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चंडीगढ़ में एसएसए शिक्षकों को झटका: नियमित करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, खंडपीठ में दी थी चुनाैती

Fri, 16 Jan 2026 09:35 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 16 Jan 2026 09:35 AM IST
सार

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 14 नवंबर को अपने फैसले में कहा था कि केवल पदों के अभाव या नियमितीकरण नीति न होने के आधार पर एसएसए शिक्षकों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

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Setback for SSA teachers in Chandigarh High Court stays order
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत चंडीगढ़ में कार्यरत शिक्षकों को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उनको नियमित करने के आदेश पर रोक लगा दी है। 

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 10 वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके एसएसए शिक्षकों को नियमित करने का आदेश जारी किया था, जिसे खंडपीठ में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने माना कि मामला विचारणीय है। इस आधार पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया।
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चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अपील दाखिल करते हुए दलील दी गई कि एकल पीठ ने जिन शिक्षकों को नियमित करने का आदेश दिया था वह सर्व शिक्षा अभियान के तहत नियुक्त हुए थे जो कि केंद्र सरकार की परियोजना थी। खंडपीठ को बताया गया कि सक्षम प्राधिकारी ने एसएसए के अंतर्गत सृजित पदों को चंडीगढ़ प्रशासन के नियमित शिक्षक संवर्ग में विलय करने से जुड़ा कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया है। इन परिस्थितियों में यूटी कैडर के नियमित पदों पर नियमितीकरण का एसएसए शिक्षकों को कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। 
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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 14 नवंबर को अपने फैसले में कहा था कि केवल पदों के अभाव या नियमितीकरण नीति न होने के आधार पर एसएसए शिक्षकों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था और यह भी स्पष्ट किया था कि आदेश का पालन न होने की स्थिति में नियमित करने का आदेश स्वतः लागू माना जाएगा। भविष्य में ऐसी याचिकाओं से बचने के उद्देश्य से यह फैसला सभी समान परिस्थितियों वाले शिक्षकों पर समान रूप से लागू मानने का निर्देश दिया था। 


कोर्ट ने कहा था कि अधिकांश शिक्षक वर्ष 2005 से कार्यरत हैं और कई शिक्षक 20 वर्ष से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षकों की भर्ती पूरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक, पारदर्शी और नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया के समान थी और नियुक्ति परियोजना स्वीकृति बोर्ड द्वारा स्वीकृत पदों के विरुद्ध की गई थी। चंडीगढ़ के लिए परियोजना स्वीकृति बोर्ड की विभिन्न बैठकों में 1375 शिक्षक पद स्वीकृत किए गए थे। 

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