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उत्तरकाशी: जमीन पर दम तोड़ती जिंदगियां, पांच माह में 16 शिशुओं की मौत, प्रसव के दौरान दो महिलाओं की भी मौत

Thu, 03 Sep 2026 03:17 PM IST
Renu Saklani विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Thu, 03 Sep 2026 03:17 PM IST
सार

उत्तरकाशी में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच मातृ और शिशु स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Uttarkashi Health Crisis 16 Infants two Women Die in Five Months Amid Lack of Specialist Doctors Uttarakhand
उत्तरकाशी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तरकाशी जनपद के जिला और महिला सहित अन्य अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार दम तोड़ती नजर आ रही है। विभाग के आंकड़ों की माने तो पांच माह में जिले में 16 शिशु मृत्यु दर दर्ज की गई है। साथ ही दो महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हुई है। ये वे आंकड़े हैं जो कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसके अलावा जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में होने वाले घरेलू प्रसव के दौरान कई महिलाएं और नवजात शिशुओं की कई जानकारियां गांव तक ही सीमित रह जाती है।

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उत्तरकाशी जनपद की बात करें तो जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ और महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। दूसरी ओर जिले की यमुना घाटी में वर्षों से बाल और महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है। इस कारण प्रसव के दौरान महिलाएं और नवजात उचित स्वास्थ्य व्यवस्था न मिलने के कारण दम तोड़ रहे हैं।

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विभाग के आंकड़ों की बात करें तो पूरे जनपद में अप्रैल से अगस्त तक 16 बच्चे विभिन्न कारणों से अपनी जान गंवा चुके हैं तो नौगांव व पुरोला में एक-एक महिलाएं प्रसव के दौरान दम तोड़ चुकी हैं। इन आंकड़ों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से डीएम प्रशांत आर्य की ओर से ली गई समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किया गया है।

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बड़ा सवाल 
इसके अलावा इन पांच माह में करीब 10 से 12 नवजात जिले के अस्पतालों से रेफर होने के कारण रास्ते में और हायर सेंटर के अस्पतालों में दम तोड़ चुके हैं। यह आंकड़े प्रदेश की सुदूरवर्ती क्षेत्रों में गर्भवती और नवजात शिशुओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

बैठक में विभागीय अधिकारियों की ओर से दावा किया गया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौंतरी में प्रसव केंद्र का निर्माण किया जा रहा है लेकिन पूर्व में भटवाड़ी और डुंडा, ब्रहमखाल जैसे अस्पतालों में बनाए गए प्रसव केंद्र की स्थिति नहीं सुधर पाई है।

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वहां पर भी दो बेड लगाने के अलावा कोई सुविधाएं नहीं दी गई है। सीएमओ डॉ. श्याम विजय का कहना है कि विभाग और प्रशासन की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि शिशु और मातृ मृत्यु दर को रोकने के लिए उचित व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाए। साथ ही उन कारणों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है कि जिससे प्रसव के दौरान अधिक मौतें होती हैंं। संवाद


 

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