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Chandigarh News: पंजाब फीस रेगुलेशन एक्ट बेअसर, अभिभावकों की फीस संबंधी परेशानियां ज्यों की त्यों

Mon, 12 Jun 2023 01:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jun 2023 01:40 AM IST
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Punjab Fee Regulation Act ineffective, fees related problems of parents remain the same
चंडीगढ़। पंजाब गैर-सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों के शुल्क अधिनियम के चंडीगढ़ में लागू होने के पांच साल बाद भी शिक्षा व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं आया है। अभिभावकों की फीस संबंधी परेशानियां ज्यों की त्यों हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पांच सालों में किसी स्कूल पर कोई कार्रवाई हुई ही नहीं जबकि नए सत्र में होने वाली किताबों में लूट, वर्दी में बदलाव आदि चीजों से सभी वाकिफ हैं।
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अभिभावकों का कहना है कि पंजाब फीस रेगुलेशन एक्ट निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए मजबूत नहीं है। चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने बताया कि अधिनियम में कई कमियां हैं जिसके कारण यह यूटी में सफल नहीं रहा है। पिछले पांच सालों में इससे अभिभावकों को कोई राहत नहीं मिली है।
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अधिनियम में ये हैं कमियां

सामाजिक संस्था या अन्य व्यक्ति को शिकायत करने का हक नहीं

अधिनियम के तहत स्कूल के खिलाफ सिर्फ बच्चा या अभिभावक ही शिकायत कर सकते हैं। लेकिन स्कूल में बच्चे के साथ कोई भेदभाव न हो इसलिए ज्यादातर अभिभावक शिकायत करने के लिए आगे नहीं आते। ऐसे में अधिनियम के कारण कोई भी सामाजिक संस्था या व्यक्ति स्कूल की शिकायत नहीं कर सकता।
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फीस रेगुलेटरी समिति में अभिभावकों का प्रतिनिधित्व नहीं
अधिनियम के तहत गठित की समिति में अभिभावकों की कोई भागीदारी नहीं रखी गई है। ऐसे में समिति में परिजनों का पक्ष रखने के लिए कोई सदस्य नहीं है जिसमें प्राथमिक, उच्च शिक्षा से लेकर सभी अधिकारियों को शामिल किया गया है।

आठ प्रतिशत फीस बढ़ाने की छूट

अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूल आठ प्रतिशत तक प्रति वर्ष फीस बढ़ा सकते हैं। हालांकि फीस को मुनाफा कमाने के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता फिर भी निजी स्कूल आठ प्रतिशत की छूट से पैसे कमा रहे हैं। हर वर्ष किस आधार पर फीस बढ़ोतरी होगी इसकी स्पष्टता नहीं है।

अधिनियम निजी स्कूलाें का व्यवसाय रोकने में नाकामयाब
पंजाब फीस रेगुलेशन को लागू हुए पांच साल हो गए हैं। लेकिन अभी तक शिक्षा का व्यवसाय चल रहा है। इस अधिनियम में सभी को शिकायत करने की छूट नहीं है, न ही रेगुलेटरी समिति में अभिभावकों की भागीदारी है और न ही आठ प्रतिशत फीस बढ़ोतरी को लेकर स्पष्टता है। -नितिन गोयल, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष


नियमों को लागू करना हमारा कर्तव्य
हमारा काम नियमों को लागू करना है जो हम कर रहे हैं। उसमें हम किसी तरह का संशोधन नहीं कर सकते। चंडीगढ़ के कुछ स्कूलों के लिए अलग से अधिनियम बनाना मुमकिन नहीं है। पंजाब की राजधानी होने के नाते यहां राज्य के नियम लागू होंगे। -हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक
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