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Chandigarh News: हरियाणा में गेहूं खरीद का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा, केंद्र ने 22 मई तक बढ़ाई खरीद तिथि
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अभी तक 69.90 लाख मीट्रिक टन की आवक, 80 लाख एमटी का था लक्ष्य
चंडीगढ़। हरियाणा में इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। खरीद के अंतिम दिन 15 मई तक 69.90 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो पाई है, जबकि इस बार खरीद का लक्ष्य 80 लाख मीट्रिक टन था। 10 लाख मीट्रिक टन की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने हरियाणा में गेहूं की खरीद को एक सप्ताह और बढ़ा दिया है। अब हरियाणा में 22 मई तक खरीद हो सकेगी। हालांकि, वीरवार को प्रदेश की मंडियों में न के बराबर गेहूं आया।
मंडियों से गेहूं और सरसों का अधिकतम उठान हो चुका है और अब मंडियां खाली हो चुकी हैं। प्रदेशभर की 400 से अधिक मंडियों में अब ना के बराबर गेहूं आ रहा है। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो मात्र एक लाख मीट्रिक टन ही गेहूं मंडियों में पहुंच पाया है। बीते वर्ष प्रदेश की मंडियों में 62 लाख टन गेहूं आया था। वहीं, इस साल करीब 80 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान था। लेकिन प्रदेश में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल खराब होने से आवक अनुमानित लक्ष्य से कम रही है। इसी प्रकार बारिश और ओलावृष्टि के चलते 2022-23 में आई बाढ़ के कारण फसल बर्बाद होने से गेहूं की आवक करीब 41 लाख टन पर आकर ठहर गई थी।
गौर हो कि प्रदेश में मार्च-अप्रैल में तेज बारिश और ओलावृष्टि से काफी फसल खराब हुई। नतीजतन किसानों ने प्रदेश सरकार के पोर्टल पर 12 लाख एकड़ खराब फसल के लिए मुआवजा राशि की मांग की थी, जबकि 2-3 मार्च 2024 को हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से करीब 10 लाख एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा था और इसके बाद करीब दो लाख एकड़ और फसल को नुकसान पहुंचा।
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धान की किस्म 7301 व 7501 की हो रही कालाबाजारी
करनाल। प्रदेश के कई जिलों में धान के बीज को लेकर कालाबाजारी की आशंका है। सरकारी दुकानों पर बीज नहीं मिल रहा है, जबकि निजी बिक्री केंद्रों पर तय से अधिक रेट वसूले जा रहे हैं। हरियाणा सरकार ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी सूरत में किसानों को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। जीटी बेल्ट के जिलों कैथल और कुरुक्षेत्र में कुछ दिन पूर्व किसानों को धान का बीज लेने के लिए घंटों लाइनों में लगना पड़ा था। कई किसान बिना बीज लिए लौट रहे थे मगर अब यह समस्या खत्म हो गई है। एक हाईब्रिड बीज आया है, किस्म 7301 व 7501, ये निजी दुकानों पर भी उपलब्ध है। इसकी कीमत 1400 रुपये प्रति बैग (12 किग्रा) है, लेकिन कालाबाजारी के तहत इसे 3200 से 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। खाद भी पर्याप्त है।
कैथल के किसान महाबीर चहल ने बताया कि गेहूं का सीजन खत्म होते ही अचानक सभी किसानों को धान के बीज की जरूरत पड़ गई थी। ऐसे में एक सप्ताह तक समस्या बने रहने के बाद अब पर्याप्त बीज मिल रहा है। खाद की भी कमी नहीं है। वहीं, यमुनानगर में 140 क्विंटल बीज की मांग रहती है। सरकारी बीज वितरण केंद्र से 150 क्विंटल बीज 10 बिक्री केंद्रों पर भेजा जा चुका है, जिसमें से 90 फीसदी बीज किसानों ने खरीद लिया है। खाद भी पर्याप्त मिल रहा है। पानीपत के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक आदित्य डबास ने बताया कि जिले में धान के बीज की कोई कमी नहीं है। कुरुक्षेत्र-अंबाला में भी कमी नहीं है। कैबिनेट बैठक में सीएम सैनी ने कहा कि बीज की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं होती। संबंधित अधिकारी इस मामले में निगरानी रखें और चेकिंग करें।
