कैसे बनेगा यूटी कैशलेस, बैंक सर्वर हुए ओवरलोड
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15 दिसंबर तक सभी विभागों को कैशलेस करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। कैशलेस के लिए रोजाना मैराथन मीटिंग हो रही हैं। इसके बाद भी अभी कुछ ही विभागों में कैशलेस सुविधाएं शुरू हो सकी हैं।
प्रशासन को अपने सभी विभागों के लिए करीब 2 हजार स्वाइप मशीन की जरूरत है, लेकिन बैंक इस जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उधर एक अधिकारी ने बताया कि बैंकों के सर्वर की क्षमता से अधिक स्वाइप मशीन लग चुकी हैं।
जिस कारण स्वाइप मशीन से ट्रांजेक्शन में समय लग रहा है। बैंकों को अपना सर्वर अपग्रेड कर इनकी क्षमता बढ़ानी होगी। छोटे-छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी वालों को भी स्वाइप मशीन दी जाएंगी तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
वहीं प्रशासन बार-बार मीटिंग कर बैंक अधिकारियों को अपनी जरूरतें बता रहा है। जरूरतें पूरी नहीं होने पर अब प्रशासन की कोशिश है कि कम से कम सभी विभागों में एक-एक स्वाइप मशीन तो लग जाए।
आखिर कितने ई-वालेट रखें ?
जैसे-जैसे और स्वाइप मशीनें आती रहेंगी, विभागों की मांग को देखते हुए उन्हें दे दी जाएंगी। बताया जा रहा है कि एडवाइजर परिमल राय ने बुधवार 14 दिसंबर तक हर हालत में सभी विभागों को कैशलेस करने के आदेश अधिकारियों को दिए हैं।
इन आदेशों के बाद मंगलवार शाम को डीसी अजीत बालाजी जोशी ने बैंक और प्रशासन के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। यूटी में अभी तक आरएलए, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, ई-संपर्क सेंटर, ग्रेन मार्केट और एस्टेट ऑफिस में स्वाइप मशीनें लगी है।
हेल्थ डिपार्टमेंट को अपने अस्पतालों के लिए 60 स्वाइप मशीन चाहिए, लेकिन अभी तक केवल 10 ही मिली हैं। इसके अलावा सीटीयू की बसों, एसटीए, सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट और स्कूल-कॉलेज सहित कई अन्य विभागों को स्वाइप मशीन नहीं मिल पाई हैं।
आखिर कितने ई-वालेट रखें ?
एक कंपनी के ई-वालेट से केवल उसी कंपनी की एप पर ट्रांजेक्शन की जा सकती है। किसी दूसरी एप पर यह संभव नहीं है। ऐसे में लोगों के जेहन में ये भी सवाल है कि आखिर कितनी ई-वालेट कंपनी की एप वह अपने फोन में रखें।
साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि दुकानदार के पास भी वही एप हो जो आपके पास है। यानि सभी ग्राहकों को अटेंड करने के लिए दुकानदार को भी सभी ई-वालेट एप फोन में रखने जरूरी हैं। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ही एक ऐसी एप है, जिसमें किसी भी दूसरे बैंक या एप पर पेमेंट भेजी जा सकती है।