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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Haryana Bank Scam ₹504 Crore Fraud Case, ₹20 Crore Gold Seized Accused Including Six IAS Officers

बैंक घोटाला कुल 504 करोड़ का: 20 करोड़ का सोना बरामद, इन आठ विभागों और दो बैंक से जुड़े 19 आरोपी; छह आईएएस भी

Thu, 03 Sep 2026 10:14 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/पंचकूला
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/पंचकूला Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 03 Sep 2026 10:14 AM IST
सार

हरियाणा के विभिन्न विभागों और संस्थाओं के 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह आईएएस समेत 19 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल गई है। 20 करोड़ का सोना बरामद किया गया है। सीबीआई ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इसमें गिरफ्तार नहीं होने वाले तीन आईएएस के नाम भी पहली बार सामने आए हैं।

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Haryana Bank Scam ₹504 Crore Fraud Case, ₹20 Crore Gold Seized Accused Including Six IAS Officers
Haryana Bank Scam - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

हरियाणा के विभिन्न विभागों और संस्थाओं के 504 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को पंचकूला की विशेष अदालत में 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की। 
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इनमें हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक अधिकारी और हरियाणा सरकार के नौ अन्य अधिकारी शामिल हैं। जांच के दौरान सीबीआई करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत अन्य साक्ष्य जब्त कर चुकी है। 
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एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन को नियमों को दरकिनार कर कुछ बैंक शाखाओं में स्थानांतरित किया गया और कई खातों में घुमाने के बाद नकदी में बदला गया। सीबीआई ने दावा किया कि कुल 504 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है।
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सीबीआई ने पहली बार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में 1991 बैच के विनीत गर्ग, 2000 बैच के पंकज अग्रवाल, 2002 बैच के मोहम्मद शाईन, 2005 बैच के साकेत कुमार, 2011 बैच के प्रदीप कुमार और 2012 बैच के राम कुमार सिंह के नाम हैं। सीबीआई इनमें से राम कुमार सिंह को 18 जून, पंकज अग्रवाल को 22 जून और प्रदीप कुमार को 1 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था।

सीबीआई की जांच के अनुसार आरोपी सरकारी अधिकारियों ने दोनों बैंकों के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर सरकारी धन की हेराफेरी की। हरियाणा सरकार के आठ विभागों का अधिकृत बैंकों में रखा धन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की कुछ शाखाओं में स्थानांतरित किया गया। 

 

जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके लिए ऐसे खाते खुलवाए गए, जिनमें हरियाणा वित्त विभाग की वित्तीय सावधानी और धोखाधड़ी रोकने संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ। 

 

सीबीआई के अनुसार इन खातों में पहुंची सरकारी रकम ऐसे तीसरे पक्षों को भेजी गई, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था। इसके बाद रकम कई बैंक खातों में स्थानांतरित की गई और नकदी में बदल दी गई। 

सरकार केस चलाने की केंद्र से लेगी मंजूरी
हरियाणा सरकार छह आईएएस अधिकारियों के खिलाफ केस चलाने की केंद्र से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी मांगेगी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर भ्रष्टाचार या रिश्वत के मामले में अदालत में मुकदमा शुरू करने से पहले सरकार या संबंधित विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है। राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार अभी सरकार ने केंद्र को आवेदन नहीं भेजा है। आवेदन पर केंद्र सरकार का डीओपीटी विभाग निर्णय लेगा।

इन आठ विभागों व दो बैंक से जुड़े हैं सभी 19 आरोपी
  • हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) : आईएएस मोहम्मद शाईन के अलावा दीप्ति कौशिक और राजेश गोयल।
  • विकास एवं पंचायत विभाग : आईएएस डॉ. साकेत कुमार व कर्मी प्रिंस शर्मा।
  • हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड : आईएएस प्रदीप कुमार और आईएएस विनीत गर्ग, अन्य अधिकारी साैरव कुमार व परवीन कुमार।
  • पंचकूला व कालका नगर निगम : आईएएस राम कुमार सिंह व सुरेंद्र जैन।
  • हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) व हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) : आईएएस पंकज अग्रवाल हैं।
  • हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड : सुरिंदर कौर, अमित कुमार (क्लर्क) और जुगल किशोर (एओ) आरोपी हैं।
  • आईडीएफसी फर्स्ट बैंक : शमीम अहमद डार, सुधा गोयल और कुलदीप सिंह
  • एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक : चरनजीत सिंह रंधावा का नाम है।


