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राजस्व घाटा हुआ आधे से भी कम, पिछले साल के मुकाबले बेहतर होगा पंजाब का बजट
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 23 Jan 2018 11:24 AM IST
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Punjab Budget
- फोटो : File Photo
पंजाब सरकार बीते एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान राजस्व घाटे को 13000 करोड़ रुपये के आंकड़े से घटाकर 6000 करोड़ रुपये पर लाने में सफल हो गई है। वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए संकेत दिए कि वर्ष 2018-19 का राज्य का बजट पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर होगा। प्रदेश व लोगों के कल्याण के लिए सरकार कई कदम उठाएगी।
चार वर्षों में राजस्व घाटा शून्य पर लाने का लक्ष्य लेकर चल रहे पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल इस बार अपनी सरकार के कार्यकाल का दूसरा बजट तैयार करते हुए काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। अपने कार्यालय में बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि बीते एक साल के दौरान सरकार खर्चों में कटौती के अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रही है और इस क्रम को आगे भी जारी रखेगी। सरकार का पूरा जोर अपने मैनिफेस्टो में जनता से किए वादों को निभाने का है। हालांकि इसमें कुछ समय लगेगा लेकिन सरकार अपने सीमित साधनों का सही ढंग से उपयोग करते हुए आगे बढ़ रही है।
जीएसटी की वजह से आय में आई कुछ रुकावट
उन्होंने कहा कि बीते साल जीएसटी लागू होने से सरकार की आय में कुछ व्यवधान आया, फिर भी किसानों से किए गए कर्ज माफी के वादे को पूरा करने की ओर कदम बढ़ाते हुए 3600 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। इस मद में बाकी बचे किसानों के लिए अगले बजट में प्रावधान करने होंगे। उन्होंने बताया कि उद्योगों के लिए 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली और घर-घर रोजगार के वादे पर भी काम शुरू कर दिया गया है।
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चार वर्षों में राजस्व घाटा शून्य पर लाने का लक्ष्य लेकर चल रहे पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल इस बार अपनी सरकार के कार्यकाल का दूसरा बजट तैयार करते हुए काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। अपने कार्यालय में बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि बीते एक साल के दौरान सरकार खर्चों में कटौती के अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रही है और इस क्रम को आगे भी जारी रखेगी। सरकार का पूरा जोर अपने मैनिफेस्टो में जनता से किए वादों को निभाने का है। हालांकि इसमें कुछ समय लगेगा लेकिन सरकार अपने सीमित साधनों का सही ढंग से उपयोग करते हुए आगे बढ़ रही है।
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जीएसटी की वजह से आय में आई कुछ रुकावट
उन्होंने कहा कि बीते साल जीएसटी लागू होने से सरकार की आय में कुछ व्यवधान आया, फिर भी किसानों से किए गए कर्ज माफी के वादे को पूरा करने की ओर कदम बढ़ाते हुए 3600 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। इस मद में बाकी बचे किसानों के लिए अगले बजट में प्रावधान करने होंगे। उन्होंने बताया कि उद्योगों के लिए 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली और घर-घर रोजगार के वादे पर भी काम शुरू कर दिया गया है।
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बोझ उतारने के लिए 20 साल तक 3200-3200 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे
Punjab Budget
- फोटो : File Photo
बोझ उतारने के लिए 20 साल तक 3200-3200 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे
क्या पंजाब सरकार नए साल में कर्ज का सहारा लेगी? इस सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार जिस तरह अपने कुछ दिनों के दौरान करोड़ों रुपये बाजार से उठाकर सूबे को कर्ज के गहरे दलदल में धकेल गई है, कैप्टन सरकार सूबे को उस हालात से उभारने में जुटी है। पिछली सरकार द्वारा प्रदेश की जनता पर डाले गए कर्ज का बोझ उतारने में 20 साल तक 3200 करोड़ रुपये वार्षिक चुकाने पड़ेंगे। इसे देखते हुए सरकार उतना पैसा ही बाजार से उठाएगी, जितनी सीमा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई है।
सीसीएल के लिए केंद्र के संपर्क में
केंद्र सरकार की ओर पंजाब के बकाया फंड, सीसीएल के 31000 करोड़ रुपये आदि की राशि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र से लगातार संपर्क बनाया हुआ है। वे खुद भी केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से बार-बार मिल रहे हैं।
पिछली बार था सीमित संसाधनों वाला बजट
बीते साल कैप्टन अमरिंदर सिंह के सत्ता संभालने के बाद पेश सरकार के पहले बजट में मनप्रीत बादल खाली खजाने के कारण कुछ नया नहीं कर सके थे। हालांकि उन्होंने सूबे पर और कर्ज का बोझ न डालते हुए सीमित संसाधनों वाला बजट पेश किया था।
क्या पंजाब सरकार नए साल में कर्ज का सहारा लेगी? इस सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार जिस तरह अपने कुछ दिनों के दौरान करोड़ों रुपये बाजार से उठाकर सूबे को कर्ज के गहरे दलदल में धकेल गई है, कैप्टन सरकार सूबे को उस हालात से उभारने में जुटी है। पिछली सरकार द्वारा प्रदेश की जनता पर डाले गए कर्ज का बोझ उतारने में 20 साल तक 3200 करोड़ रुपये वार्षिक चुकाने पड़ेंगे। इसे देखते हुए सरकार उतना पैसा ही बाजार से उठाएगी, जितनी सीमा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई है।
सीसीएल के लिए केंद्र के संपर्क में
केंद्र सरकार की ओर पंजाब के बकाया फंड, सीसीएल के 31000 करोड़ रुपये आदि की राशि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र से लगातार संपर्क बनाया हुआ है। वे खुद भी केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से बार-बार मिल रहे हैं।
पिछली बार था सीमित संसाधनों वाला बजट
बीते साल कैप्टन अमरिंदर सिंह के सत्ता संभालने के बाद पेश सरकार के पहले बजट में मनप्रीत बादल खाली खजाने के कारण कुछ नया नहीं कर सके थे। हालांकि उन्होंने सूबे पर और कर्ज का बोझ न डालते हुए सीमित संसाधनों वाला बजट पेश किया था।