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संतान सुख प्राप्ति हेतु प्रभावी है शरद पूर्णिमा पूजा, जरूर जानें यह पौराणिक कथा
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सरकारी स्कूल से पढ़कर नासा तक पहुंचा किसान का बेटा, 55 लाख से ज्यादा का सालाना पैकेज

कहते हैं कि विद्या का मंदिर छोटा हो या बड़ा, शिक्षा सबके लिए समान होती है। बस कामयाबी पाने के लिए मन में जज्बा और लगन होनी चाहिए। किसान के बेटे गुरजीत...

28 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए आएगी सीएनजी नीति 

उत्तराखंड की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसों को हवा में घुलने से रोकने के लिए सरकार अब सीएनजी नीति लाने जा रही है। पर्यावरण निदेशालय और परिवहन विभाग को नीति का ड्राफ्ट तैयार करने का जिम्मा सौपा गया है।

सरकार पर राष्ट्रीय हरित अभिकरण(एनजीटी) के आदेश को पालन करने का दबाव है। इसके तहत सरकार को 2022 तक सड़कों पर धुआं छोड़ने वाले वाहनों की जगह सीएनजी वाहनों को चरणबद्ध ढंग से शामिल करना है।


पर्यावरण निदेशालय के अध्यक्ष एसपी सुबुद्धि ने प्रस्ताव तैयार करने की पुष्टि की है। नीति का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद इसका प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। परिवहन विभाग अलग से सीएनजी नीति का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। 
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एक्सक्लूसिव: यहां वृद्ध और दिव्यांग इतने खुद्दार कि मिल रही सरकारी पेंशन से कर रहे इंकार

बहुधा सरकार द्वारा वंचित वर्ग के लिए संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं का संपन्न वर्ग के लोग जानकारी छिपाकर लाभ लेते हैं, लेकिन दूसरी ओर ऐसे भी ईमानदार लोग हैं जो आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद वृद्धावस्था, दिव्यांग पेंशन लौटा रहे हैं।

देहरादून जिला समाज कल्याण विभाग में पिछले दो महीनों में 30 पेंशनरों ने पेंशन बंद कराने का आग्रह किया है। इनमें अधिकांश ऐसे वृद्ध हैं जो पहले आर्थिक रूप से कमजोर थे, मगर अब उनके बेटे व पोते की सरकारी एवं निजी नौकरी लगी है या किसी ने व्यवसाय शुरू किया है।


अब उन्हें सदस्यों से खर्चे के लिए पर्याप्त पैसे मिल रहे हैं। साथ ही अब वे पात्रता श्रेणी से भी बाहर हो चुके हैं। पेंशन बंद कराने के लिए विभाग में पिछले एक साल में 120 से ज्यादा आवेदन पहुंचे हैं। 
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उत्तराखंड: आईएएस षणमुगम मामले में जांच पूरी, रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी  

उत्तराखंड में अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक वी षणमुगम प्रकरण की जांच पूरी कर मुख्य सचिव ओम प्रकाश को सौंप दी है। अपर मुख्य सचिव ने रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपे जाने की पुष्टि की है। लेकिन उन्होंने जांच का खुलासा करने से साफ इंकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपेंगे।

बता दें कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ही मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए थे। मुख्य सचिव ने सितंबर माह के आखिरी हफ्ते में यह जांच अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार को सौंपी थी। उन्हें एक हफ्ते में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा था। लेकिन जांच करीब एक माह बाद पूरी हुई।

इधर, जांच पूरी न होने को लेकर महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य भी असहज हो रही थीं। उन्होंने चिंता जाहिर की थी कि निदेशक और सचिव की अनुपलब्धता से विभाग के महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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International Internet Day: कोविड-19 के दौरान सबसे बड़ा मददगार बना इंटरनेट, लोगों ने खूब लगवाए ब्रॉडबैंड

