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Hindi News ›   Chandigarh ›   Padmashree Dr. Surjeet Patar spoke on Martial Poetry at Military Lit Fest

Chandigarh: मिलिट्री लिट फेस्ट में बोले डॉ. सुरजीत पातर, जंग चाहे लड़ें या थोपी जाए, इसमें दोनों को नुकसान

Sun, 03 Dec 2023 12:11 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 03 Dec 2023 12:11 AM IST
सार

मिलिट्री लिट फेस्ट में पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर ने मार्शल पोएट्री पर बात की। उन्होंने कहा कि पंजाब का नाम पांच दरिया से आया है। इस पर बहुत मान है। पंजाबी आजकल उदास और शर्मिंदा हैं।

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Padmashree Dr. Surjeet Patar spoke on Martial Poetry at Military Lit Fest
डॉ. सुरजीत पातर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जंग चाहे लड़ें या थोपी जाए, इसमें दोनों को नुकसान है। युद्ध समस्या का हल नहीं है। यह बात लेक क्लब में शनिवार को मिलिट्री लिट फेस्ट में पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर ने कहीं। उन्होंने कहा कि शूरवीरता साझा गुण है। पंजाबी दरबारी बोली नहीं है। पंजाब सरहदी इलाका है। मध्य एशिया से व्यापारी और आक्रांता आए। पंजाब ने बहुत हमला झेला है।

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उन्होंने कहा कि पंजाब का नाम पांच दरिया से आया है। इस पर बहुत मान है। पंजाबी आजकल उदास और शर्मिंदा हैं। दरिया को भी बांट दिया, लेकिन पांच दरिया अब भी हैं। अब वाणी, सूफी, प्रीत, लोक कविता समेत शूरवीरों और योद्धाओं का दरिया है, जिसमें पंजाब जिंदा है। वाणी का दरिया बड़ा है। इतिहास धरती पैदा करती है। यह भूगोल को बदलती है।
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उन्होंने कहा कि बाबर के हमले के समय बाबा नानक ने कविता कहीं। इसमें जंग के दुख के भी जिक्र हैं। जिनके पति, पिता, पुत्र वापस नहीं आए उनका जीवन कैसा है। उन्होंने कहा कि मन जीते जगजीत। दुनिया को मानना पड़ेगा कि युद्ध समस्या का हल नहीं है।
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उन्होंने कहा कि गुरु हरगोबिंद सिंह जी महाराज के समय मार्शल पोएट्री शुरू होने का समय है। उस समय तेग और रबाब दोनों की जरूरत पड़ी। तेग रबाब की रक्षा के लिए है। जंग हमेशा थोपी जाती है। उन्होंने चंडी दी वार का भी जिक्र किया। सोशल मीडिया पर कविता के स्तर को लेकर पूछे गए एक सवाल पर पातर ने कहा कि माता-पिता और शिक्षण संस्थाओं को इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने तराना में कविता मैं तुरदां हां पेश किया, जिसका दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया।

डॉ. तेजिंदर सिंह ने मार्शल पोएट्री पर जिक्र करते हुए इसकी विरासत के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईसा से 1500 से दो हजार साल पहले हड़प्पा में मां परिवार की मुखिया थी। आर्यन के समय पिता परिवार का प्रधान हुआ। महाभारत के लेखक भी पंजाब के थे। पाणिनी भी पंजाब से थे। वेदों के रचनाकार भी पंजाब के थे। जब हमारे ऊपर हमले हुए तो काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि 28 से 31 कौम पंजाब में आईं और बस गईं। उन पर हमले हुए और उजड़ गए। पंजाब पर लगातार हमले होते रहे। इस वक्त भी कई देशों में जंग चल रही है।


उन्होंने कहा कि पंजाब की संस्कृति किसानी है। दोआबा में आज भी तेंदुए का हमला होता है। आज से दो हजार साल पहले किसानी कितनी कठिन होती कल्पना कीजिए। उस समय जीवन कितना कठिन था। जब उनसे कोई जमीन छीनना चाहता है तो वे बहुत जोर से लड़ते थे। कर्नल जगजीत सिंह गिल ने मार्शल पोएट्री पर चर्चा की। उन्होंने जफरनामा का जिक्र किया। डॉ. जेएस चीमा ने सत्र का संचालन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंजाबियों ने जुर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी है।

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