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सरकार बनते ही दो-तीन लोग मेरे खिलाफ षड्यंत्र में लग गए : त्रिवेंद्र सिंह रावत

Thu, 19 Jul 2018 09:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 19 Jul 2018 09:05 PM IST
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uttarakhand cm trivendra singh rawat interview
trivendra singh rawat

मानसून की शुरुआत के साथ ही त्रिवेंद्र रावत सरकार पर सियासी ओले पड़ते नजर आए। कभी शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा का विवाद तो कभी विधायक संजय गुप्ता का ‘झोटा बिरयानी’ बयान, फिर अतिक्रमण विरोधी अभियान, सरकार की रफ्तार में ब्रेकर बनकर सामने आए। बरसात की बूंदों के बीच विवादों की फसल ऐसी लहलहाई कि विपक्ष ही नहीं, अपनों को भी हमलावर होने के खूब मौके मिले। इन विवादों में मुख्यमंत्री सीधे तौर पर निशाने पर रहे। ऐसा क्यों हो रहा है, सरकार की कमजोरी है या इसके पीछे कोई साजिश, अमर उजाला स्टेट ब्यूरो चीफ संजय त्रिपाठी ने तीखे-धारदार सवालों के जरिए सीएम की ‘ब्रेन मैपिंग की। मैपिंग रिपोर्ट आपके सामने है, आप खुद पढ़ लीजिए- 

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सवाल - खबर है कि आपकी पार्टी के पंद्रह-बीस विधायक असंतुष्ट हैं, वो मीडिया या फिर अन्य जरियों से अपनी भड़ास निकालते हैं। असंतुष्टों की संख्या आखिरकार इतनी ज्यादा क्यों है?
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जवाब - कुछ लोग हैं जो सरकार के आने के बाद से ही षड्यंत्र कर रहे हैं। वे ही इस प्रकार की चर्चाएं और दुष्प्रचार कर रहे हैं। ऐसी कोई संख्या नहीं है। यह बात सही नहीं है। कुछ ही इस तरह की दावेदारी करते होंगे।  विधानसभा क्षेत्र के सार्वजनिक कार्य हों, सड़कों और स्वास्थ्य से संबंधित कार्य हों। विवेकाधीन कोष से पैसे जारी करने का मामला हो, सभी विधायकों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। विकास ज्यादा से ज्यादा हो, इसके लिए विधायक निधि को बढ़ाकर पौने चार करोड़ रुपये किया गया, जबकि यूपी में अभी भी विधायक निधि दो करोड़ रुपये ही है। असंतोष का कोई कारण नहीं बनता है। 
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सवाल - कौन षड्यंत्र कर रहा है, आपकी पार्टी के या कोई और?
जवाब - विपक्ष के तो हैं ही, कुछ और लोग भी इसमें शामिल हैं। हैं, ऐसे दो-तीन लोग हैं।

सवाल- आप विधायकों को समय नहीं देते, ऐसा कुछ नाराज विधायकों का आरोप है ? 
जवाब- विधायकों से मुलाकात का बुधवार और बृहस्पतिवार का दिन तय है। बुधवार को कैबिनेट के बाद और बृहस्पतिवार को पूरे दिन मैं उनसे मुलाकात के लिए उपलब्ध रहता हूं। कोई विधायक यह नहीं कह सकता कि मैं उनसे बिना मिले चला गया। अगर ऐसा कहता है तो गलत कहता है। 

सवाल - उत्तरा प्रकरण चर्चा में रहा था, शिक्षिका का गुस्सा जायज था, लेकिन उस वक्त आपने संयम क्यों खो दिया था?
जवाब - किसी भी कर्मचारी को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। उसकी सेवा की आचरण नियमावली होती है, जिसका पालन उसे करना चाहिए।

सवाल - आपका भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का मंत्र काम नहीं कर रहा है, ऐसा तमाम लोग कहते हैं?
जवाब -अगर हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कही है, तो भ्रष्टाचार हो रहा था, इसलिए कही । अगर नहीं हो रहा होता तो इसकी जरूरत ही नहीं होती। हमने भ्रष्टाचार को रोका है। पचास से ज्यादा भ्रष्टाचारी एक साल में जेल के भीतर गए हैं। सैकड़ों करोड़ का भ्रष्टाचार सामने आया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब लोग भ्रष्टाचार से कमाई रकम लौटा रहे हैं। पूरी पारदर्शिता, बगैर पक्षपात और बिना दबाव के जांचें हो रही हैं।

