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पीयू के छात्र नेताओं को नहीं रास आया शासन सुधार का प्रस्ताव

Sun, 04 Jul 2021 08:36 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 08:36 PM IST
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PU student leaders did not like the proposal of governance reform
चंडीगढ़। पीयू शासन सुधार के लिए हाल ही में सामने आई उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट छात्र नेताओं को रास नहीं आई है। उनका कहना है कि छात्र यदि सीनेट में चुनाव जीतकर आना चाहेंगे तो भी उन्हें जगह नहीं मिलेगी, क्योंकि स्नातक वर्ग की चुनाव प्रक्रिया को लगभग खत्म किया जा रहा है। इसके अलावा छात्र प्रतिनिधि का स्थान सीनेट में होना चाहिए, जिसकी बात नहीं की गई। कुछ छात्र नेताओं ने कहा है कि उन्होंने सीनेट में आरक्षण लागू करने की बात कही थी, लेकिन उस पर भी समिति ने काम नहीं किया।
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सीनेट का नया ढांचा कैसा हो, इस पर उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट चांसलर को भेज दी है जो कभी भी फाइनल हो सकती है। समिति की रिपोर्ट कुछ छात्रों को पता लगी, तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। समिति ने स्नातक वर्ग की 15 सीटों को कम करके उसमें प्रतिष्ठित पुराने छात्रों को जगह देने की बात कही है। मनोनीत सदस्यों की प्रक्रिया को भी बरकरार रखा है। इसी को लेकर छात्र नाखुश हैं। उन्होंने चांसलर से कहा है कि समिति की रिपोर्ट लागू नहीं की जाए। इस पर मंथन होना चाहिए।
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क्या कहते हैं छात्र नेता
लागू न हो समिति की रिपोर्ट
पीयू शासन सुधार समिति ने छात्रों के हित के लिए कुछ प्रावधान नहीं किए। छात्र प्रतिनिधि को सीनेट में जगह मिलनी चाहिए थी, वह भी नहीं किया गया। समिति की रिपोर्ट लागू नहीं होनी चाहिए। -संदीप कुमार, पदाधिकारी एसएफएस
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सीनेट में आरक्षण लागू नहीं किया
समिति ने पीयू शासन सुधार के लिए सुझाव मांगे थे। बड़ी संख्या में समिति से लोगों ने लिखित में मांग की थी कि सीनेट में आरक्षण लागू हो, लेकिन इसका जिक्र नहीं किया गया। चांसलर को इसके लिए पत्र लिखा है। -गुरदीप, एएसए अध्यक्ष
समिति के प्रस्ताव ठीक
पीयू शासन सुधार समिति ने अच्छा प्रस्ताव तैयार किया है। सीनेट नई चुनकर आएगी, तो बेहतर कार्य होगा। सदस्यों की संख्या कम होने से बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे। छात्र प्रतिनिधि को सीनेट में जगह मिलनी चाहिए। -हरीश गुर्जर, पूर्व अध्यक्ष एबीवीपी

बेहतर नहीं समिति की रिपोर्ट
सीनेट में पहले जितने सदस्य थे, वे भी बेहतर कार्य कर रहे थे। सदस्यों की संख्या कम होने से यह नहीं होगा कि बेहतर कार्य होगा। छात्रों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए था जो रिपोर्ट में नजर नहीं आ रहा है। -निखिल नरमेटा, अध्यक्ष एनएसयूआई
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