जहरीली शराब: मामले की सीबीआई जांच की मांग, जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई करेगी हाईकोर्ट

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Aug 2020 10:56 AM IST
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सार

  • सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को जस्टिस अलका सरीन ने चीफ जस्टिस को किया रेफर
  • पंजाब के दो पूर्व विधायकों की ओर से सीबीआई जांच के लिए दाखिल की गई थी याचिका

विस्तार

पंजाब के तीन जिलों में जहरीली शराब पीने से 118 लोगों की मौत मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दो पूर्व विधायकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस याचिका पर सोमवार को जस्टिस अलका सरीन ने सुनवाई करते हुए कहा कि यह व्यापक जनहित से जुड़ा मामला है, ऐसे में इस याचिका पर जनहित याचिका के तौर पर ही सुनवाई की जा सकती है।
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जस्टिस सरीन ने यह याचिका जनहित याचिका के तौर पर सुने जाने के लिए इसे चीफ जस्टिस की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया है। इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग को लेकर किला रायपुर के पूर्व विधायक तरसेम जोधां और बलाचौर के पूर्व विधायक हरगोपाल सिंह ने एडवोकेट बलतेज सिद्धू के जरिये उच्च न्यायालय में दायर याचिका में बताया है कि अवैध शराब के बनाने और तस्करी के मामले दो वर्षों से सामने आते रहे हैं, लेकिन पुलिस इन पर कभी भी सख्त कार्रवाई नहीं की है।
याचिकाकर्ता ने एसएएस नगर के लालडू में 14 नवंबर 2018 और 17 मई 2019 सहित लुधियाना के जोधां पुलिस थाने में 13 फरवरी 2020, खन्ना में 22 अप्रैल 2020 और फिर पटियाला के शम्भू में 14 मई 2020 में ऐसे ही मामले में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए कहा है कि इन मामलों से साफ़ है कि दो वर्षों से यह कारोबार चल रहा है, जिस पर लगाम लगाए जाने की कभी सख्ती से कोशिश ही नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय को बताया कि इस पूरे मामले में कई बड़े रसूखदार शामिल हैं, तभी पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है।
यहां तक कि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के दो बड़े नेता प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो राज्यपाल से मिलकर इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं। दोनों याचिकाकर्ताओं ने भी 7 अगस्त को पंजाब के मुख्य सचिव व अन्य को लीगल नोटिस भेज इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन मुख्य सचिव ने इसे आगे एक्साइज कमिश्नर को भेजते हुए इस पर उचित कार्रवाई के आदेश दे दिए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह तो राज्य का आम नागरिक भी जनता है कि इस गंभीर मामले की एक्साइज कमिश्नर जांच नहीं कर सकता, लिहाजा इस मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरुरी है जो सिर्फ सीबीआई कर सकती है। अब इस याचिका पर चीफ जस्टिस की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
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