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चंडीगढ़ खेल नीति: स्कूलों से निकलेंगे भविष्य के खिलाड़ी, हर साल 6-13 आयु वर्ग के लिए होगा टैलेंट हंट
Wed, 30 Aug 2023 11:01 AM IST
निवेदिता वर्मा
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 30 Aug 2023 11:01 AM IST
सार
इस योजना को शहर के सभी स्कूलों के साथ पेरीफेरी एरिया के स्कूलों में लागू किया जाएगा। बच्चों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं के दृष्टिगत तैयार करने के लिए उनकी फिटनेस, ट्रेनिंग और डाइट पर ध्यान दिया जाएगा। पेरीफेरी एरिया के स्कूलों में हर दो माह बाद खेल विभाग की ओर से विशेष कैंप लगाए जाएंगे।
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चंडीगढ़ की खेल नीति लागू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ की खेल नीति लागू हो गई है। शहर के स्कूलों से भविष्य के खिलाड़ी निकलेंगे। यूटी प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित की ओर से जारी नई खेल नीति में खिलाड़ियों की पौध तैयार करने के लिए स्कूलों में हर साल स्पोर्ट्स टैलेंट हंट करवाया जाएगा, जिसमें छह से 13 साल आयु वर्ग के बच्चों के बीच प्रतियोगिताएं होंगी।
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इस योजना को शहर के सभी स्कूलों के साथ पेरीफेरी एरिया के स्कूलों में लागू किया जाएगा। बच्चों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं के दृष्टिगत तैयार करने के लिए उनकी फिटनेस, ट्रेनिंग और डाइट पर ध्यान दिया जाएगा। पेरीफेरी एरिया के स्कूलों में हर दो माह बाद खेल विभाग की ओर से विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन शिविरों में चयनित बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए खेल विभाग की शाखा की ओर से गोद लिया जाएगा। पेरिफेरल क्षेत्र और ईडब्ल्यूएस कॉलोनियों के बच्चों के लिए खेल विभाग की ओर से 25 लाख रुपये का फंड बनाया गया है। जरूरतमंद बच्चों को इस फंड का वितरण खेल निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी।
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खेल विभाग चंडीगढ़ को पहले स्कॉलरशिप के लिए दो करोड़ रुपये का बजट मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 20 करोड़ किया जा रहा है। विभाग ने दिव्यांग खिलाड़ियों की सुविधा के लिए 50 लाख का फंड बनाने का भी निर्णय लिया है, ताकि उनकी आधारभूत जरूरतों को पूरा किया जा सके।
शहर की खेल नीति में यह होगा खास
- खिलाड़ियों को खेल कोटा के तहत नौकरियां दी जाएंगी
- विभिन्न खेलों के कोचिंग सेंटर खोले जाएंगे
- खेल क्षमता की पहचान के बाद खिलाड़ियों को मिलेगा उचित प्रशिक्षण
- उत्तीर्ण होने वाले खिलाड़ियों के लिए विशेष ट्रेंनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे
- पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के कोचों को मिलेंगे नकद पुरस्कार
- कोचों के लिए अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आदान प्रदान कार्यक्रम के तहत सेमिनार
- खिलाड़ियों का डाटा बैंक तैयार किया जाएगा
- खिलाड़ियों के लिए इंजरी एवं रिहैबिलटेशन सेंटर
- मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वेलनेस सेंटर
- खिलाड़ियों के लिए बीमा योजना
- असाधारण उपलब्धि के लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, रेफरी, अंपायर, फिजिकल एजुकेशन ट्रेनर्स और दिव्यांग खिलाड़ियों में चुने गए प्रतिभागियों को एडमिनिस्ट्रेटर अवॉर्ड
- खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स लाइब्रेरी
- खेल उपलब्धियों के आधार पर मिलेगी स्नातक की डिग्री
- वॉल ऑफ फेम : यूटी के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में वॉल ऑफ फेम बनाई जाएंगी। देश के स्पोर्ट्स लीजेंड के फोटो और कामयाबी के बारे में यहां बताया जाएगा, ताकि युवा खिलाड़ी प्रोत्साहित हो सकें
- स्पोर्सपर्सन डाटा बैंक: विभाग शहर के हर एथलीट का डाटा बैंक तैयार करेगा। उनकी ट्रेनिंग, इंजरी, डेवलपमेंट, स्काउटिंग आदि को इसमें मॉनिटर किया जाएगा।
- राइट टू स्पोर्ट: खेल विभाग ने राइट टू स्पोर्ट लेकर आने का फैसला किया है, ताकि हर कोई खेल से जुड़ सके। कॉम्प्लेक्स में एथलीट के साथ आम लोग भी खेल सकेंगे।
- स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एड के जरिए भी डिपार्टमेंट राजस्व एकत्रित करेगा। स्पॉन्सर की प्रमोशन यूनिपोल, डिजिटल स्क्रीन, होर्डिंग्स आदि पर विज्ञापन से रेवेन्यू लिया जाएगा