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उत्तराखंड के सात लाख किसानों पर 10 हजार करोड़ का कर्ज

Fri, 27 Apr 2018 12:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 27 Apr 2018 12:15 PM IST
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uttarakhand seven lakh farmer is in 10 thousand crore debt
farmer

कमर तोड़ मेहनत करने के बावजूद भी पर्वतीय क्षेत्रों में खेतीबाड़ी घाटे का सौदा साबित हो रही है। यही वजह है कि राज्य गठन के बाद 17 सालों में कृषि का क्षेत्रफल करीब 15 प्रतिशत घटा है। खेती में मुनाफा न होने से राज्य में कर्जदार किसानों की तादाद भी बढ़ी है। मार्च 2017 तक प्रदेश में सात लाख किसानों पर 10968 करोड़ कर्ज का बोझ है। जिस पर सालाना 934.32 करोड़ का ब्याज लग रहा है। 

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प्रदेश के मैदानी जिले देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर से ज्यादा पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है। जिस कारण किसान खेतीबाड़ी छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। कृषि का अधिकांश सिंचित क्षेत्र मैदानी जिलों में है। प्रदेश में 3.30 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। जिसमें 2.86 हेक्टेयर(86.88 प्रतिशत) मैदानी क्षेत्र में शामिल है। पर्वतीय क्षेत्र में मात्र 13.11 प्रतिशत क्षेत्रफल में मौजूदा समय में सिंचाई की सुविधा है। साथ ही आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई, कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिए कोई सुविधा विकसित नहीं है। कोल्ड स्टोर, कलेक्शन सेंटर जैसी तमाम सुविधाएं न होने के कारण कृषि उत्पाद बाजार में पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है।
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साथ ही सूखा और अतिवृष्टि से हर साल किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। प्रदेश में वर्ष 2014-15 में रवि सीजन में तीन लाख 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर फसलों पर 513.69 करोड़ का नुकसान हुआ था। लेकिन इसके एवज में केंद्र से कुछ नहीं मिला। प्रदेश सरकार ने ही अपने संसाधनों से 95 करोड़ जारी किया। वर्ष 2015-16 में सूखा पड़ने से एक लाख नौ हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर 95.79 करोड़ का नुकसान हुआ। गत वर्ष खरीफ  फसलों को 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर 4.21 करोड़ का नुकसान आंका गया। नुकसान की मार झेल रहे किसान अब खेतीबाड़ी से छोड़ने को विवश है।। प्रदेश में 1.43 लाख हेक्टेयर परती भूमि (जिस पर पहले खेती होती थी अब नहीं) और 3.18 लाख हेक्टेयर बंजर भूमि है।
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पहाड़ों में आसान नहीं डबल इनकम का लक्ष्य
विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच प्रदेश के किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य आसान नहीं है। वह इसलिए कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ खेतीबाड़ी छोड़ चुके किसानों को वापस कृषि के लिए प्रोत्साहित करना है। गांव खाली हो चुके हैं और खेती बंजर पड़ गई है। दूसरी तरफ जंगली जानवरों व बंदरों की सबसे बड़ी समस्या है। जो फसलों को तबाह कर रहे हैं।  साथ ही दोगुनी आय के लिए जो योजनाएं बनाई गई, उनके क्रियान्वयन में भी तेजी नहीं आई है। 

किसानों की आय दोगुनी करने का यह प्लान
देहरादून। केंद्र और प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। राज्य में बंजर भूमि पर मनरेगा के तहत सुगंध, हर्बल पौधों, फ्लोरीकल्चर, रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कार्य योजना बनाई गई। किसानों को कृषि उत्पाद का सही दाम मिले, इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों में कोल्ड स्टोर और कूल रूम स्थापित करने की योजना है। पर्वतीय क्षेत्रों में नई सब्जी मंडी स्थापित की जा रही हैं।

इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक ब्लाक स्तर पर एकीकृत आदर्श कृषि गांव योजना (आईएमए विलेज) शुरू की रही है। जिसमें कृषि, बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, मुर्गीपालन, रेशम, सब्जी, शहद, मशरूम आदि तमाम कृषि संबंधित कार्य होंगे। बंजर भूमि को उपयोग में लाने के लिए कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। परंपरागत फसलों के साथ ही मशरूम उत्पादन, शहद, रेशम, मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किसानों को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने पर फोकस किया है। किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए 370 फार्म मशीन बैंक (एफएमबी) स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ आर्गेनिक व नर्सरी एक्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है। ताकि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के पौधे, बीज आदि उपलब्ध हो सके। 


सवा लाख किसानों को दो प्रतिशत ब्याज पर ऋण
किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार की ओर से दो प्रतिशत ब्याज पर एक लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है। अब तक करीब सवा लाख किसानों को सहकारी बैंकों के माध्यम से दो प्रतिशत ब्याज दर पर एक लाख का ऋण वितरित किया गया। यह ऋण कृषि व इससे संबंधित कार्यों के लिए दिया जा रहा है।

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