कॉविड-19 के दौरान घरों में लॉकडाउन लोगों के लिए इंटरनेट सबसे बड़ा मददगार बन कर उभरा। इस दौरान जहां इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ, वहीं ऑनलाइन बिताए जाने वाले समय में भी बढ़ोतरी हुई। अब हर घर में पढ़ाई, मनोरंजन, व्यापार से लेकर नौकरी ढूंढने और वित्तीय लेनदेन तक में इंटरनेट का जमकर इस्तेमाल हो रहा है।

लॉकडाउन से पहले भी बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट का इस्तेमाल इन सभी चीजों के लिए करते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। अब लगभग सभी घरों में ऑनलाइन पढ़ाई, खरीदारी, मनोरंजन और अन्य कामों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है।

यहां तक कि लॉकडाउन के चलते नौकरी गंवाने वाले भी इंटरनेट के जरिये ही रोजगार ढूंढ रहे हैं। अब नौकरी के लिए उन्हें सीवी लेकर दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे ही नया स्टार्टअप शुरू करने वालों को अपना सामान या सर्विस बेचने के लिए बाजार में नहीं भटकना पड़ता।

लोगों ने लगवाए ब्रॉडबैंड कनेक्शन
लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम किया। इसके अलावा खाली समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एंटरटेनमेंट और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी तेज इंटरनेट की जरूरत थी। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों ने ब्रॉडबैंड के कनेक्शन भी लिए। बीएसएनएल के साथ ही ज्यादातर बड़ी कंपनियां ब्रॉडबैंड कनेक्शन दे रही हैं।
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एक युद्ध- पटाखों के विरुद्ध: हर साल दून की फिजाओं में जहर घोलते हैं पटाखे 

अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट दिवस
खुशियां लेकर आने वाली दिवाली के उल्लास के बीच पटाखों का शोर और धुआं हर साल देहरादून की फिजाओं में जहर घोल जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस साल भी दिवाली पर प्रदूषण पर नजर रखने के लिए तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन क्या आप भी तैयार हैं दून की फिजाओं को महफूज रखने के लिए। तो आइए...इस साल दिवाली पर खुशियों के दीये जलाएं, पटाखों से दूरी बनाएं।

पिछले साल दिवाली पर राजधानी के विभिन्न इलाकों में हुई जबरदस्त आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर सामान्य की तुलना में दोगुना से अधिक पाया गया था। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों के मुताबिक दिवाली पर प्रदूषण की मानीटरिंग के लिए शहर में तीन जगह नेहरू कालोनी, दून अस्पताल, रायपुर और ऋषिकेश के ढालूवाला में अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मॉनिटरिंग की गई थी। दून अस्पताल और इसके आसपास के इलाकों में सबसे अधिक प्रदूषण पाया गया था।

जबकि नेहरू कालोनी में प्रदूषण का स्तर सबसे कम पाया गया। नेहरू कालोनी में दिवाली की शाम को पीएम (पार्टिकुलेट मैटर)-10 (धूल के कण) का स्तर 166 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर पहुंच गया था। जबकि दून अस्पताल के आसपास यह स्तर 385, रायपुर में 249 और ढालूवाला (ऋषिकेश) में 283 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर प्रदूषण का स्तर पाया गया था। प्रदूषण मानकों के मुताबिक सामान्य स्थितियों में इसकी मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। 

धूल के कणों में भी हुआ था इजाफा
जहां तक पीएम-2.5 (धूल के कण) का सवाल है तो नेहरू कालोनी में यह मात्र 72 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर, दून अस्पताल के पास 184, रायपुर में 151 और ढालूवाला में यह मात्रा 152 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर मापी गई थी। जबकि सामान्य स्थितियों में यह 60 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर होना चाहिए। वहीं, सल्फर-डाई-आक्साइड (एसओ-2) की मात्रा भी नेहरू कालोनी में 34 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर, दून अस्पताल के पास 36.3, रायपुर में 31.6 और ढालूवाला में इसकी मात्रा 43.5 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर मापी गई थी।

