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महंगाई की मार: चंडीगढ़ में अन्नपूर्णा अक्षय पात्र योजना के तहत दिए जाने वाले खाने का दाम हुआ दोगुना

Thu, 14 Apr 2022 04:44 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 14 Apr 2022 04:44 PM IST
सार

रेडक्रॉस की तरफ से वर्तमान में रोजाना खाने के 1700 से 1800 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिन्हें गाड़ियों में भरकर शहर के अलग-अलग इलाकों में ले जाकर बेचा जाता है।

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Price of Food given under Annapurna Akshaya Patra Yojana increased in Chandigarh 
चंडीगढ़ में अन्नपूर्णा अक्षय पात्र योजना के तहत खाना हुआ महंगा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महंगाई की मार 10 रुपये में मिलने वाले खाने पर भी पड़ गई है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इसका दाम बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया है। ये खाना यूटी प्रशासन और रेडक्रॉस के सहयोग से अन्नपूर्णा अक्षय पात्र योजना के तहत दिया जाता है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ इस योजना को चलाना मुश्किल हो रहा था, इसलिए दाम बढ़ाना पड़ा। 20 रुपये में 6 रोटी, एक सब्जी और अचार दिया जाता है।

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रेडक्रॉस की तरफ से वर्तमान में रोजाना खाने के 1700 से 1800 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिन्हें गाड़ियों में भरकर शहर के अलग-अलग इलाकों में ले जाकर बेचा जाता है। दो जनवरी 2017 को पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने अन्नपूर्णा अक्षय पात्र योजना की शुरुआत की थी। नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के अधिकारी ने बताया कि रेडक्रॉस की तरफ से वर्तमान में पांच गाड़ियां चल रही हैं। ये पीजीआई, रेलवे स्टेशन, जीएमसीएच-32, इंडस्ट्रियल एरिया, राम दरबार व अन्य इलाकों की मार्केट में जाती हैं। हालांकि जहां लगता है कि खाने की मांग नहीं है, तो गाड़ी अन्य जगह चली जाती है। बीते कुछ हफ्तों में पेट्रोल-डीजल व अन्य सामानों के दाम में काफी बढ़ोतरी हुई है इसलिए इस प्रोजेक्ट को चलाने की लागत काफी बढ़ गई है। महंगाई भी काफी ज्यादा हो गई है, इसलिए प्रोजेक्ट को जारी रखने के लिए दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया है। हालांकि अब भी दाम मार्केट से काफी कम है।   

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ज्यादातर दिहाड़ीदार मजदूर खरीदते हैं ये खाना
अन्नपूर्णा अक्षय पात्र योजना में बिकने वाला खाना ज्यादातर शहर के दिहाड़ीदार मजदूर खरीदते थे, क्योंकि ये सस्ता होता है। रेडक्रॉस को भी ये मालूम है, इसलिए उनकी गाड़ी शहर के अस्पतालों के अलावा इंडस्ट्रियल एरिया, ट्रांसपोर्ट एरिया और लेबर चौक के पास खड़ी होती है। ये योजना लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाने के लिए शुरू की गई थी। वर्ष 2017 में जब ये योजना शुरू की गई थी, उस समय 10 रुपये के खाने के पैकेट को बनाने में करीब 15 रुपये खर्च होते थे। हालांकि महंगाई बढ़ने के साथ इस योजना की लागत बढ़ती जा रही है। रेडक्रॉस की तरफ से योजना को जारी रखने के लिए ही खतरा नहीं होता है।  -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच 32

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