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चंडीगढ़। हरियाणा में इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। खरीद के अंतिम दिन 15 मई तक 69.90 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो पाई है, जबकि इस बार खरीद का लक्ष्य 80 लाख मीट्रिक टन था। 10 लाख मीट्रिक टन की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने हरियाणा में गेहूं की खरीद को एक सप्ताह और बढ़ा दिया है। अब हरियाणा में 22 मई तक खरीद हो सकेगी। हालांकि, वीरवार को प्रदेश की मंडियों में न के बराबर गेहूं आया।
मंडियों से गेहूं और सरसों का अधिकतम उठान हो चुका है और अब मंडियां खाली हो चुकी हैं। प्रदेशभर की 400 से अधिक मंडियों में अब ना के बराबर गेहूं आ रहा है। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो मात्र एक लाख मीट्रिक टन ही गेहूं मंडियों में पहुंच पाया है। बीते वर्ष प्रदेश की मंडियों में 62 लाख टन गेहूं आया था। वहीं, इस साल करीब 80 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान था। लेकिन प्रदेश में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल खराब होने से आवक अनुमानित लक्ष्य से कम रही है। इसी प्रकार बारिश और ओलावृष्टि के चलते 2022-23 में आई बाढ़ के कारण फसल बर्बाद होने से गेहूं की आवक करीब 41 लाख टन पर आकर ठहर गई थी।
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गौर हो कि प्रदेश में मार्च-अप्रैल में तेज बारिश और ओलावृष्टि से काफी फसल खराब हुई। नतीजतन किसानों ने प्रदेश सरकार के पोर्टल पर 12 लाख एकड़ खराब फसल के लिए मुआवजा राशि की मांग की थी, जबकि 2-3 मार्च 2024 को हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से करीब 10 लाख एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा था और इसके बाद करीब दो लाख एकड़ और फसल को नुकसान पहुंचा।
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धान की किस्म 7301 व 7501 की हो रही कालाबाजारी
करनाल। प्रदेश के कई जिलों में धान के बीज को लेकर कालाबाजारी की आशंका है। सरकारी दुकानों पर बीज नहीं मिल रहा है, जबकि निजी बिक्री केंद्रों पर तय से अधिक रेट वसूले जा रहे हैं। हरियाणा सरकार ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी सूरत में किसानों को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। जीटी बेल्ट के जिलों कैथल और कुरुक्षेत्र में कुछ दिन पूर्व किसानों को धान का बीज लेने के लिए घंटों लाइनों में लगना पड़ा था। कई किसान बिना बीज लिए लौट रहे थे मगर अब यह समस्या खत्म हो गई है। एक हाईब्रिड बीज आया है, किस्म 7301 व 7501, ये निजी दुकानों पर भी उपलब्ध है। इसकी कीमत 1400 रुपये प्रति बैग (12 किग्रा) है, लेकिन कालाबाजारी के तहत इसे 3200 से 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। खाद भी पर्याप्त है।
कैथल के किसान महाबीर चहल ने बताया कि गेहूं का सीजन खत्म होते ही अचानक सभी किसानों को धान के बीज की जरूरत पड़ गई थी। ऐसे में एक सप्ताह तक समस्या बने रहने के बाद अब पर्याप्त बीज मिल रहा है। खाद की भी कमी नहीं है। वहीं, यमुनानगर में 140 क्विंटल बीज की मांग रहती है। सरकारी बीज वितरण केंद्र से 150 क्विंटल बीज 10 बिक्री केंद्रों पर भेजा जा चुका है, जिसमें से 90 फीसदी बीज किसानों ने खरीद लिया है। खाद भी पर्याप्त मिल रहा है। पानीपत के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक आदित्य डबास ने बताया कि जिले में धान के बीज की कोई कमी नहीं है। कुरुक्षेत्र-अंबाला में भी कमी नहीं है। कैबिनेट बैठक में सीएम सैनी ने कहा कि बीज की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं होती। संबंधित अधिकारी इस मामले में निगरानी रखें और चेकिंग करें।