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सेब आढ़तियों की शिफ्टिंग, पंचकूला को फायदा चंडीगढ़ को भारी नुकसान

Thu, 03 Aug 2017 02:23 PM IST
राजेश ढल्ल /अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल /अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 03 Aug 2017 02:23 PM IST
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Shifting of apple spellings: Loss of Panchkula to Chandigarh.
Shifting of apple spellings
सेब आढ़तियों के पंचकूला शिफ्ट करने से प्रशासन को लगभग चार करोड़ राजस्व का नुकसान होगा। जबकि होटल और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को एक करोड़ नुकसान होने का अनुमान है। शहर में इस सीजन में लगभग दो अरब के सेब का कारोबार होता है। प्रशासन से नाराज होकर सेव आढ़ती और हिमाचल के जमींदार की पंचकूला मंडी में चले गए हैं। ऐसे में चंडीगढ़ के लोगों को इस बार महंगा सेब खरीदना पड़ेगा। आढ़तियों के शहर की सेक्टर-26 मंडी से शिफ्ट होने के कारण प्रशासन को भी चार करोड़ से ज्यादा की मार्केट फीस का चूना लगेगा वहीं मंडी में कई सालों से काम कर रहे पल्लेदार भी बेरोजगार हो गए हैं। 
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नाराजगी वजह 
चंडीगढ़ में फल और सब्जियों पर दो प्रतिशत मार्केट फीस चार्ज की जा रही है। पंजाब को छोड़कर इस समय देश का कोई प्रदेश ऐसा नहीं है जहां पर मार्केट फीस चार्ज की जा रही हो। प्रशासन को पूरे साल में कुल 8 करोड़ रुपये की कमाई मार्केट फीस से होती है जिसमें अकेले 2 अरब के सेब का कारोबार होने पर चार करोड़ की कमाई मार्केट फीस से होती है। लेकिन प्रशासन ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है। बीते दिनों दिल्ली में गृह मंत्री के समक्ष भी सलाहकार समिति की बैठक में मार्केट फीस समाप्त करने की मांग सांसद किरण खेर और कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने उठाई है।
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0 से 15 हजार पेटियां आ रही है सेब की

Shifting of apple spellings: Loss of Panchkula to Chandigarh.
Shifting of apple spellings - फोटो : अमर उजाला
इस समय 10 से 15 हजार पेटिया प्रतिदिन पंचकूला मंडी में  आ रही है। जबकि चंडीगढ़ मंडी में 200 से 300 पेटी ही आ रही है। पचंकूला में मंडी शिफ्ट होने से परचून में सेब का स्वाद भी शहरवासियों को महंगा पड़ेगा। जबकि 10 अगस्त से 40 से 50 हजार पेटियां आनी शुरू हो जाएगी।

मार्केट फीस समाप्त करने का अधिकार कमेटी के पास नहीं है। चंडीगढ़ में पंजाब एक्ट लागू होता है। पंचकूला गए आढ़तियों से बात की जा रही है वह यहां आकर ही काम करे। आढ़तियों और जमींदारों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
जूझार सिंह, चेयरमैन, मार्केट कमेटी

जब तक प्रशासन मार्केट फीस समाप्त नहीं करता तब तक आढ़ती वापस चंडीगढ़ की मंडी में नहीं आएंगे। अभी तक सेब के आढ़ती हरियाणा की पंचकूला मंडी में गए हैं अगर ऐसा ही चलता रहा तो अन्य फल और सब्जी आढ़ती भी पंचकूला ही काम करने के लिए आ जाएंगे। सेब मंडी शिफ्ट होने से पल्लेदार के अलावा होटल इंडस्ट्री को भी नुकसान हुआ है। 
बृज मोहन, उपाध्यक्ष, सब्जी और फल आढ़ती एसोसिएशन
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