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सिग्नेचर ब्रिज मारपीट मामला: अमानतुल्लाह को कोर्ट से मिली राहत, अदालत ने दिया जमानत का आदेश

Sun, 18 Nov 2018 02:59 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 18 Nov 2018 02:59 AM IST
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Amanatullah gets relief from court on Signature Bridge fight case
अमानतुल्लाह खान - फोटो : अमर उजाला

सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन पर हुए हंगामे के मामले में विधायक अमानतुल्लाह खान को राहत मिल गई है। अदालत ने अग्रिम जमानत स्वीकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया है कि यदि मामले में खान को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें तुरंत एक लाख रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया जाए। 

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अदालत ने कहा कि पेश साक्ष्यों व तथ्यों से स्पष्ट है कि उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न आरोप लगाए थे। इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सहआरोपी हैं।
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पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने फैसले में कहा कि इस मामले में धारा 308 को छोड़कर अन्य सभी धाराएं जमानती हैं और उनमें तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। मामले में न तो कोई घायल है, न ही किसी की एमएलसी है। 

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दो बेरीकेड तोड़ दिए और प्रवेश निषेध क्षेत्र में जाकर हंगामा किया।

शिकायतकर्ता मनोज तिवारी सांसद हैं तो आरोपी विधायक हैं। जो दस्तावेज व साक्ष्य पेश किए गए हैं, उनके अनुसार आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। ऐसे में यदि खान को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक अन्य जमानत राशि पर रिहा कर दिया जाए। साथ ही, अदालत ने खान को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।

इससे पूर्व, अधिवक्ता बीएस जून ने अग्रिम जमानत आवेदन पेश करते हुए कहा कि खान को फर्जी मामले में फंसाया गया है, जबकि आरोपी तिवारी को बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने अदालत के समक्ष वीडियो की सीडी और फोटो पेश करते हुए कहा कि तिवारी अपने 1200 समर्थकों के साथ जबरन कार्यक्रम पर कब्जा करने के लिए पहुंचे थे। 

उन्होंने दो बेरीकेड तोड़ दिए और प्रवेश निषेध क्षेत्र में जाकर हंगामा किया। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ा और मीडिया के समक्ष धमकियां दीं कि उन्होंने पहचान कर ली है और सभी को सबक सिखाएंगे। अधिवक्ता ने कहा उनके खिलाफ पुलिस ने दबाव में प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

यह मामला केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच चल रहे राजनीतिक द्वेष में दर्ज किया गया। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उनके मुवक्किल व सहआरोपी केजरीवाल ने तिवारी पर हमले का निर्देश दिया था। वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की जांच आरंभिक स्थिति में है।

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