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देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को कम करने की वकालत

Mon, 02 Feb 2026 09:35 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 09:35 PM IST
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Questions raised about the country's education system: calls for reducing the increasing academic pressure on children.
-बचपन बोझ नहीं, खुशी भरा हो—प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्रालय से अभिभावकों की अपील
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर बच्चों पर बढ़ते मानसिक और शारीरिक दबाव को कम करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि यह केवल अभिभावकों की चिंता नहीं, बल्कि उन लाखों बच्चों की आवाज है जो भारी स्कूल बैग, लंबी कक्षाओं और परीक्षा तनाव में जूझ रहे हैं।
पत्र में बताया गया कि बच्चे रोज़ाना लगभग सात घंटे कक्षा में बिताते हैं। भारी टाइमटेबल, होमवर्क और परीक्षाओं का दबाव उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से थका देता है। अभिभावकों ने स्कूल समय कम करने और पढ़ाई को आनंदमय बनाने की अपील की है। मुनीश दुआ सहित अभिभावकों ने पत्र में खेल, नृत्य, संगीत, कला और कंप्यूटर शिक्षा को रोज़ाना अनिवार्य करने की मांग की। उनका कहना है कि ये विषय अतिरिक्त नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और भावनात्मक विकास के लिए जरूरी हैं।
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परीक्षा प्रणाली और सिलेबस में बदलाव
पत्र में सिलेबस को कम करने और परीक्षा प्रणाली को समझ आधारित बनाने की सिफारिश की गई। त्योहारों के समय परीक्षाओं पर आपत्ति जताई गई, ताकि बच्चे खुशी और सुकून के साथ पर्व मना सकें। अभिभावकों ने कहा कि शिक्षक स्पष्ट नोट्स और पर्याप्त सैंपल पेपर प्रदान करें, ताकि कोचिंग पर निर्भरता कम हो। बच्चों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
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तकनीक और आधुनिक शिक्षा
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से शिक्षा को व्यक्तिगत और इंटरैक्टिव बनाया जा सकता है। पत्र में कहा गया है कि यदि शिक्षा प्रणाली अधिक मानवीय और लचीली बनेगी, तो भविष्य में देश को आत्मविश्वासी, सक्षम और खुशहाल नागरिक मिलेंगे। अभिभावकों का मानना है कि रटंत शिक्षा के बजाय कौशल आधारित और संवेदनशील शिक्षा समय की आवश्यकता है, ताकि बच्चों का बचपन खुशियों और सीखने की आनंदमयी प्रक्रिया से भरा रहे।
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