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Chandigarh News: कनाडा में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा पर लगाया फलीस्तीन का झंडा
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। कनाडा के पंजाबी बहुसंख्यक इलाके ब्रैम्पटन में कुछ फलस्तीन समर्थक उपद्रवियों ने महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान फलस्तीन का झंडा तक लगा दिया, जिससे पंजाबी मूल के लोगों में रोष है। इसका वीडियो वायरल हो रहा है, जो 37 सेकेंड का है। इसमें महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा पर चढ़े 2 युवक फलस्तीन का झंडा उनके घोड़े पर लगा रहे हैं। दोनों युवकों ने अपने मुंह ढके हुए थे और नीचे कई व्यक्ति खड़े थे। साथ ही एक व्यक्ति महाराजा रणजीत सिंह के घोड़े पर कपड़ा बांधता हुआ नजर आ रहा था।
महाराजा रणजीत सिंह भारतीय और सिख इतिहास का बड़ा चेहरा हैं। महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर, 1780 को पंजाब के गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में हुआ। जब महाराजा रणजीत सिंह सिर्फ 10 साल के थे, तो उन्होंने पहला युद्ध लड़ा था। मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने राजगद्दी संभाली और 18 साल की उम्र में लाहौर को फतेह कर लिया था। 40 वर्षों के शासनकाल में उन्होंने अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के आसपास भी फटकने नहीं दिया। पिछले दिनों ब्रैम्पटन में गौरीशंकर मंदिर को निशाना बनाकर हिन्दुस्तान विरोधी नारे लिखे गए थे। रिचमंड के विष्णु मंदिर और फिर स्वामीनारायण मंदिर में भारत विरोधी नारे लिखे जाने की घटनाएं हुई थीं।
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जालंधर। कनाडा के पंजाबी बहुसंख्यक इलाके ब्रैम्पटन में कुछ फलस्तीन समर्थक उपद्रवियों ने महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान फलस्तीन का झंडा तक लगा दिया, जिससे पंजाबी मूल के लोगों में रोष है। इसका वीडियो वायरल हो रहा है, जो 37 सेकेंड का है। इसमें महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा पर चढ़े 2 युवक फलस्तीन का झंडा उनके घोड़े पर लगा रहे हैं। दोनों युवकों ने अपने मुंह ढके हुए थे और नीचे कई व्यक्ति खड़े थे। साथ ही एक व्यक्ति महाराजा रणजीत सिंह के घोड़े पर कपड़ा बांधता हुआ नजर आ रहा था।
महाराजा रणजीत सिंह भारतीय और सिख इतिहास का बड़ा चेहरा हैं। महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर, 1780 को पंजाब के गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में हुआ। जब महाराजा रणजीत सिंह सिर्फ 10 साल के थे, तो उन्होंने पहला युद्ध लड़ा था। मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने राजगद्दी संभाली और 18 साल की उम्र में लाहौर को फतेह कर लिया था। 40 वर्षों के शासनकाल में उन्होंने अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के आसपास भी फटकने नहीं दिया। पिछले दिनों ब्रैम्पटन में गौरीशंकर मंदिर को निशाना बनाकर हिन्दुस्तान विरोधी नारे लिखे गए थे। रिचमंड के विष्णु मंदिर और फिर स्वामीनारायण मंदिर में भारत विरोधी नारे लिखे जाने की घटनाएं हुई थीं।
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