सवाल - कुछ विधायकों की नाराजगी के पीछे कहीं जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी तो कारण नहीं?
जवाब - काफी लोगों को इसी वजह से पीड़ा है कि हमने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को रोकने का काम किया है। इनके सामने दबना नहीं है, यह मेरी कार्यपद्धति का हिस्सा है। मैं भ्रष्टाचारियों के दबाव में आकर काम नहीं कर सकता हूं, यह मेरे स्वभाव के विपरीत है। कोई अगर यह समझे कि दबाव में काम करवा लेगा तो नहीं करा सकता। विपक्ष ने भी दबाव बनाना चाहा था, लेकिन हमने दबाव नहीं माना और भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णय लिए हैं। अमर्यादित तरीके से दबाव बनाने वालों की आदत ठीक होनी चाहिए। हां, सभी के लिए वार्ता के दरवाजे खुले हैं, कोई भी व्यक्ति समय लेकर बातचीत से समस्या का समाधान कर सकता है।

सवाल - लोगों में नाराजगी है कि सीमाद्वार इलाके में बादल फटने से भारी तबाही हुई, मौके पर ना आप पहुंचे, न आपका कोई मंत्री? 
जवाब - देखिए, मैं बाहर था और जब मैं लौटकर आया तो मालूम चला कि मृतक और उनके परिजन बिहार के रहने वाले थे। वे शवों को लेकर यहां से चले गए हैं। दो शव बह गए थे, जिनकी तलाश में उनके परिजन निकल गए थे। जिले के प्रभारी मंत्री यशपाल आर्य को मैंने मौके पर जाकर प्रभावित परिवारों से मिलने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मैंने जिलाधिकारी से पीड़ित परिवारों का हालचाल लिया तो उन्होंने बताया कि हताहत लोगों के लिए जो आर्थिक सहायता दी जानी थी, वह भी अभी तक नहीं दी जा सकी है, क्योंकि परिजन अंतिम संस्कार करके अभी लौटे नहीं हैं।

सवाल - बारिश के दौरान अतिक्रमण अभियान रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की सुध इतनी देर से क्यों आई?
जवाब - ऐसा कुछ नहीं है, हमने पहले भी प्रयास किया। समाज के कुछ लोग भी कोर्ट गए थे। लेकिन, जब सफलता नहीं मिली तो सरकार ने स्वयं जाने का निर्णय लिया। अभी हम इस पर और विचार कर रहे हैं। भारी संख्या में लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। मानवीयता का तकाजा है कि हम उनके साथ मानवीय व्यवहार करें। हम हाईकोर्ट भी जा रहे हैं। इसके अलावा ऑर्डिनेंस (अध्यादेश) लाने पर भी विचार कर रहे हैं। हम लोगों को बसाने के लिए संकल्पित हैं, न कि उजाड़ने के लिए।


सवाल - ये शिकायत आम हो गई है कि बेलगाम नौकरशाही मंत्री और विधायकों तक की नहीं सुन रही। सरकार कुछ चुनिंदा अफसरों के बीच सिमटकर रह गई है ?
जवाब - मैं जबसे राजनीति में हूं, तबसे यह सब सुन रहा हूं। जब किसी को कोई आरोप लगाने के लिए नहीं मिलता तो इस बात पर आ जाता है। मनमानी नहीं चलती तो इस प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं। ये बेबुनियाद आरोप हैं। मंत्री, विधायक और संगठन के पदाधिकारियों का अपना प्रोटोकॉल है। विधायक चाहें किसी भी दल के हों, सभी अधिकारियों को उनका सम्मान करना चाहिए। यदि कोई अधिकारी आदर नहीं करता है तो उसके बारे में बताया जाना चाहिए। अधिकारी को मर्यादा में रहना चाहिए। हम समाज के चेहरे हैं। समाज की निगाह हम पर रहती है। हमारी भी जिम्मेदारी है कि कोई ऐसा कार्य न करें जो अनैतिक हो।

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