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चमोली: प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती को डंडी के सहारे पहुंचाया अस्पताल, साढ़े चार घंटे हेली का करते रहे इंतजार

Thu, 03 Sep 2026 01:21 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, देवाल (चमोली)
संवाद न्यूज एजेंसी, देवाल (चमोली) Published by: Renu Saklani Updated Thu, 03 Sep 2026 01:21 PM IST
सार

सड़क की सुविधा के इंतजार में एक गांव आज भी पहाड़ की मुश्किल राहों पर निर्भर है। प्रसव पीड़ा से जूझती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को डंडी का सहारा लेना पड़ा, जबकि सड़क को 11 साल पहले मंजूरी मिल चुकी थी।

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Chamoli News Road Not Built in 11 Years Pregnant Anganwadi Worker Carried on Dandi to Hospital Uttarakhand
गर्भवती को डंडी के सहारे अस्पताल ले जाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर देव सिंह दानू व पूर्व विधायक शेर सिंह दानू के गांव आज भी सड़क से नहीं पहुंची। पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत व त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के बाद भी पिनाऊं गांव में सड़क नहीं पहुंच पाई। सड़क न होने का खामियाजा लागों को भुगतना पड़ रहा है। इस गांव के लिए पूर्व विधायक स्व शेरसिंह दानू के नाम पर 2015 में 23 किमी धुराधारकोट- वांक- पिनाऊं सड़क स्वीकृति हुई थी। लेकिन स्ववीकृति के 11 साल बाद भी सड़क नहीं बनी।

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बुधवार को पिनाऊं गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री खिमुली देवी को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीणों ने डंडी से छह किमी पैदल चलकर बलाण गांव के कालीताल पहुंचाया। पिनाऊं से बलाण गांव आने का पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग बनाकर गर्भवती को पाटिंगधार लाए।
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ग्राम प्रधान लखपत दानू ने बताया कि बुधवार की सुबह 11 बजे गर्भवती को छह किमी डंडी से पाटिंगधार लाए। यहां पर शाम साढ़े पाचं बजे तक हैली का इंतजार किया गया। हैली के नहीं पहुंचने पर शाम छह बजे कालीताल सड़क मार्ग में पहुंचे। रात्रि को साढ़े नौ बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचे, लेकिन देवाल में डॉक्टर नहीं होने पर एंंबुलेंस से जिला अस्पताल बागेश्वर ले गए।

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आए दिन डंडी से अस्पताल ले जाने की मजबूरी

पिनाऊं गांव के आशा बिमला देवी, लखपत सिंह, हिम्मत सिंह, लक्ष्मण सिंह, हरूली देवी, कस्तूरा देवी, नंदी देवी, सुरेंद्र सिंह, मोतिमा देवी आदि ने गर्भवती को छह किमी डंडी से खतरनाक रास्ते से सड़क मार्ग पहुंचाया। ग्राम प्रधान लखपत दानू ने बताया कि दो- दो मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी यह सड़क नहीं बनी। उन्होंने कहा कि सड़क नहीं होने से ग्रामीण बीमार व गर्भवती को आए दिन डंडी से अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं। 

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पिनाऊं गांव के लिए जो सड़क स्वीकृत हुई है। उसमें काफी संख्या में बाज व बुराश के पेड़ हैं। इसमें वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही है। धुराधारकोट- वांक- पिनाऊं के नाम से सड़क स्वीकृत हुई है। लेकिन लोहाजंग से वांक गांव तक सड़क बन गई है। अगर ग्रामीणों की सहमति हुई तो वांक गांव से भी पिनाऊं के लिए सड़क जा सकती है। -मनीष डोगरा, ईई लेानिवि थराली।

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