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बठिंडा शहरी सीट का हाल: हिंदू चेहरे की तलाश में सभी प्रमुख दल, चरम पर गुटबाजी बड़ी चुनाैती
Thu, 03 Sep 2026 12:06 PM IST
Nivedita
भारत भूषण, संवाद, बठिंडा
भारत भूषण, संवाद, बठिंडा
Published by: Nivedita
Updated Thu, 03 Sep 2026 12:06 PM IST
सार
बठिंडा शहरी सीट पर ऐतिहासिक रूप से हिंदू वोट बैंक का दबदबा रहा है, हालांकि पिछले दो विधानसभा चुनावों में सिख चेहरों ने जीत दर्ज की। भाजपा अब इस सीट पर आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किसी बड़े हिंदू चेहरे को उतारने की तैयारी में है।
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बठिंडा शहरी सीट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मालवा क्षेत्र की बठिंडा शहरी सीट समेत जिले की छह विधानसभा सीटों पर प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए आपसी गुटबाजी एक बड़ी चुनौती बन गई है। शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा इन सीटों पर मजबूत दावेदार की तलाश में हैं।
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मौजूदा समय में सभी दलों में आंतरिक धड़ेबंदी चरम पर है जिससे मतदाता असमंजस में हैं। यह स्थिति आगामी चुनावों के मद्देनजर दलों के लिए चिंता का विषय है।
आम आदमी पार्टी के शहरी विधायक जगरूप सिंह गिल और पार्टी नेता पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत मेहता के बीच बड़े स्तर पर विवाद चल रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बठिंडा दौरे के दौरान यह गुटबाजी सामने आ सकती है। कांग्रेस में भी अंदरूनी कलह जारी है, जहां शहरी अध्यक्ष राजन गर्ग नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में विफल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप कुछ नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हो गए हैं।
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शिरोमणि अकाली दल के पारंपरिक नेता भी मौजूदा शहरी अध्यक्ष को लेकर पार्टी आलाकमान के सामने अपनी बात रख चुके हैं लेकिन दल अभी तक उभर नहीं पा रहा है। भाजपा में भी पूर्व विधायक सरूप चंद सिंगला और मनप्रीत बादल के धड़ों के बीच गुटबाजी तेज हो गई है।
बठिंडा शहरी सीट के इतिहास को देखें तो यहां सबसे ज्यादा चुनाव हिंदू चेहरे ने ही जीते हैं। भाजपा समेत सभी प्रमुख दल अब आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बड़े हिंदू चेहरों की तलाश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा किसी बाहरी हिंदू चेहरे को चुनाव मैदान में उतार सकती है। वर्तमान में बठिंडा जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का नियंत्रण है। हालांकि, मौजूदा चुनावी माहौल को देखते हुए आप का जनाधार गिरता दिख रहा है, जिससे पार्टी आलाकमान चिंतित है।
मतदाताओं में असमंजस
बठिंडा शहरी सीट पर सभी दलों में आपसी गुटबाजी जोरों पर है। इस कारण कोई भी नेता मतदाताओं का पूरा विश्वास नहीं जीत पा रहा है। आप के शहरी विधायक जगरूप सिंह गिल और नेता अमरजीत मेहता के बीच बड़ा विवाद चल रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के आगामी दौरे पर यह आंतरिक कलह उजागर हो सकती है। इससे शहरी मतदाता असमंजस में हैं कि वे किस दल का समर्थन करें। कांग्रेस के शहरी अध्यक्ष राजन गर्ग भी पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट नहीं कर पाए हैं।
बठिंडा शहरी सीट के इतिहास को देखें तो यहां सबसे ज्यादा चुनाव हिंदू चेहरे ने ही जीते हैं। भाजपा समेत सभी प्रमुख दल अब आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बड़े हिंदू चेहरों की तलाश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा किसी बाहरी हिंदू चेहरे को चुनाव मैदान में उतार सकती है। वर्तमान में बठिंडा जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का नियंत्रण है। हालांकि, मौजूदा चुनावी माहौल को देखते हुए आप का जनाधार गिरता दिख रहा है, जिससे पार्टी आलाकमान चिंतित है।
