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अपराजिता : बेटियों ने दिखाया आगे बढ़ने का जज्बा
Updated Tue, 04 Dec 2018 01:47 AM IST
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संभल। अमर उजाला की ओर अपराजिता 100 मिलियन स्माइल कार्यशाला में सोमवार को संभल की बेटियों ने भारी उत्साह दिखाया। मैं पढ़ूंगी मैं बढ़ूंगी विषय पर आयोजित कार्यशाला में बेटियों ने पढ़ने और आगे बढ़ने का जज्बा पेश किया। मुख्य अतिथि एआरटीओ छबि सिंह चौहान ने बेटियों का जज्बा बढ़ाया। इस दौरान छात्राओं ने उनको बताया कि वह भी उनकी तरह प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती हैं। कई छात्राओं ने आईएएस और पुलिस अफसर बनने की ख्वाहिश जाहिर की। इस पर उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
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बेटियों की मुश्किलों और परिवार की दिक्कतों का हवाला देते हुए कहा कि बेटियां संवेदनशील होती हैं, उनका भावनात्मक लगाव समाज और परिवार से होता है। इसलिए तकलीफें भी ज्यादा होती हैं लेकिन इस को अपनी कमजोरी न समझें बल्कि मजबूती मानें क्योंकि एक बेटी समाज में जितने रिश्ते निभा सकती है। उतने रिश्ते निभाना बेटे के लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह तय करने की जरूरत है कि आप बनना क्या चाहते हैं।
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अगर आपने एक बार तय कर लिया कि आप क्या करना चाहती हैं तो फिर उसका रास्ता बनेगा। बिल गेट्स के एक विचार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जो जितना सोच सकता है वह उतना कर सकता है। इसी मौके पर जिले की एंटी रोमियो प्रभारी अंजू भदौरिया ने कहा कि आमतौर पर बेटी कभी पिता की तो कभी पति की पहचान से पहचानी जाती है लेकिन अगर बेटी अपने पढ़े - लिखे और किसी मुकाम तक पहुंचने का इरादा बनाए तो वह अपने नाम से ही पहचानी जाएगी। खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह अंजू भदौरिया हैं तो शुरू से ही अंजू भदौरिया के नाम से ही पहचानी जाती हैं। शादी होने के बाद भी उनकी पहचान नहीं बदली।
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कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का वार्डन राखी शर्मा ने कहा कि पढ़ना लिखना व्यर्थ नहीं जाता। शादी से पहले उन्होंने पढ़ाई लिखाई में मेहनत की तो इसका नतीजा यह है कि वे आज वार्डन के पद पर हैं। अगर बेटियां पढ़ेंगी तो जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ेंगी। विद्यालय की प्रबंधक दीप्ती माथुर ने बेटियों को मजबूत बनने का संदेश दिया। विद्यालय के प्रधानाचार्य यतींद्र भाटी ने कहा कि जीवन एक सफर है। इसमें लक्ष्य तय किए बिना ही आगे बढ़ना उचित नहीं है। जीवन का लक्ष्य तय करें और आगे बढ़ें। संभल के कोतवाल धर्मपाल सिंह ने बेटियों को पुलिस में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पुलिस में 33 प्रतिशत लड़कियां भर्ती की जानी है। फिलहाल 10 प्रतिशत बेटियां हैं। इसलिए पुलिस में भर्ती के तमाम मौके अभी मौजूद है। कार्यशाला में गीतिका गुप्ता, निर्मला कटियार, कामिनी चौधरी, हीबा, फिरदौस ने सहयोग दिया। संचालन अनिल कुमार ने किया।
गौसिया परवीन बोलीं, मैं बनना चाहती हूं आईएएस
संभल। पीसीएस अधिकारी छबि सिंह चौहान ने जब बेटियों से उनके सपने पूछे तो इंटरमीडिएट की छात्रा गौसिया परवीन ने आईएएस बनने का इरादा जाहिर किया। तैयारी के विषय में उसने जानकारी ली। आलिया परवीन ने बताया कि वह बैडमिंटन कोच बनना चाहती है। वह प्रदेश स्तर तक बैडमिंटन खेल चुकी है। आफरीन ने पुलिस में भर्ती होने के संबंध में जानकारी ली। उसने यह भी पूछा कि कितने किलोमीटर दौड़ने पर पुलिस में भर्ती का मौका मिलता है। जवाब में अंजू भदौरिया ने कहा कि 5 किलोमीटर की दौड़ होती है। वजन 48 किलोग्राम से कम नहीं होना चाहिए। लंबाई 5 फीट 2 इंच होनी चाहिए। नेहा, नाजिया, फैजिया ने भी पुलिस अफसर बनने का सपना बताया।