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Chandigarh News: स्मॉल इंडस्ट्री डेः आज तक पूरी तरह नहीं लागू हुआ एमएसएमई एक्ट, बर्बादी की ओर छोटी इंडस्ट्री

Sat, 30 Aug 2025 02:38 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 30 Aug 2025 02:38 AM IST
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Small Industry Day: MSME Act has not been fully implemented till date, small industries are heading towards ruin

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चंडीगढ़। देशभर में शुक्रवार को नेशनल स्मॉल इंडस्ट्री डे मनाया जाएगा लेकिन चंडीगढ़ की छोटी इंडस्ट्रीज जश्न के बजाय अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। एमएसएमई-डी एक्ट को यहां पूरी तरह लागू न करने और सर्विस सेक्टर को मंजूरी न देने से इंडस्ट्रियल एरिया के कारोबारी मुश्किल में हैं। पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में जहां यह एक्ट उद्योगों को मजबूती दे रहा है वहीं चंडीगढ़ में 1982 के बाद से नई अलॉटमेंट तक नहीं हुई। पुराने उद्यमी भी नीतिगत अड़चनों में जकड़े हैं। उद्योग जगत का कहना है कि अगर हालात नहीं बदले तो इंडस्ट्रियल एरिया धीरे-धीरे उजड़ जाएगा।

बिजनेस आगे नहीं बढ़ा रहे
लघु उद्योग भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवि भसीन ने हालात को बेहद खराब बताते हुए कहा कि छोटी इंडस्ट्रीज लगातार बर्बाद हो रही हैं। कोई बैकअप नहीं है। हम सरवाइवल पर चल रहे हैं। तीसरी जेनरेशन आ चुकी है लेकिन इंडस्ट्रियल एरिया में लीज होल्ड होने की वजह से न तो अपनी प्रॉपर्टी बेच पा रहे हैं और न ही आगे बढ़ा पा रहे हैं। हर बार यही जवाब मिलता है कि प्रस्ताव एमएचए (गृह मंत्रालय) में भेजा गया है लेकिन वर्षों से कोई फैसला नहीं हुआ। स्टार्टअप पॉलिसी जरूर लागू हुई है मगर इंडस्ट्रियल एरिया में प्रॉपर्टी के टाइटल क्लियर नहीं हैं। अपने बेटे को मजबूरी में मोहाली में प्लॉट दिलवाया। बी-टू-सी (बिजनेस टू कंज्यूमर) की अनुमति के लिए भी वर्षों से लड़ाई चल रही है। पुराने गवर्नर ने मंजूरी दे दी थी लेकिन अधिकारी बदलते ही फैसला पलट गया। सारी मेहनत बर्बाद हो गई।
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पार्लियामेंट से पास एक्ट को चंडीगढ़ में रोका
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के अध्यक्ष वरिंदर सलूजा ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एमएसएमई एक्ट संसद से पास हो चुका है लेकिन यूटी प्रशासन उसे पूरी तरह से लागू नहीं कर रहा। यहां अधिकारी सर्विस सेक्टर को मंजूरी नहीं देते। अगर कोई उद्यमी आगे बढ़ने की कोशिश करता है तो उसे नोटिस थमा दिया जाता है। मशीनरी खरीदनी हो तो बैंक सपोर्ट नहीं करते लेकिन कार खरीदने के लिए वही बैंक पीछे-पीछे भागते हैं। प्रशासन की इस नीति से उद्योगों का भविष्य चौपट हो रहा है। कहा कि पंजाब-हरियाणा में लागू नियमों से वहां का इंडस्ट्रियल माहौल लगातार मजबूत हुआ है जबकि चंडीगढ़ में कड़े और पुराने नियमों की वजह से निवेशक दूर हो रहे हैं। नई यूनिट आना तो दूर पुरानी इंडस्ट्रीज भी धीरे-धीरे यहां से पलायन कर रही हैं।
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सर्विस सेक्टर जोड़ दिया जाए तो इंडस्ट्रीज वापस आएंगी
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने कहा कि अगर चंडीगढ़ में एमएसएमई-डी एक्ट के तहत सर्विस सेक्टर को मंजूरी दे दी जाए तो यहां की इंडस्ट्रीज को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मोहाली और पंचकूला में यह पॉलिसी लागू है लेकिन चंडीगढ़ में नहीं है। यही कारण है कि 1982 के बाद से कोई नई अलॉटमेंट नहीं हुई। प्रशासन को कम से कम पुराने उद्यमियों को मजबूती देनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। अगर एक्ट लागू हो जाए तो इंडस्ट्रियल एरिया के कारोबारियों को बार-बार बी-टू-सी की अनुमति मांगनी ही नहीं पड़ेगी।
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