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Chandigarh Pollution: पड़ोसी राज्यों की सीमा पर जल रही पराली, जहरीली हो रही सिटी ब्यूटीफुल की हवा
Wed, 02 Nov 2022 02:18 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Nov 2022 02:18 AM IST
सार
पराली का सीजन जब तक रहेगा तब तक हवा पर ऐसा ही असर रहेगा। पराली से हजारों टन जहरीली गैस निकलती हैं जो हवा के रुख से चंडीगढ़ पर असर डालती हैं। इसके अलावा मौसम का असर भी है क्योंकि ठंड में सभी धूल कण नहीं उड़ पाते हैं और हवा में जम जाते हैं, इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।
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chandigarh pollution
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा की सीमा में जलाई जा रही पराली से चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। मंगलवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के करीब पहुंच गया। सामान्य तौर पर चंडीगढ़ का एक्यूआई 70 से 150 के बीच रहता है।
पड़ोसी राज्य सरकार के लगातार दावों के बावजूद पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही। इसका असर दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ में भी देखा जा रहा है। चंडीगढ़ की हवा जहरीली हो गई है। पिछले कुछ दिन से दोपहर के समय एक्यूआई बढ़ जा रहा है। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा भी सामान्य से काफी ज्यादा है। बढ़ा एक्यूआई उन लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है, जिन्हें सांस संबंधी कोई बीमारी है।
मंगलवार शाम चार बजे एक्यूआई पुअर की कैटेगरी में था जो बाद में और खराब हो गया। पीजीआई स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर रविंदर खैवाल ने कहा कि चंडीगढ़ के साथ सटे पंजाब-हरियाणा के जिलों में पराली जल रही है, जिसका कुछ असर शहर पर पड़ रहा है। हालांकि गाड़ियों के चलने से पैदा होने वाली धूल, निर्माण कार्य का भी चंडीगढ़ में बढ़ रहे प्रदूषण में सहयोग है क्योंकि शहर में गाड़ियां बहुत ज्यादा हैं।
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जब तक पराली जलेगी, खराब रहेगी शहर की हवा
विशेषज्ञों के अनुसार, पराली का सीजन जब तक रहेगा तब तक हवा पर ऐसा ही असर रहेगा। पराली से हजारों टन जहरीली गैस निकलती हैं जो हवा के रुख से चंडीगढ़ पर असर डालती हैं। इसके अलावा मौसम का असर भी है क्योंकि ठंड में सभी धूल कण नहीं उड़ पाते हैं और हवा में जम जाते हैं, इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। शहर में पेड़ों की संख्या और हरियाली अधिक होने से प्रदूषण कुछ नियंत्रण में है। बता दें कि सीपीसीबी के अनुसार शून्य से 50 के बीच एक्यूआई के स्तर को ‘अच्छा’ और 51-100 के बीच को ‘संतोषजनक’ माना जाता है। इसके बाद 101-200 तक ‘मध्यम’, 201-300 तक ‘खराब’, 301-400 तक ‘बहुत खराब’ और 401-500 तक ‘गंभीर’ माना जाता है।
स्थान 15 दिन पहले अब एक्यूआई
सेक्टर-22 155 295
सेक्टर-25 72 96
सेक्टर-53 113 164
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पड़ोसी राज्य सरकार के लगातार दावों के बावजूद पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही। इसका असर दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ में भी देखा जा रहा है। चंडीगढ़ की हवा जहरीली हो गई है। पिछले कुछ दिन से दोपहर के समय एक्यूआई बढ़ जा रहा है। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा भी सामान्य से काफी ज्यादा है। बढ़ा एक्यूआई उन लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है, जिन्हें सांस संबंधी कोई बीमारी है।
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मंगलवार शाम चार बजे एक्यूआई पुअर की कैटेगरी में था जो बाद में और खराब हो गया। पीजीआई स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर रविंदर खैवाल ने कहा कि चंडीगढ़ के साथ सटे पंजाब-हरियाणा के जिलों में पराली जल रही है, जिसका कुछ असर शहर पर पड़ रहा है। हालांकि गाड़ियों के चलने से पैदा होने वाली धूल, निर्माण कार्य का भी चंडीगढ़ में बढ़ रहे प्रदूषण में सहयोग है क्योंकि शहर में गाड़ियां बहुत ज्यादा हैं।
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जब तक पराली जलेगी, खराब रहेगी शहर की हवा
विशेषज्ञों के अनुसार, पराली का सीजन जब तक रहेगा तब तक हवा पर ऐसा ही असर रहेगा। पराली से हजारों टन जहरीली गैस निकलती हैं जो हवा के रुख से चंडीगढ़ पर असर डालती हैं। इसके अलावा मौसम का असर भी है क्योंकि ठंड में सभी धूल कण नहीं उड़ पाते हैं और हवा में जम जाते हैं, इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। शहर में पेड़ों की संख्या और हरियाली अधिक होने से प्रदूषण कुछ नियंत्रण में है। बता दें कि सीपीसीबी के अनुसार शून्य से 50 के बीच एक्यूआई के स्तर को ‘अच्छा’ और 51-100 के बीच को ‘संतोषजनक’ माना जाता है। इसके बाद 101-200 तक ‘मध्यम’, 201-300 तक ‘खराब’, 301-400 तक ‘बहुत खराब’ और 401-500 तक ‘गंभीर’ माना जाता है।
स्थान 15 दिन पहले अब एक्यूआई
सेक्टर-22 155 295
सेक्टर-25 72 96
सेक्टर-53 113 164