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प्रधान सचिव की व्हाट्सएप पर डीपी लगाकर एसपी से ठगे एक लाख रुपये

Fri, 20 May 2022 01:39 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 20 May 2022 01:39 AM IST
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One lakh rupees cheated from SP by putting DP of Principal Secretary to Administrator
चंडीगढ़। प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित के प्रधान सचिव जेएम बालामुरुगन की फोटो व्हाट्सएप डीपी (डिस्प्ले पिक्चर) पर लगाकर शातिरों ने एसपी जसदेव सिंह से एक लाख रुपये ठग लिए। मोहाली निवासी एसपी जसदेव सिंह प्रशासक पुरोहित की सुरक्षा दस्ते के प्रभारी हैं। डीपी देखकर वह शातिरों के झांसे में आ गए और उन्हें अमेजन कंपनी के ई-वाउचर खरीदकर दे दिए। बाद में ठगी की जानकारी होने पर उन्होंने सेक्टर-26 थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। फिलहाल साइबर सेल मामले की जांच में जुट गई है।
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पीड़ित एसपी जसदेव सिंह ने आईजी चंडीगढ़ को दी शिकायत में बताया है कि उन्हें बीते मंगलवार को एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से हैलो का मैसेज आया। व्हाट्सएप नंबर पर प्रशासक के प्रधान सचिव जेएम बालामुरुगन की डीपी लगी थी और नाम लिखा था। एसपी ने नंबर पर कॉल किया तो शातिर ने फोन काट कर मैसेज भेजा कि वह किसी जरूरी मीटिंग में व्यस्त है। कॉल नहीं उठा सकता। इसके बाद मैसेज किया कि उसे दस-दस हजार के अमेजन के 10 ई-वाउचर चाहिए।
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जसदेव सिंह ने व्हाट्सएप डीपी देखकर एक लाख रुपये के अमेजन कंपनी से 10 ई-वाउचर खरीदे और उन्हें भेज दिया। इसके बाद आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर दिया। बाद में ई-वाउचर के बारे में पूछने के लिए जब जसदेव सिंह ने जेएम बालामुरुगन से बात की तो खुलासा हुआ कि उन्होंने उनसे कोई वाउचर नहीं मांगे। जांच में पता चला कि जिस समय जसदेव सिंह के साथ ठगी हुई तब वह सेक्टर-26 में थे। शिकायत के बाद बुधवार को सेक्टर-26 थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।
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पीजीआई डायरेक्टर की डीपी लगाकर सेवानिवृत्त डॉक्टर से ठगी की कोशिश
इसी तरह दूसरे मामले में एक सेवानिवृत्त डॉक्टर से पीजीआई के डायरेक्टर विवेक लाल की व्हाट्सएप डीपी लगाकर ठगी का प्रयास किया गया। हालांकि डॉक्टर अपनी सतर्कता के चलते ठगी का शिकार होने से बच गए। पंचकूला स्थित एमडीसी सेक्टर-4 निवासी पीजीआई के सेवानिवृत्त डॉ. आमोद गुप्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्हें एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि वह पीजीआई के डायरेक्टर विवेक लाल हैं। डॉ. आमोद ने डीपी देखी तो उसमें डॉ. विवेक लाल की फोटो के साथ उनका नाम लिखा था। शातिर ने डॉ. आमोद से भी अमेजन कंपनी के ई-वाउचर मांगे। हालांकि डॉ. आमोद शातिर की चाल समझ गए और समझदारी दिखाते हुए उस नंबर को ब्लॉक कर दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। मामले में सेक्टर-11 थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
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पीजीआई डायरेक्टर ने जारी किया सर्कुलर, साइबर सेल में दी शिकायत
इस पूरे मामले में पीजीआई के डायरेक्टर विवेक लाल ने बताया कि उनकी फोटो लगाकर तीन सेवानिवृत्त डॉक्टरों को मैसेज किया गया था और उनसे अमेजन के गिफ्ट वाउचर मांगे गए। तीनों ने सतर्कता दिखाते हुए मुझे सूचना दी। इसके बाद मैंने साइबर सेल को सूचित किया। सभी फैकल्टी सदस्यों को मेल कर इस बारे में सूचित किया, साथ ही ऐसे किसी भी मैसेज पर जवाब न देने को कहा। डॉ. विवेक लाल ने बताया कि यह नंबर ट्रूू कॉलर पर किसी निशा नाम से था, जांच करने पर पता चला कि यह किसी लड़के का नंबर था।

प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजा था मैसेज
जेएम बालामुरुगन की डीपी वाले नंबर से प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी मैसेज भेजा गया था। इनमें प्रशासन ने सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा शातिरों ने कई विभागों के निदेशकों को भी मैसेज भेजकर अमेजन का ई-वाउचर मांगा था। जैसे ही यह बात प्रशासन में फैली। कुछ अधिकारियों ने जानकारी हासिल की तो पता चला कि ये फेक मैसेज हैं। इसके बाद अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में बताया गया कि कोई भी उन मैसेज का जवाब न दे।
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