मतदाताओं में असमंजस
बठिंडा शहरी सीट पर सभी दलों में आपसी गुटबाजी जोरों पर है। इस कारण कोई भी नेता मतदाताओं का पूरा विश्वास नहीं जीत पा रहा है। आप के शहरी विधायक जगरूप सिंह गिल और नेता अमरजीत मेहता के बीच बड़ा विवाद चल रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के आगामी दौरे पर यह आंतरिक कलह उजागर हो सकती है। इससे शहरी मतदाता असमंजस में हैं कि वे किस दल का समर्थन करें। कांग्रेस के शहरी अध्यक्ष राजन गर्ग भी पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट नहीं कर पाए हैं।
सिंगला और मनप्रीत बादल के बीच गुटबाजी
कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के साथ-साथ भाजपा में भी अंदरूनी धड़ेबंदी चल रही है। शिरोमणि अकाली दल के पारंपरिक नेता मौजूदा शहरी अध्यक्ष को लेकर पार्टी आलाकमान के सामने अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। कांग्रेस में राजन गर्ग की असफलता के कारण कुछ कार्यकर्ता आप में चले गए हैं। भाजपा में पूर्व विधायक सरूप चंद सिंगला और मनप्रीत बादल के बीच गुटबाजी तेज हो गई है। मनप्रीत बादल को भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद यह स्थिति और गंभीर हुई है। चुनाव नजदीक आने के साथ यह आपसी धड़ेबंदी सभी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
बदलते चुनावी समीकरण
बठिंडा शहरी सीट पर ऐतिहासिक रूप से हिंदू वोट बैंक का दबदबा रहा है, हालांकि पिछले दो विधानसभा चुनावों में सिख चेहरों ने जीत दर्ज की। शहर के निवासी इन नेताओं से अपेक्षित कार्य नहीं करवा पाए। भाजपा अब इस सीट पर आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किसी बड़े हिंदू चेहरे को उतारने की तैयारी में है, जिसमें बाहरी उम्मीदवार भी शामिल हो सकते हैं।
वर्तमान में जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का नियंत्रण है, लेकिन उसका जनाधार गिरता दिख रहा है। पंचायत चुनावों में शिरोमणि अकाली दल का पलड़ा भारी रहा, जिससे उसे थोड़ी संजीवनी मिली है। मौजूदा सांसद हरसिमरत कौर बादल की गतिविधियों में कमी आने से स्थानीय शिअद कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के साथ-साथ भाजपा में भी अंदरूनी धड़ेबंदी चल रही है। शिरोमणि अकाली दल के पारंपरिक नेता मौजूदा शहरी अध्यक्ष को लेकर पार्टी आलाकमान के सामने अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। कांग्रेस में राजन गर्ग की असफलता के कारण कुछ कार्यकर्ता आप में चले गए हैं। भाजपा में पूर्व विधायक सरूप चंद सिंगला और मनप्रीत बादल के बीच गुटबाजी तेज हो गई है। मनप्रीत बादल को भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद यह स्थिति और गंभीर हुई है। चुनाव नजदीक आने के साथ यह आपसी धड़ेबंदी सभी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
बदलते चुनावी समीकरण
बठिंडा शहरी सीट पर ऐतिहासिक रूप से हिंदू वोट बैंक का दबदबा रहा है, हालांकि पिछले दो विधानसभा चुनावों में सिख चेहरों ने जीत दर्ज की। शहर के निवासी इन नेताओं से अपेक्षित कार्य नहीं करवा पाए। भाजपा अब इस सीट पर आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किसी बड़े हिंदू चेहरे को उतारने की तैयारी में है, जिसमें बाहरी उम्मीदवार भी शामिल हो सकते हैं।
वर्तमान में जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का नियंत्रण है, लेकिन उसका जनाधार गिरता दिख रहा है। पंचायत चुनावों में शिरोमणि अकाली दल का पलड़ा भारी रहा, जिससे उसे थोड़ी संजीवनी मिली है। मौजूदा सांसद हरसिमरत कौर बादल की गतिविधियों में कमी आने से स्थानीय शिअद कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।