 

अब तक 37 आरोपियों पर चार्जशीट, 26 गिरफ्तार, 54 जगहों पर ली तलाशी
तीसरी चार्जशीट से पहले मामले में 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी। इनमें दोनों बैंकों के अधिकारी, हरियाणा सरकार के कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियां शामिल हैं। नई चार्जशीट के बाद अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। जांच के दौरान सीबीआई ने 54 स्थानों पर तलाशी ली। अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

तीन आईएएस अधिकारी सरकार में हैं तैनात
चार्जशीट में हरियाणा के तीन आईएएस अधिकारियों विनीत गर्ग, साकेत कुमार और मोहम्मद शाईन भी शामिल हैं। तीनों अधिकारी फिलहाल हरियाणा सरकार में तैनात हैं। घोटाले का खुलासा होने पर तीनों को प्रभावशाली पद से हटाकर अपेक्षाकृत कम चर्चित विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। 1991 बैच के आईएएस विनीत गर्ग वर्तमान में प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, 2002 बैच के आईएएस मो. शाईन हाउसिंग फॉर ऑल विभाग के आयुक्त के पद पर तैनात हैं जबकि 2005 बैच के आईएएस साकेत कुमार अभिलेखागार विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर तैनात हैं।

 

क्या हैं तीनों पर आरोप
तीनों आईएएस अधिकारियों पर नियमों के खिलाफ बैंक खाते खुलवाने का आरोप है। इनमें से दो अधिकारियों ने अपने विभागों को बैंकों में पैसे जमा कराने के निर्देश भी दिए थे। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि ये लोग बैंक घोटाले के आरोपियों के संपर्क में थे।

 

गिरफ्तार तीनों आईएएस पर ये हैं आरोप
राम कुमार सिंह : 79.46 करोड़ की हेराफेरी

राम कुमार सिंह उस अवधि में पंचकूला नगर निगम के आयुक्त थे, जब निगम के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ स्थित खाते से करीब 79.46 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई। सीबीआई के अनुसार यह खाता हरियाणा वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए खोला गया था। खाता खोलने के दस्तावेजों में ऐसी जानकारी दर्ज की गई, जिससे बाद में होने वाले कथित फर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके।

 

पंकज अग्रवाल से जुड़े खातों में 60.54 करोड़ की जांच
पंकज अग्रवाल की भूमिका हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के खातों से जुड़े मामले में सामने आई। वह उस समय स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के प्रधान सचिव थे, जब इन संस्थाओं के खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में खोले गए। सीबीआई के अनुसार खातों को खोलने में वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि दोनों संस्थाओं से जुड़े खातों से करीब 60.54 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई।
 

प्रदीप कुमार पर प्रदूषण बोर्ड के फंड से जुड़ी भूमिका का आरोप
प्रदीप कुमार उस समय हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे, जब बोर्ड से संबंधित सरकारी धन की कथित हेराफेरी हुई। सीबीआई के अनुसार उनकी भूमिका एचएसपीसीबी के उन सरकारी खातों और लेनदेन से जुड़ी जांच का हिस्सा है, जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा के माध्यम से कथित वित्तीय अनियमितताएं हुईं।
 

सभी मामलों की जांच सीबीआई ही कर रही
मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली। इसके अलावा चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य मामलों की जांच भी सीबीआई ने संभाली है। एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम चंडीगढ़ तथा दूसरा चंडीगढ़ अक्षय ऊर्जा एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन सोसायटी से संबंधित है। दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
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