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तुलिका घोष के शास्त्रीय गायन और पार्थ बोस के सितार वादन से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

Thu, 24 Mar 2022 02:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2022 02:30 AM IST
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The audience was mesmerized by Tulika Ghosh's classical vocals and Partha Bose's sitar playing.
चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में प्राचीन कला केंद्र की ओर से आयोजित 51वां अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन का तीसरा दिन बुधवार डॉ. तुलिका घोष और पंडित पार्थ बोस के नाम रहा। डॉ. घोष ने जहां शास्त्रीय संगीत से मन मोहा, वहीं पंडित बोस ने सितार वादन से लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। इस मौके पर केंद्र के चेयरमैन एसके मोंगा, रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर और सचिव सजल कौसर उपस्थित रहे।
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डॉ. तूलिका घोष ने कार्यक्रम की शुरुआत राग से की। इसके बाद उन्होंने झप ताल मध्य लय की बंदिश दरस दिखा मोरे कान्हा पेश करमाहौल को भक्तिमय बना दिया। उन्होंने हरि के चरन कमल.. बंदिश प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का समापन भजन बनवारी की सुरतिया बिसरत नाही.. से किया।
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इसके बाद कोलकाता के पंडित पार्थ बोस ने सितार की मधुर धुन से ऐसा समा बांधा कि संगीत प्रेेमी मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने राग बिहाग में निबद्ध आलाप से शुरुआत की। जोड़ झाले से राग की खूबसूरती को मधुर धुनों द्वारा प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंनेे होली के त्यौहार के अनुरूप राग विलंबित और मध्य लय की खूबसूरत गीतें पेश की। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शोभा कौसर और व सजल कौसर ने कलाकारों को पुष्प एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। मंच का संचालन डॉ. समीरा कौसर ने किया।
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डॉ. तुलिका घोष का परिचय
पद्मभूषण तबला वादक पंडित निखिल घोष की पुत्री तूलिका घोष इस प्रतिष्ठित संगीत घराने की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनके बड़े चाचा पन्नालाल घोष को हिंदुस्तानी शास्त्रीय बांसुरी के पिता के रूप में भी जाना जाता है। तुलिका के गायन में आगरा, ग्वालियर, पटियाला और बनारस परंपराओं के बेहतरीन तत्व मिलते हैं।

पंडित पार्थ बोस का परिचय एक नजर में
कलाकार पार्थ बोस को शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एक उभरते हुए सितारे के रूप में देखा जाता है। उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 11 साल की उम्र में पहली बार ऑल इंडिया रेडियो पर प्रस्तुति दी।
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