अलवर भीड़ हिंसाः खट्टर सरकार रकबर के परिवार को देगी 8 लाख मुआवजा, विधायक ने सौंपा 5 लाख का चेक
अलवर भीड़ हिंसा में मारे गए रकबर के परिवार के लिए हरियाणा की खट्टर सरकार ने 8 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है। इसके साथ ही पुन्हाना के विधायक रहीश खान ने भी आज परिवार को 5 लाख रुपए का चेक दिया है।
Haryana: Independent MLA from Haryana's Punahana Rahish Khan gives a cheque of Rs 3 lakh and Haryana government gives a cheque of Rs 5 lakh to the family of Rakbar Khan, victim in #AlwarLynching case pic.twitter.com/JDWuD0ZKdF
— ANI (@ANI) July 26, 2018
पुलिस जांच में रकबर व असलम द्वारा गाय खरीद की बात निकली गलत
अलवर के रामगढ़ में भीड़ हिंसा और पुलिस की लापरवाही से मारे गए रकबर उर्फ अकबर खान और गांववालों से बचकर भागे उसके दोस्त असलम खान के गाय खरीद कर लाने के बयान पुलिस जांच में संदेह के घेरे में आ गए हैं।
दोनों ने जिन दो परिवारों से गाय खरीदना बताया, उनमें से एक के पास तो गाय हैं ही नहीं और दूसरे परिवार के पास एक ही गाय है। दोनों ही परिवारों ने पुलिस को कहा है कि उन्होंने किसी को कोई गाय नहीं बेची। साथ ही रामगढ़ से पुलिस ने बरामद की दोनों गाय दुधारू भी नहीं है।
पुलिस के आला अफसरों की समिति ने गाय खरीद के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। गोतस्करी के शक में रामगढ़ के ललावंडी गांव में पिटाई के बाद ग्रामीणों ने 20 जुलाई की रात रकबर को पुलिस को सौंप दिया था।
एफआईआर में पुलिस ने दर्ज किया है कि मरने से पहले रकबर ने बताया था कि वह बडौदामेव के लाडपुरा गांव से गाय खरीद कर पैदल ही जंगल के रास्ते हरियाणा स्थित अपने गांव ले जा रहे थे। इधर, हरियाणा में असलम ने भी यही बयान दिया था।
बयानों के तहत लाडपुर के मजदूर मल्ला व वाहन चालक सुन्ने खान के यहां से गाय खरीदी गईं। बयानों के आधार पर पुलिस मल्ला व सुन्ने खान के घर पहुंची, तो बयान संदेह करने वाले मिले।
सूत्रों के अनुसार मल्ला के पास बेचने के लिए कोई गाय थी ही नहीं। मल्ला की पत्नी हारूनी ने पुलिस को बताया कि उनके पास एक गाय थी, जो चार-पांच महीने पहले ही बेच दी थी, अब बस एक बछिया ही है।
इधर, सन्ने खान की पत्नी मनसीदा ने भी पुलिस को बताया कि उनके पास एक ही गाय है और उन्होंने भी किसी को कोई गाय नहीं बेची। रकबर व असलम से बरामद गायों को रामगढ़ की सुधासागर गौशाला में रखा गया है। गौशाला संचालकों ने बताया कि गाय दुधारू हैं ही नहीं और बहुत कमजोर भी हैं।
गौरतलब है कि पुलिस को रकबर खान के खिलाफ पुराना आपराधिक रिकार्ड मिला है। अलवर के नौगांवा थाना क्षेत्र में रकबर के खिलाफ गौ संरक्षण अधिनियम के तहत दिसंबर 2014 को दर्ज एक मामले में दो गाएं बरामद की गई थीं।
जांच समिति में शामिल विशिष्ठ पुलिस महानिदेशक एनआरके रेड्डी के अनुसार मामला बहुत अधिक तूल पकड़ चुका है और जांच भी जारी है, इस बारे में ज्यादा नहीं बोल सकता।
जांच में देखा जा रहा है कि रकबर और असलम ने साढे़ तीन वर्षीय और साढे़ छह वर्षीय गायों को कानूनी रूप से खरीदा था या नहीं। उन्होंने बताया कि असलम ने कहा है कि वे दूध देने वाली गाय खरीद कर गांव ले जा रहे थे, इसकी भी पुष्टि की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि गायों को रात के समय जंगल से होकर पैदल क्यों ले जाया जा रहा था।
पुलिस जांच में रकबर और असलम के बयान तथ्यहीन पाए जाने से ये स्पष्ट है कि दोनों गो-तस्करी ही कर रहे थे। मैने गृहमंत्री को आज पत्र लिखकर असलम को गोतस्करी के आरोप में शीघ्र गिरफ्तार करने और निर्दोष ग्रामीणों को मुक्त करने की मांग की है।- ज्ञानदेव आहूजा, विधायक, रामगढ़