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Highcourt: कार्यालय में सख्ती जरूरी लेकिन कनिष्ठों को अपमानित करने और हाथ उठाने का अधिकार नहीं
Fri, 29 Nov 2024 08:23 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2024 08:23 PM IST
सार
कैथल में पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत जोगिंदर सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस दौरान एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। नोट के अनुसार घटना वाले दिन बलवान सिंह (आरोपी) ने उसे बेईमान कहा व अपशब्द कहकर उसके मुंह पर थप्पड़ भी मारा।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक पशु चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यालय प्रबंधन के लिए सख्ती ठीक है। लेकिन अपशब्द और अपमान की अनुमति नहीं दी जा सकती। याची पर कथित तौर पर अपने कनिष्ठ कर्मचारी को परेशान करने, धमकाने, अपमान, अपशब्दों का इस्तेमाल करने और थप्पड़ मारने का आरोप है।
एफआईआर के अनुसार मृतक के बड़े भाई ने पुलिस को बताया कि कैथल में पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत जोगिंदर सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस दौरान एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। नोट के अनुसार घटना वाले दिन बलवान सिंह (आरोपी) ने उसे बेईमान कहा व अपशब्द कहकर उसके मुंह पर थप्पड़ भी मारा।
वहीं, आरोपी के वकील ने कहा कि जोगिंदर सिंह मवेशियों के इलाज के लिए आम जनता से अतिरिक्त पैसे वसूल रहा था। इस संबंध में गांव के लोगों ने हलफनामा देकर बताया कि मृतक बिना किसी अधिकार के दवाई भी बनाता था। याचिकाकर्ता ने जोगिंदर को फटकार लगाई थी और सलाह दी कि वह मवेशियों के इलाज के लिए अस्पताल आने वाले ग्रामीणों से रिश्वत न मांगे।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह सच है कि विभाग या कार्यालय के प्रशासन के लिए वरिष्ठों को सख्ती बरतनी पड़ती है, लेकिन इसके लिए कार्यस्थल पर अपमान और धमकाने को सही ठहराया नहीं जा सकता। याची ने अपशब्दों का प्रयोग किया और जोगिंदर को डांटते हुए उसे थप्पड़ भी मारा। यह सब 14 अक्टूबर 2015 को अस्पताल परिसर में कार्य समय के दौरान हुआ और उसके बाद जोगिंदर ने उसी दिन आत्महत्या कर ली।
याचिकाकर्ता की दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को जोगिंदर के कामकाज या उसके भ्रष्ट आचरण के बारे में शिकायत मिली थी, तो उसे अपने वरिष्ठों को इसकी सूचना देनी चाहिए थी, ताकि उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। उसके कामकाज के संबंध में याचिकाकर्ता को लिखित में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी। जोगिंदर ने यह कठोर कदम इसलिए उठाया क्योंकि वह उक्त अपमान को सहन करने में असमर्थ था।
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एफआईआर के अनुसार मृतक के बड़े भाई ने पुलिस को बताया कि कैथल में पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत जोगिंदर सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस दौरान एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। नोट के अनुसार घटना वाले दिन बलवान सिंह (आरोपी) ने उसे बेईमान कहा व अपशब्द कहकर उसके मुंह पर थप्पड़ भी मारा।
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वहीं, आरोपी के वकील ने कहा कि जोगिंदर सिंह मवेशियों के इलाज के लिए आम जनता से अतिरिक्त पैसे वसूल रहा था। इस संबंध में गांव के लोगों ने हलफनामा देकर बताया कि मृतक बिना किसी अधिकार के दवाई भी बनाता था। याचिकाकर्ता ने जोगिंदर को फटकार लगाई थी और सलाह दी कि वह मवेशियों के इलाज के लिए अस्पताल आने वाले ग्रामीणों से रिश्वत न मांगे।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह सच है कि विभाग या कार्यालय के प्रशासन के लिए वरिष्ठों को सख्ती बरतनी पड़ती है, लेकिन इसके लिए कार्यस्थल पर अपमान और धमकाने को सही ठहराया नहीं जा सकता। याची ने अपशब्दों का प्रयोग किया और जोगिंदर को डांटते हुए उसे थप्पड़ भी मारा। यह सब 14 अक्टूबर 2015 को अस्पताल परिसर में कार्य समय के दौरान हुआ और उसके बाद जोगिंदर ने उसी दिन आत्महत्या कर ली।
याचिकाकर्ता की दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को जोगिंदर के कामकाज या उसके भ्रष्ट आचरण के बारे में शिकायत मिली थी, तो उसे अपने वरिष्ठों को इसकी सूचना देनी चाहिए थी, ताकि उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। उसके कामकाज के संबंध में याचिकाकर्ता को लिखित में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी। जोगिंदर ने यह कठोर कदम इसलिए उठाया क्योंकि वह उक्त अपमान को सहन करने में असमर्थ था।