आओ मिलकर करें अपील
अगर आप भी दिवाली पर पटाखे न जलाने के हिमायती हैं तो आप भी सबसे अपील करें। हो सकता है कि आपकी अपील पर्यावरण बचाने में मील का पत्थर साबित हो जाए। अपनी अपील हमें मोबाइल नंबर 7617566171 पर वॉट्स एप कर सकते हैं। चुनिंदा अपील को अमर उजाला अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।
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उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र और नाराज मंत्री हरक सिंह रावत के बीच आज होगी मुलाकात

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और श्रम मंत्री हरक सिंह के बीच आखिरकार मुलाकात तय हो गई है। दोनों के बीच आज बृहस्पतिवार को देहरादून में ही मुलाकात होगी। इस मुलाकात के बाद हरक सिंह पिछले कुछ समय से अख्तियार की गई अपनी खामोशी को भी तोड़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, सीएम और श्रम एवं वन मंत्री के बीच दोपहर बाद मुलाकात होगी। यह तय भी हो गया है और श्रम मंत्री ने भी इसकी सहमति दे दी है। भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर श्रम मंत्री हरक सिंह खासे नाराज हैं।


उनका कहना है कि बिना उनकी जानकारी में लाए ही बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया। हरक सिंह की कोशिश थी कि बोर्ड के कार्यकाल को एक साल और बढ़ा दिया जाए। ऐसे में बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया और हरक सिंह को इसकी जानकारी बाद में मिली। बोर्ड के पुनर्गठन में हरक सिंह बोर्ड अध्यक्ष पद से बाहर हो गए थे।

इसके बाद से ही हरक सिंह ने चुप्पी साध ली थी। दो ऐसे अवसर भी आए जब हरक सिंह और सीएम को एक ही कार्यक्रम में शामिल होना था। इन दोनों ही कार्यक्रमों से हरक सिंह किनारा कर गए। यहां तक की एक कार्यक्रम उनके अपने वन महकमे का था।

ई आफिस के शुभारंभ के इस समारोह के लिए विशिष्ट अतिथि के रूप में हरक सिंह को भी आमंत्रित किया गया था। इस पर हरक सिंह का कहना था कि उन्हें जानकारी तब दी गई जब उनके अन्य कार्यक्रम तय हो गए। एक अन्य समारोह आयुष अस्पताल के उद्घाटन का था, जिसमें सीएम के साथ हरक सिंह को भी न्योता था। हरक इस कार्यक्रम में भी नहीं आए थे।
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Corona in Uttarakhand: 304 संक्रमित मिले, दो की मौत, मरीजों की संख्या 61 हजार पार 

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 304 संक्रमित मरीज मिले हैं। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 61 हजार पार हो गया है। साथ ही 463 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को 11743 सैंपल जांच में निगेटिव मिले हैं। केदारनाथ विधायक मनोज रावत भी पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने 23 अक्तूबर को अगस्त्यमुनि में टेस्ट कराया था। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आज वे दून अस्पताल में भर्ती हुए हैं।

लगभग चार महीने के बाद प्रदेश में एक दिन में सबसे कम दो मरीजों की मौत हुई है। अभी तक एक दिन में सबसे अधिक 20 मरीजों की मौत हुई थी। अब संक्रमण से मृत्यु दर भी कम हो रही है। 


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आज देहरादून जिले में सबसे अधिक 79 कोरोना मरीज मिले हैं। नैनीताल में 47, पौड़ी में 38, हरिद्वार में 29, रुद्रप्रयाग में 23, चमोली में 23, ऊधमसिंह नगर में 18, टिहरी में 14, बागेश्वर में 10, चंपावत में आठ, उत्तरकाशी में छह, पिथौरागढ़ में पांच व अल्मोड़ा में चार कोरोना संक्रमित मामले मिले हैं। 

प्रदेश में दो कोरोना मरीजों की मौत हुई है। इसमें एम्स ऋषिकेश में एक और सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एक मरीज ने दमतोड़ा है। मरने वालों की संख्या 1009 हो गई है। 
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Unlock -5.0: उत्तराखंड के स्थानीय मार्गों पर आज से चलेंगी 76 छोटी अनुबंधित बसें 

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