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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court cleared that short period of marriage is no basis for stopping donating organs

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी: शादी की कम अवधि अंग दान से रोकने का आधार नहीं, जालंधर निवासी को किडनी दान की अनुमति

Sat, 16 Apr 2022 03:47 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 16 Apr 2022 03:47 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि महिला के ऊपर अंगदान के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया जिसकी पुष्टि पुलिस की जांच से हो गई। महिला को प्राधिकरण ने मेडिकल तौर पर अंगदान के लिए फिट पाया है।

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Punjab-Haryana High Court cleared that short period of marriage is no basis for stopping donating organs
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शादी की कम अवधि पत्नी द्वारा पति को किडनी दान करने से रोकने का आधार नहीं हो सकती है।

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याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी पत्नी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसका विवाह दिसंबर 2021 में हुआ था। इसके कुछ समय बाद उसके पति की तबियत खराब हो गई और वह डायलिसिस पर चल रहे हैं। पति की जान बचाने के लिए उसने अपनी एक किडनी उनको देने का फैसला लिया और इसके लिए अस्पताल में आवेदन कर दिया। अस्पताल ने इस आवेदन को सक्षम प्राधिकरण के पास भेज दिया। इसके बाद प्राधिकरण ने सभी जांच के बाद पत्नी को अंगदान के लिए फिट पाया लेकिन आवेदन केवल इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि विवाह को अभी केवल कुछ माह ही हुए थे। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि महिला के ऊपर अंगदान के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया जिसकी पुष्टि पुलिस की जांच से हो गई। महिला को प्राधिकरण ने मेडिकल तौर पर अंगदान के लिए फिट पाया है। आवेदन केवल इस आधार पर रद्द किया गया है कि महिला के विवाह की अवधि कम है। महिला पति की जान बचाना चाहती है, ऐसे में केवल विवाह की अवधि कम होने को आधार बनाकर अंग प्रत्यारोपण की अनुमति देने से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने अब प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वह महिला को अंग प्रत्यारोपण की अनुमति प्रदान करे। 

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कानूनी नैतिकता के सिद्धांतों को सुव्यवस्थित करने के लिए हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

कानूनी नैतिकता के सिद्धांतों को सुव्यवस्थित करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से सुझाव मांगे हैं। हाईकोर्ट ने उन बिंदुओं पर सलाह मांगी है जहां वकील अपने कानूनी कर्तव्य को अनदेखा कर देते हैं।  

एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सामने आया था कि याचिकाकर्ता ने पूर्व में दाखिल याचिका के बारे में कोर्ट को जानकारी नहीं दी थी तथा वर्तमान याचिका में भी तथ्यों को छुपाया था। कोर्ट ने जब याची के वकील से इसकी वजह पूछी तो इसके बारे में वकील जानकारी नहीं दे सका। हाईकोर्ट ने उस याचिका को वापस लेने की छूट के साथ उसे खारिज कर दिया। भविष्य में इस प्रकार की कोई घटना न हो इसके लिए हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस बारे में बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से 4 मई तक सुझाव मांग लिए हैं। 

अनुपम गुप्ता कोर्ट मित्र होंगे 
इस मामले में कोर्ट का सहयोग करने के लिए हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता को कोर्ट मित्र के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला कानूनी नैतिकता से जुड़ा हुआ है और इस मामले में कानूनी नैतिकता की उपेक्षा की गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि वकील का दायित्व केवल अपने मुवक्किल के प्रति नहीं बल्कि पूरे समाज के प्रति होता है। ऐसे में कानूनी नैतिकता के सिद्धांत जरूरी है। ऐसा इसलिए भी जरूरी है ताकि न्याय पर विश्वास बना रहे।

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