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देश में एक ऐसा मंदिर, जहां साल में एक महीने ही होती है पूजा वो भी बिना नहाये
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Mon, 22 Jan 2018 07:04 PM IST
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Amritsar News
- फोटो : अमर उजाला
देश में एक ऐसा मंदिर, जहां साल में एक महीने ही पूजा होती है। मंदिर में स्थापित चांदी की मूर्ति में आधा शरीर हनुमान जी और आधा शरीर भैरव जी का है। ऐसे विश्व में सिर्फ दो मंदिर हैं, जहां साल में केवल एक महीने ही पूजा की जा सकती है।
प्रमुख मंदिर पाकिस्तान के मिंटगुमरी जिले के दिपालपुर में है तो दूसरा अमृतसर के बाबेया वाला बाजार में। मंदिर का नाम है श्री बाबा लालू जसराये जी। इस मंदिर की खासियत है कि यहां विश्व से लोग संतान के लिए मन्नत मांगने आते हैं।
450 वर्ष पुराने इस मंदिर की खासियत यह है कि मंदिर के किवाड़ साल में एक महीने के लिए खुलते ही यहां संतान की मन्नत मांगने वालों की कतारें लगती हैं। मंदिर की महानता के लिए इस बाजार में रहने वाली रेनू कपूर कहती हैं कि मंदिर एक माह ही खुलता है और इस एक माह उनके घर रिश्तेदारों का तांता लगा रहता है।
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प्रमुख मंदिर पाकिस्तान के मिंटगुमरी जिले के दिपालपुर में है तो दूसरा अमृतसर के बाबेया वाला बाजार में। मंदिर का नाम है श्री बाबा लालू जसराये जी। इस मंदिर की खासियत है कि यहां विश्व से लोग संतान के लिए मन्नत मांगने आते हैं।
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450 वर्ष पुराने इस मंदिर की खासियत यह है कि मंदिर के किवाड़ साल में एक महीने के लिए खुलते ही यहां संतान की मन्नत मांगने वालों की कतारें लगती हैं। मंदिर की महानता के लिए इस बाजार में रहने वाली रेनू कपूर कहती हैं कि मंदिर एक माह ही खुलता है और इस एक माह उनके घर रिश्तेदारों का तांता लगा रहता है।
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चढ़ावे में चढ़ते हैं लकड़ी के खिलौने
Amritsar News
- फोटो : अमर उजाला
राजेश खन्ना व विनोद खन्ना की चुटिया इसी मंदिर में उतरी
मंदिर के पंडित रामकृष्ण पांडेय (अयोध्या वाले) व मंदिर के संचालक सेवादार शामसुंदर कहते हैं कि फिल्म स्टार राजेश खन्ना व विनोद खन्ना की चुटिया मुंडन इसी मंदिर में हुआ है।
सात समुदाय का कुल मंदिर है
इस मंदिर में वैसे तो हर धर्म के लोग संतान की मन्नत मांगने आते हैं। लेकिन यह मंदिर खासकर सात समुदाय का कुल मंदिर है। इन सात समुदाय में खन्ना, कपूर, मल्होत्रा, मेहरा, सहगल, अरोड़ा व चोपड़ा वशंजों के नाम हैं। इन सातों समुदाय के बच्चों का नौ साल से लेकर उम्र की उस साल में चुटिया उतारी जाती है जो कि विषम हो। जैसे 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21 से लेकर 101 वर्ष तक। यहां चुटिया उतारने के लिए कोई उम्र का प्रावधान नहीं है।
चढ़ावे में चढ़ते हैं लकड़ी के खिलौने
इस मंदिर में चुटिया उतारने वालों को सुबह बिना नहाए मंदिर आना होता है। वहां पर पांच लकड़ी के खिलौने, एक नारियल, दूध की कड़ाही चढ़ानी पड़ती है। मंदिर में चुटिया मुंडन के बाद प्रथा है कि मां का मुख नहीं देखना चाहिए। सुबह बिना नहाए मंदिर में दर्शन की परंपरा है।
साल में एक महीने होता है जनेऊ संस्कार
इस मंदिर में साल में एक महीने जनेऊ संस्कार होता है। यहां प्रथा है कि जनेऊ धारण करने वाला मंदिर में सुबह बिना नहाए आकर पूजा करेगा और घर जाकर स्नान कर मां का आशीर्वाद लेगा।
मंदिर के पंडित रामकृष्ण पांडेय (अयोध्या वाले) व मंदिर के संचालक सेवादार शामसुंदर कहते हैं कि फिल्म स्टार राजेश खन्ना व विनोद खन्ना की चुटिया मुंडन इसी मंदिर में हुआ है।
सात समुदाय का कुल मंदिर है
इस मंदिर में वैसे तो हर धर्म के लोग संतान की मन्नत मांगने आते हैं। लेकिन यह मंदिर खासकर सात समुदाय का कुल मंदिर है। इन सात समुदाय में खन्ना, कपूर, मल्होत्रा, मेहरा, सहगल, अरोड़ा व चोपड़ा वशंजों के नाम हैं। इन सातों समुदाय के बच्चों का नौ साल से लेकर उम्र की उस साल में चुटिया उतारी जाती है जो कि विषम हो। जैसे 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21 से लेकर 101 वर्ष तक। यहां चुटिया उतारने के लिए कोई उम्र का प्रावधान नहीं है।
चढ़ावे में चढ़ते हैं लकड़ी के खिलौने
इस मंदिर में चुटिया उतारने वालों को सुबह बिना नहाए मंदिर आना होता है। वहां पर पांच लकड़ी के खिलौने, एक नारियल, दूध की कड़ाही चढ़ानी पड़ती है। मंदिर में चुटिया मुंडन के बाद प्रथा है कि मां का मुख नहीं देखना चाहिए। सुबह बिना नहाए मंदिर में दर्शन की परंपरा है।
साल में एक महीने होता है जनेऊ संस्कार
इस मंदिर में साल में एक महीने जनेऊ संस्कार होता है। यहां प्रथा है कि जनेऊ धारण करने वाला मंदिर में सुबह बिना नहाए आकर पूजा करेगा और घर जाकर स्नान कर मां का आशीर्वाद लेगा।