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लोगों को बड़ी राहत, अब एक बार में कर सकेंगे पानी के बिल का भुगतान, छूट भी मिलेगी

Tue, 01 Sep 2020 01:55 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 01 Sep 2020 01:55 AM IST
सार

  • सदन की बैठक में वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को मिली हरी झंडी
  • निगम के नोटिफिकेशन के बाद तीन माह का दिया जाएगा समय

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One time settlement policy gets green signal in the municipal Corporation meeting
नगर निगम की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब लोग पानी के बिलों का भुगतान छूट के साथ एकमुश्त राशि में कर अपने विवादों को सुलझा सकेंगे। नगर निगम सदन की सोमवार को हुई बैठक में वन टाइम सेटलमेंट एजेंडा को मंजूरी दे दी है। निगम एक नोटिफिकेशन करेगा। उसके बाद तीन माह का समय दिया जाएगा। इस दौरान लोग अपने भुगतान की किश्त भी बनवा सकेंगे। किश्तों के अनुसार ही लोगों को छूट मिलेगी। 

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वहीं निगम को भी अच्छा खासा रेवेन्यू मिल सकेगा। अधिकारियों के अनुसार बिजली के बिलों का लगभग 41.06 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें 280552734 घरेलू, 17015477 इंडस्ट्रीज, 72975708 व्यावसायिक, 45467885 सरकारी विभागों पर बकाया है। इसमें कुछ बिल ऐसे भी हैं, जहां कनेक्शन तो खत्म हो गया है लेकिन बिल अभी भी जा रहा है। 
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निगम ने तय किया है वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत इस राशि को निकाला जा सके ताकि निगम को कुछ रेवेन्यू आ सके। एक किश्त में पूरा भुगतान करने पर 10 प्रतिशत, दो किश्त में पूरा भुगतान करने पर 7 प्रतिशत व तीन किश्त में पूरा भुगतान करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

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निगम को हर साल 82 करोड़ का घाटा

एक रिपोर्ट के अनुसार निगम को हर साल पानी सप्लाई में 82 करोड़ का घाटा हो रहा है। वर्ष 2017-18 में नगर निगम ने पानी पर 160.63 करोड़ रुपये खर्च किए थे जबकि पानी से नगर निगम को मात्र 78.74 करोड़ रुपये का ही रेवेन्यू मिला। इसके पूरे मामले की जांच की गई थी जिसमें यह बड़ा घाटा सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार 24 मई 2011 में अंतिम बार पानी के रेट में संशोधन किया गया था। उसके बाद से पानी के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया जबकि मोहाली, पंचकूला और दिल्ली से चंडीगढ़ की तुलना की जाए तो यहां पानी के रेट काफी कम हैं।

आठ साल में लगभग 500 करोड़ का घाटा
पानी के रेट न बढ़ने से आठ साल में पानी पर नगर निगम को लगभग 500 करोड़ का घाटा हुआ है। लगातार घाटा बढ़ने के बाद एक जांच कमेटी बनाई गई थी। इसमें बताया गया है कि पानी लीकेज, कर्मचारियों की सैलरी, पाइपों का मेंटेनेंस लेकर अन्य कार्यों में लगातार खर्चा तो बढ़ता गया लेकिन उतनी ही तेजी से रेवेन्यू नहीं बढ़ा।

कोरोना के कारण नहीं बढ़ सके पानी के दाम
वर्तमान में शहर में 1 से 15 किलोलीटर तक पानी के रेट 2 रुपये प्रति लीटर, 16 से 30 किलोलीटर तक पानी के रेट 4 रुपये प्रति लीटर, 31 से 60 किलोलीटर तक पानी के रेट 6 रुपये प्रति लीटर है। हाल ही निगम सदन की बैठक में पानी के दाम बढ़ाने का एजेंडा लेकर आया था। विवादों के बाद एजेंडा पास हुआ और अंतिम नोटिफिकेशन तक पहुंच गया था लेकिन कोरोना के कारण पानी का दाम नहीं बढ़ सका था।

बजट में कटौती न करने के लिए प्रशासन से अपील करेगा निगम

सदन की बैठक शुरू होते ही वित्तीय समस्या को लेकर बहस शुरू हो गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि निगम केवल जनता पर टैक्स लगा रहा है। उसके बाद मेयर राजबाला मलिक से सहमति के बाद कमिश्नर केके यादव ने कहा कि निगम प्रशासन के सामने बजट में कटौती न करने का प्रस्ताव रखेगा, क्योंकि निगम के पास फंड नहीं है। बिना फंड के शहर में विकास कार्य करना संभव नहीं हो पा रहा है।

ज्ञात हो कि इस वित्तीय वर्ष में नगर निगम के लिए प्रशासन ने 425 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था। कोरोना के कारण वित्तीय बजट में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिसके बाद निगम के पास 340 करोड़ का ही बजट बचा रह गया। प्रशासन की ओर से अप्रैल व मई के लिए 35 करोड़ रुपये जबकि जून के लिए 34 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।

अब जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए 340 करोड़ रुपये के हिसाब से 30-30 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए थे। एक ओर बजट घटने और दूसरी ओर रेवेन्यू घटने से निगम को अपने कर्मचारियों को सैलरी देना भी कठिन हो गया है। इसलिए सदन ने बजट में कटौती न करने का प्रस्ताव रखा है।
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