Delhi Bomb Threat: एक और बम की धमकी से एयरपोर्ट और स्कूलों में मचा हड़कंप, जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला
धमकी भरे ईमेल के बाद दिल्ली पुलिस, बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड, फायर विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आईं। घंटों चली गहन जांच के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।
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दिल्ली में रविवार की सुबह एक बार फिर से बम धमाके की धमकी ने हड़कंप मचा दिया। दिल्ली एयरपोर्ट, महरौली सीनियर सेकेंड्री स्कूल, द्वारका के सीआरपीएफ स्कूल सहित कई संस्थानों को ईमेल के जरिए बम रखने की धमकी मिली। धमकी भरे ईमेल के बाद दिल्ली पुलिस, बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड, फायर विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आईं। घंटों चली गहन जांच के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, जिसके बाद पुलिस ने इसे झूठी (हॉक्स) कॉल करार दिया। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, दिल्ली के 300 से ज्यादा स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल भेजे गए। इस घटना ने कुछ देर के लिए प्रशासन और प्रभावित संस्थानों में तनाव का माहौल पैदा कर दिया।
देशभर में फैली धमकी, जम्मू एयरपोर्ट भी निशाने पर
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह धमकी भरा ईमेल न केवल दिल्ली, बल्कि देश के अन्य हिस्सों, जिसमें जम्मू एयरपोर्ट भी शामिल है, में भी भेजा गया। दिल्ली पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करते हुए, सभी प्रभावित स्थानों पर जांच की। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है, ताकि ईमेल के स्रोत का पता लगाया जा सके। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि धमकी भरा मेल किस सर्वर से भेजा गया। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
पहले भी आ चुकी हैं ऐसी धमकियां
पिछले कुछ महीनों में दिल्ली में इस तरह की झूठी धमकियों के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते 20 सितंबर को नजफगढ़ के कृष्णा मॉडल पब्लिक स्कूल, कुतुब मीनार के सर्वोदय सीनियर सेकेंड्री स्कूल और द्वारका के डीपीएस जैसे स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इसके अलावा 13 सितंबर को शालीमार बाग, द्वारका और साकेत के मैक्स अस्पतालों को भी ऐसी ही धमकी मिली थी, जो बाद में फर्जी निकली। 12 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट को भी धमकी भरा ईमेल मिला था।
तकनीकी जांच में आ रहीं चुनौतियां
पुलिस सूत्रों के अनुसार, धमकी भरे ईमेल की जांच में तकनीकी विशेषज्ञों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ईमेल भेजने वाले वैश्विक ईमेल सेवा प्रदाताओं, डार्कनेट, प्रॉक्सी सर्वर या वीपीएन का उपयोग कर अपनी पहचान छिपा लेते हैं। कई मामलों में सर्वर की लोकेशन मिलने के बावजूद प्रॉक्सी सर्वर के कारण आगे की कड़ी तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। टेम्परेरी आईडी के इस्तेमाल से जांच और जटिल हो जाती है। कुछ मामलों में विदेशी सर्वर की जानकारी के लिए संबंधित देश की एजेंसियों से संपर्क भी किया गया है। ऐसे में पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।