हरियाणा में टिकट घोटालाः जांच की जद में सभी रोडवेज डिपो, बड़ी गड़बड़ी का अंदेशा
हरियाणा रोडवेज के 24 डिपो और 12 सब डिपो मनोहर लाल सरकार के रडार पर आ गए हैं। बीते साल 16 अक्टूबर से दो नवंबर के बीच इन डिपो-सब डिपो में फर्जी टिकट घोटाला होने की आशंका है। करनाल डिपो में फर्जी टिकट घोटाला उजागर होने के बाद सरकार हरकत में आई है और सभी डिपो और सब डिपो की जांच कराने का निर्णय लिया है।
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने परिवहन विभाग के एससीएस धनपत सिंह और महानिदेशक आरसी बिढान को टिकट घोटाले की प्रदेश स्तरीय जांच कराने के मौखिक और लिखित आदेश जारी कर दिए हैं।
आदेश पर हुए अमल की समीक्षा पंवार शनिवार को करेंगे। एसीएस व महानिदेशक से अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट ली जाएगी। सरकार के पास रिपोर्ट है कि 2018 में हुई 18 दिन की हड़ताल के दौरान डिपो स्तर पर बड़े पैमाने पर फर्जी टिकट छपवाए गए हैं।
करनाल डिपो का घोटाला उजागर होने के बाद सरकार का संदेह डिपो प्रबंधकों पर और गहरा गया है। जिसके मद्देनजर परिवहन मंत्री ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। परिवहन मुख्यालय की ओर से गठित की जाने वाली टीमें सभी डिपो और सब डिपो में जांच करेंगी। जरूरत पड़ने पर सरकार पूरे मामले की विजिलेंस जांच भी करा सकती है। परिवहन मंत्री के सामने इसका विकल्प भी खुला है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई पर निर्णय : पंवार
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि करनाल डिपो के फर्जी टिकट घोटाले ने सभी डिपो, सब डिपो को संदेह के दायरे में ला दिया है। सरकार के पास फर्जी टिकट घोटाला अन्य जगह होने की भी शिकायतें आई हैं। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व महानिदेशक को जांच के आदेश दे दिए हैं। जल्दी जांच पूरी कराकर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने मांगी विजिलेंस जांच
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान हरिनारायण शर्मा, महासचिव बलवान सिंह दोदवा, वरिष्ठ उप-प्रधान सुरेश लाठर, उप महासचिव मायाराम उनियाल, उप प्रधान सुखविंदर सिंह व मुख्य संगठन सचिव महेंद्र मोहाली का कहना है कि हड़ताल के दौरान सभी डिपो में बड़ी धांधली हुई है। विभागीय जांच के बजाए विजिलेंस या किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाई जाए, ताकि घोटाले का पर्दाफाश हो सके। निष्पक्ष जांच होने पर अनेक डिपो महाप्रबंधक का घोटाले में फंसना तय है।
बिना नंबर की टिकटें छपवा आउटसोर्सिंग कंडक्टरों के जरिये कराया घोटाला
करनाल डिपो के जीएम और यातायात प्रबंधक पर आरोप है कि उन्होंने 94 लाख रुपये की बगैर नंबरों की फर्जी टिकटें छपवाई, जिन्हें आउटसोर्सिंग पर भर्ती परिचालकों के जरिये 18 से 24 अक्टूबर तक विभिन्न रूट पर कटवाया। इसके बाद नंबरों वाली टिकटें भी छपवाई, जिन्हें भी सवारियों को दिया गया। बगैर नंबरों की टिकटों का कैश सरकारी खजाने में जमा ही नहीं हुआ।
घोटाले का खुलासा होने पर पहले 57 लाख रुपये का कैश सरकारी खजाने में जमा कराने की बात कही गई, फिर कहा गया कि टिकटों की एक बोरी मिल गई है और चालीस लाख रुपये बतौर राजस्व जमा कराए गए हैं।
बाकी राशि किसने हड़पी, अभी तक इससे पर्दा नहीं उठा है। परिवहन मुख्यालय की सीएओ की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम घोटाले की जांच में जुटी है। हड़ताल के दौरान डिपो में लगभग 50 सरकारी परिचालक भी डयूटी पर थे, घोटाले को अंजाम देने के लिए उनसे ड्यूटी ही नहीं कराई गई।