चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी कोरोना के बाद से अब तक नहीं खुला है। विभागों में भी काम नहीं हो रहा है। शिक्षक हड़ताल पर लंबे समय से हैं। शोध भी प्रभावित है। इसी बीच एमटीएस कर्मचारियों को रखा जा रहा है। इस पर कुछ वरिष्ठ शिक्षकों ने सवाल खड़े किए हैं। कुछ ने उच्च अधिकारियों को फोन करभी अवगत कराया है। उनका कहना है कि जब पीयू को अभी जरूरत ही नहीं है तो कर्मचारी क्यों रखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इसे बैकडोर इंट्री माना जाएगा। कुछ कर्मचारियों ने भी सवाल खड़े किए हैं। अब वह चांसलर कार्यालय को पत्र भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
कोरोना काल में 300 एमटीएस कर्मचारियों का अनुबंध खत्म हो गया था। उस दौरान रिनुअल इनका नहीं किया गया। कहा गया कि विश्वविद्यालय बंद चल रहा है। ऐसे में कर्मचारी नहीं रखे जा सकते। स्थिति आज भी वैसी ही है। कैंपस नहीं खुला। केवल पीजी के विद्यार्थियों को बुलाया गया है। आरोप है कि बड़ी संख्या में एमटीएस कर्मचारियों की भर्तियां की गई हैं जो आउट सॉर्सिंग से हो रही हैं। इस प्रकरण की जांच की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस भर्ती के नाम पर बड़ा खेल होता है। हटाए गए पुराने कर्मचारियों को तो पूरी जगह नहीं मिली, लेकिन नए लोगों को रखा जा रहा है। पीयू प्रशासन का तर्क है कि वह जरूरत के हिसाब से ही कर्मचारियों को रखता है। विभागों की मांग पर उन्हें कर्मचारी दिए जाते हैं।