पंजाब: गुरिंदर की मदद से रितिक को बोरवेल से बाहर निकाला गया, कहा- अफसोस! जान नहीं बचा सके
गुरिंदर को इस बात का अफसोस है कि इस बार भी वह बच्चे की जान बचा पाने में नाकाम रहा। उसका कहना है कि अगर वह कुछ घंटे पहले अपना काम शुरू कर पाता है तो शायद बच्चे की जान बच जाती।
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होशियारपुर जिले के गांव ख्याला में बोरवेल में गिरे बच्चे रितिक को बाहर निकालने के लिए सुनाम से आए ट्यूबवेल मिस्त्री गुरिंदर का फंदा ही आखिर काम आया। ज्ञात रहे कि जून 2019 में संगरूर में हुए एक ऐसे ही हादसे में बोरवेल में गिरे बच्चे को 110 घंटे बाद गुरिंदर ने ही अपने फंदे की मदद से निकाला था।
गुरिंदर ने बताया कि उसे होशियारपुर से किसी ने फोन कर इस घटना के बारे में सूचना दी थी। सूचना मिलते ही वह होशियारपुर के लिए निकल पड़ा था। गुरिंदर ने बताया कि वह करीब 200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करके दोपहर करीब 2:30 बजे मौके पर पहुंच गया था। इस दौरान पहले तो उसे रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होने नहीं दिया गया लेकिन बाद में सीएम के हस्तक्षेप से बात बन पाई।
जिले के डीसी ने पूरी गंभीरता से उसकी बात सुनी और उसे शाम करीब 4:30 बजे उसे ऑपरेशन में शामिल किया गया। गुरिंदर ने बताया कि बच्चे को निकालने के लिए उसने अपने एक सहायक और एनडीआरएफ के दो जवानों की मदद से ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान एनडीआरएफ के जवान ऑक्सीजन सप्लाई और भीतर डाला गया कैमरा संभाले हुए थे जबकि वह अपने सहायक के साथ रस्सी की मदद से फंदा डाल रहा था।
गुरिंदर ने बताया कि फंदा डालने के लिए गांठ बांधनी उसे नहीं आती इसलिए एनडीआरएफ की मदद से गांठ बांधकर फंदा बनाया गया जो पहले ही प्रयास में बच्चे के दोनों हाथों में पड़ गया। इस दौरान बच्चे को खींचना शुरू किया तो करीब तीन चार फुट ऊपर ही आने के बाद अचानक गांठ खोलने से काम वहीं रुक गया।
गुरिंदर ने बताया कि पाइप और रस्सी निकालकर एक बार फिर से एनडीआरएफ ने गांठ बांधकर फंदा बनाया गया जो उसने अपने सहायक और एनडीआरएफ जवानों की मदद से बच्चे की बाजू में डाला लेकिन इस बार फंदा उसकी एक बाजू में ही डाल पाया। इस फंदे की मदद से बच्चे को करीब 30 फीट ऊपर तक खींच लिया गया था लेकिन अचानक वह पाइप में वहीं अटक गया। इस पर एक और पाइप व रस्सी की मदद से एक दूसरा फंदा डाला गया जिसकी मदद से उसे बाहर निकाला गया। इसके चलते पूरे काम में करीब डेढ़ घंटा लग गया जिससे 6:00 बजे के बाद बच्चे को बाहर निकाला जा सका।
गुरिंदर ने बताया कि 2019 में संगरूर में फतेहवीर को भी उसी के फंदे की मदद से निकाला जा सका था हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी जिस वजह से फतेहवीर पहले ही दम तोड़ चुका था। इसके बाद उसी वर्ष अक्तूबर माह में तमिलनाडु में वेल्लोर जिले में हुए एक ऐसे ही हादसे में बच्चे को निकालने के लिए तमिलनाडु सरकार उसे हवाई जहाज के जरिये वहां तक लेकर गई थी और वहां भी इसी तरह उसके फंदे से बच्चे को बोरवेल से निकाला गया था हालांकि उस मामले में भी बच्चे की जान नहीं बच पाई थी।
गुरिंदर को इस बात का अफसोस है कि इस बार भी वह बच्चे की जान बचा पाने में नाकाम रहा। उसका कहना है कि अगर वह कुछ घंटे पहले अपना काम शुरू कर पाता है तो शायद बच्चे की जान बच जाती। गुरिंदर के मुताबिक बोरवेल का पाइप ऊपर से 8 इंच का था जिसके चलते बच्चा नीचे सरक गया किंतु आगे करीब 85 फुट के बाद पाइप 7 इंच का था जिसके चलते बच्चा नीचे न जाकर वहीं अटक गया। गुरिंदर के लिए होशियारपुर जिला प्रशासन ने रविवार की रात यहीं रुकने का प्रबंध किया है और जिलाधीश के साथ सुबह मीटिंग के बाद वह अपने घर के लिए रवाना होगा।