा हॉल मालिकों की एसोसिएशन की याचिका पर दाखिल किया गया है।
पेश याचिका दायर कर सिनेमा हॉल मालिकों ने 2015 की अधिसूचना को चुनौती दी थी। दिल्ली सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने कहा कि इस मुद्दे पर विधि विभाग की अनुमति मिलने के बाद हलफनामा दाखिल किया जाएगा। कोर्ट ने दिल्ली सरकार की इस दलील के बाद एसोसिएशन ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) समेत सभी पक्षकारों को 12 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट के समक्ष अवूत की अध्यक्ष नीलम कृष्णा मूर्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि 2015 की अधिसूचना को वापस लिया जाना कानून के विरुद्घ है। पाहवा ने कहा कि इस अधिसूचना के तहत यह लाइसेंस एक नोडल एजेंसी की सिफारिश पर राजस्व विभाग जारी करता है। इस नोडल एजेंसी में पुलिस, दमकल विभाग, निगम व संबंधित विभागों के एक-एक अधिकारी शामिल होते हैं।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बाबत एक जनवरी 2019 को पत्र भेजकर यह निर्देश दिया था। इसके बाद दिल्ली के मुख्य सचिव को नौ जनवरी को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है। यह हलफनामा सिनेमा हॉल मालिकों की एसोसिएशन की याचिका पर दाखिल किया गया है।
विज्ञापन
पेश याचिका दायर कर सिनेमा हॉल मालिकों ने 2015 की अधिसूचना को चुनौती दी थी। दिल्ली सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने कहा कि इस मुद्दे पर विधि विभाग की अनुमति मिलने के बाद हलफनामा दाखिल किया जाएगा। कोर्ट ने दिल्ली सरकार की इस दलील के बाद एसोसिएशन ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) समेत सभी पक्षकारों को 12 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट के समक्ष अवूत की अध्यक्ष नीलम कृष्णा मूर्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि 2015 की अधिसूचना को वापस लिया जाना कानून के विरुद्घ है। पाहवा ने कहा कि इस अधिसूचना के तहत यह लाइसेंस एक नोडल एजेंसी की सिफारिश पर राजस्व विभाग जारी करता है। इस नोडल एजेंसी में पुलिस, दमकल विभाग, निगम व संबंधित विभागों के एक-एक अधिकारी शामिल होते हैं।