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दिल्लीः एजेएल को खाली करना होगा हेराल्ड हाउस, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

Fri, 01 Mar 2019 03:39 AM IST
गौरव द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Fri, 01 Mar 2019 03:39 AM IST
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ajl to vacate herald house as high court reject plea
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को आईटीओ स्थित हेराल्ड हाउस खाली करने के खिलाफ दायर एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की अपील खारिज कर दी। एजेएल ने सिंगल बैंच के 21 दिसंबर के उसे आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें केंद्र सरकार के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। 

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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने हेराल्ड हाउस खाली करने के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए एजेएल को संपत्ति छोड़ने के लिए दो सप्ताह का समय देने से भी इंकार कर दिया। 
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इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने एजेएल की याचिका खारिज करते हुए दो सप्ताह के भीतर हेराल्ड हाउस खाली करने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन नहीं करने पर पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट 1971 के अंतर्गत कार्रवाई का निर्देश दिया था। 
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याची ने चालाकी से एजेएल के 99 फीसदी शेयर यंग इंडिया को स्थानांतरित किए थे। इससे एजेएल की करीब 413 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का हित भी एजेएल को स्थानांतरित हो गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि यंग इंडिया ने एजेएल को अपने फायदे के लिए हाईजैक कर लिया था। 

 केंद्र सरकार ने एजेएल के साथ 56 साल पुरानी लीज को रद्द करते हुए हेराल्ड हाउस खाली करने का निर्देश दिया था। सरकार का कहना था कि एजेएल ने लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है और कंपनी ने यहां पर मुद्रण व प्रकाशन का कार्य काफी समय पहले 2008 में बंद कर दिया था। इसके साथ ही बिल्डिंग का बड़ा हिस्सा किराए पर दे दिया था। 

एजेएल और केंद्र सरकार के तर्क खंडपीठ के समक्ष जिरह करते हुए एजेएल के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कंपनी के शेयर यंग इंडिया को स्थानांतरित होने से सोनिया गांधी व राहुल गांधी हेराल्ड हाउस के मालिक नहीं बन गए हैं। याची का यह भी कहना था कि सरकार ने जून 2018 से पहले कभी भी मुद्रण व प्रकाशन न होने का मुद्दा नहीं उठाया था जबकि उससे पहले ही प्रकाशन दोबारा शुरू हो चुका था। 

एजेएल ने कहा कि नेशनल हेराल्ड के डिजीटल संस्करण, हिंदी नवजीवन, कौमी आवाज उर्दू का प्रकाशन 2016-17 में शुुरू हो चुका था। उधर, केंद्र सरकार की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिस चालाकी से 99 फीसदी शेयर यंग इंडिया को ट्रांसफर किए गए थे, उसे सामने लाने की जरूरत है। 


कंपनी को लीज समाचार पत्र प्रकाशन व मुद्रण के लिए 1962 में दी गई थी, लेकिन यह काम बंद कर दिया गया। मेहता का यह भी कहना था कि यंग इंडिया ने 90 करोड़ के कर्ज के बदले एजेएल के 99 फीसदी शेयर ले लिए थे। इस कर्ज को वसूलने का अधिकार यंग इंडिया को 50 लाख रुपये की राशि के बदले दिया गया था। इससे यंग इंडियन अपने आप हेराल्ड हाउस की मालिक बन गई। 

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